समाजवादी पार्टी के पूर्व विधायक दीप नारायण सिंह यादव उर्फ दीपक यादव एक बार फिर चर्चा में आ गए हैं। प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने बुधवार को उनसे जु़ड़े कई ठिकानों पर छापेमारी की। यह छापेमारी झांचीसी और लखनऊ में की गई है। बताया गया है कि मनी लॉन्ड्रिंग, फर्जी कंपनियों के जरिए पैसे कमाने और उन पैसों को व्हाइट मनी में बदलने जैसे आरोप हैं। अधिकारियों ने बताया है कि दीप नारायण सिंह याव के खिलाफ लगभग दो दर्जन शिकायतें हैं जिनमें धोखाधड़ी, जालसाजी, हत्या का प्रयास और डकैती जैसे मामले शामिल हैं। पहले भी उनकी अरबों की संपत्ति जब्त की जा चुकी है।
अधिकारियों ने बताया कि ED की एक टीम ने लखनऊ के सरोजनी नगर स्थित एक अपार्टमेंट में छापेमारी की। इसके अलावा, झांसी में दीप नारायण के पैतृक आवास और उनके साले के घर पर भी छापेमारी की गई। मनी लॉन्ड्रिंगकी यह जांच उत्तर प्रदेश सतर्कता ब्यूरो की ओर से दीप नारायण के खिलाफ कथित रूप से आय से अधिक संपत्ति रखने के मामले में दर्ज एक एफआईआर और 23 अन्य शिकायतों से जुड़ी है। अधिकारियों के अनुसार, प्रारंभिक जांच में पता चला है कि रियल एस्टेट, निर्माण और अन्य कारोबार से जुड़ी कंपनियों और सीमित देयता भागीदारी (LLP) फर्म के एक नेटवर्क के जरिए अपराध से कमाए गए पैसों को खपाने काम काम किया गया है।
क्या बोले अधिकारी?
ED के अधिकारियों ने बताया कि दीप नारायण यादव के खिलाफ दर्ज कई मामलों में धोखाधड़ी, जालसाजी, जबरन वसूली, हत्या का प्रयास, डकैती आदि से संबंधित मामले शामिल हैं। इस बार हो रही छापेमारी में अहम दस्तावेजों के अलावा डिजिटल डिवाइसों के डेटा को भी खंगाला जा रहा है। साथ ही, कई संपत्तियों के दस्तावेज और वित्तीय लेने-देन के दस्तावेज भी अपने कब्जे में लिए गए हैं।
इसी छापेमारी पर प्रतिक्रिया देते हुए समाजवादी पार्टी के मुखिया अखिलेश यादव ने X पर लिखा है, 'छापा मारना चाहिए कर्नाटक और महाराष्ट्र में मार रहे हैं यूपी में। जहां CC का माल है वहां नहीं जाते हैं, बस दिखावटी औपचारिकता निभाते हैं।'
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कौन हैं दीप नारायण यादव?
झांसी जिले में एक विधानसभा है गरौठा। दीप नारायण यादव इसी सीट से साल 2007 में पहली बार चुनाव जीते थे और 2017 तक विधायक रहे। 2017 और 2022 में भी समाजवादी पार्टी ने उन्हें ही इस सीट से टिकट दिया लेकिन दोनों बार बीजेपी के जवाहर लाल राजपूत ने उन्हें हरा दिया। वह मध्य प्रदेश में समाजवादी पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष और लोहिया वाहिनी के राष्ट्रीय अध्यक्ष भी रह चुके हैं।
झांसी से आने वाले दीप नारायण यादव शुरुआती दिनों से अखिलेश यादव के करीबी रहे हैं। अवैध संपत्ति के मामले में वह पहले भी अलग-अलग एजेंसियों के निशाने पर रहे हैं। जनवरी 2023 में उनकी अरबों की संपत्ति जब्त की गई थी। उनके खिलाफ कई दर्जन मुकदमे चल रहे हैं।
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कितने पैसे वाले हैं दीप नारायण?
साल 2022 के विधानसभा चुनाव के दौरान दीप नारायण ने अपनी सालाना आय लगभग 20 से 30 लाख के बीच बताई थी। उन्होंने अपनी पत्नी की भी लगभग इतनी ही आय घोषित की थी। दीप नारायण ने अपनी कुल 6.79 करोड़ की और अपनी पत्नी की 4.33 करोड़ की चल संपत्ति घोषित की थी। इसके अलावा, खुद की 14.72 करोड़ की और पत्नी मीरा यादव की 9.46 करोड़ की अचल संपत्ति घोषित की थी। दोनों को मिलाकर लगभग 36 करोड़ रुपये की संपत्ति घोषित की गई थी। साथ ही, लगभग 7 करोड़ के कर्ज का भी ब्योरा दिया था। उस चुनावी हलफनामे में दीप नारायण ने सिर्फ 4 मुकदमे पेंडिंग होने की बात की थी।


