बिहार में भारतीय जनता पार्टी के पहले मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी इन दिनों सुर्खियों में हैं। 2 दशक से बिहार की सत्ता पर काबिज नीतीश कुमार की विदाई के बाद उन्होंने सत्ता संभाली है। अब उन्हें बधाई देने वाले लोगों का तांता लगा है। ऐसे ही एक बुजुर्ग शख्स की मुलाकात, सोशल मीडिया पर खूब वायरल हो रही है। मुस्लिम समुदाय के एक शख्स ने उन्हें बधाई दी, बधाई के जवाब में सम्राट चौधरी ने कुछ ऐसा किया है, जिसकी सोशल मीडिया पर खूब चर्चा हो रही है।|
सम्राट चौधरी से एक बुजुर्ग मुस्लिम शख्स मिलने आया। शख्स ने सम्राट चौधरी को पहले इस्लामिक टोपी पहनाने की कोशिश की। सिर की तरफ हाथ बढ़ाया, तभी सीएम सम्राट ने उन्होंने ऐसा करने से रोक दिया। टोपी हाथ में ली और अपने सुरक्षाकर्मी को सौंप दी।
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सम्राट चौधरी ने किया क्या है?
सम्राट चौधरी ने मुस्लिम शख्स की दी हुई इस्लामिक टोपी नहीं पहनी। सम्राट चौधरी को शख्स ने सफेद गमछा पहनाया। गमछा पहनते ही उसे उतार दिया और अपने सुरक्षाकर्मी को सौंप दिया। शख्स ने हाथ मिलाने की भी कोशिश की। सम्राट चौधरी ने हाथ भी नहीं मिलाया, सिर्फ नमस्कार करते रहे। उनके इस अंदाज को लेकर खूब चर्चा हो रही है। लोग कह रहे हैं कि सम्राट चौधरी ने अपना राजनीतिक संदेश भी दे दिया है।
क्या लिख रहे हैं लोग?
मोहम्मद अंजुरुल हक ने X पर लिखा, 'जबरदस्ती टोपी पहनने की क्या जरूरत है। टोपी तो पाक साफ इंसान पहनता है फिर जबरन टोपी क्यों पहना रहा था।'
एक दूसरे शख्स ने लिखा, 'टोपी पहनाना क्या जरूरी है? जब जानते हो कि वह हिंदू हैं। हिंदू धर्म से हैं तो क्यों मुसलमानों का ताज पहनना चाहते हो? क्या मिलेगा उसे पहनने से? फूल लेकर चले जाते।'
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सज्जाद हुसैन ने लिखा, 'मुझे समझ में नहीं आता कि टोपी क्यों पहनाते हैं। वह सीएम हों या कोई भी, उनका एक अपना पहनावा होता है। आप उनसे इतनी उम्मीद कीजिए कि वे अपनी जिम्मेदारियां निभाएं। चले जाते हैं टोपी लेकर, यह जाहीलियत है।'
सम्राट चौधरी के समर्थन में क्या लिख रहे हैं लोग?
कुछ लोग सम्राट चौधरी के समर्थन में लिख रहे हैं। लोगों का कहना है कि जिस बिहार में इफ्तार पार्टी का चलन हो, मुख्यमंत्री से लेकर विपक्षी दल तक, रमजान के दौरा सिर पर इस्लामिक टोपी और गमछा पहनते हों, वहां अचानक सीएम सम्राट ने हिंदुत्ववादी रुख अपनाया है। वह अब हिंदुत्व के चेहरे हैं, अपने पुराने अतीत को भूल चुके हैं।
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क्या था सम्राट चौधरी का अतीत?
सम्राट चौधरी और हिंदुत्ववादी और धुर राष्ट्रवादी हैं लेकिन ऐसा हमेशा नहीं था। वह राष्ट्रीय जनता दल में भी रहे हैं। बिहार सरकार में लालू-राबड़ी राज में मंत्री रहे हैं। आरजेडी के नेता तेजस्वी यादव तो यह दावा करते हैं कि वह लालू यादव की राजनीतिक पाठशाला से निकले हैं।
