मध्य प्रदेश में लिंचिंग के मामले में 7 लोगों को दोषी ठहराए जाने के बाद एक सत्र न्यायाधीश को धमकियां मिल रही हैं। मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने धमकियों से जुड़ी मीडिया रिपोर्ट का संज्ञान लिया। इसके बाद आरोपियों के खिलाफ मामला दर्ज करने और न्यायाधीश की सुरक्षा बढ़ाने का आदेश दिया है।

 

दरअसल, 12 जून को नर्मदापुरम जिले की अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश तबस्सुम खान ने लिचिंग मामले में सात लोगों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी। इस फैसले के बाद से ही उन्हें धमकियां मिल रही थीं।

 

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इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक हाईकोर्ट ने मामले का संज्ञान लिया और कहा कि ऐसी गतिविधियां 'न्यायिक स्वतंत्रता' और 'न्यायिक अधिकारियों के निर्भीक कामकाज में सीधे तौर पर बाधा डालती हैं। न्यायमूर्ति विवेक अग्रवाल और अवनिंद्र कुमार सिंह ने न्यायाधीश तबस्सुम खान को न केवल पुलिस सुरक्षा प्रदान करने का आदेश दिया, बल्कि डीजीपी और अतिरिक्त मुख्य सचिव/प्रधान सचिव (गृह) को धमकाने वाले लोगों के खिलाफ मामला दर्ज करने के संबंध में उठाए जा रहे कदमों पर जवाब भी दाखिल करने को कहा। 

 

हाईकोर्ट ने नर्मदापुरम के एसपी से भी धमकी देने वाले लोगों के खिलाफ उठाए गए कदमों की जानकारी मांगी। अपने आदेश में हाई कोर्ट ने कहा, 'हमारे न्यायिक अधिकारी को केवल इसलिए धमकाया नहीं जा सकता, क्योंकि वह कोई विशेष आदेश पारित करना चुनता है और वह समाज के एक निश्चित वर्ग को पसंद नहीं आता है।'

 

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क्या है मामला?

साल 2022 के अगस्त महीने में भीड़ ने शेख लाला नाजिर अहमद को पीट-पीटकर मार डाला था। उन पर गाय तस्करी का आरोप था। करीब चाल साल बाद नर्मदापुर जिले की सत्र न्यायाधीश तबस्सुम खान ने 12 जून को सात आरोपियों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई। अदालत ने पाया कि दोषियों ने मृतक पर बेहद क्रूरता से हमला किया था। यह फैसला कुछ लोगों को रास नहीं आया। इसके बाद न्यायाधीश तबस्सुम खान को धमकियां मिलने लगीं। कई सोशल मीडिया पोस्ट पर उनके खिलाफ लिखा गया और फैसले पर सवाल उठाए गए।