उत्तर प्रदेश में अधिकारियों के मनमाने रवैये को लेकर, कई नेता आए दिन शिकायत करते रहते हैं। नेता विपक्ष माता प्रसाद पांडेय ने बजट सत्र में अधिकारियों के काम करने के तरीके को लेकर सवाल उठाए थे और सख्त प्रशासनिक कार्रवाई करने की मांग की थी। अब यूपी सरकार ने उनकी मांग सुन ली है। यूपी के मुख्य सचिव शशि प्रकाश गोयल की तरफ से राज्य के सभी अपर मुख्य सचिव, प्रमुख सचिव, डीजीपी के साथ-साथ जिला मजिस्ट्रेट को इस संबंध में आदेश दिया गया है।

अधिकारियों को अब सांसदों और विधायकों का पूरा सम्मान देना होगा। निर्देश में कहा गया है कि राज्य के सभी पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी, जनप्रतिनिधियों का सम्मान करें। अगर जन प्रतनिधि उनसे मिलने आते हैं तो वे खड़े होकर उनका स्वागत करें, उनके विवादों का निपटारा करें। उन्हें जलपान के लिए आमंत्रित करें। जब उनका मामला सुलझ जाए तो उन्हें विदा करने भी जाएं। प्रोटोकॉल का पालन, अनिवार्य होगा। 

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फोन रिसीव करने पर निर्देश

हाल ही में पल्लवी पटेल का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ था, जिसमें वह एक अधिकारी को फोन करती हैं और अधिकारी फोन रख देता है। अब अधिकारी ऐसा नहीं कर सकेंगे। अधिकारियों को सांसद और विधाययकों को CUG और दूसरे मोबाइल नंबर को अपने फोन में सेव करना होगा। उनका फोन हर हाल में रिसीव करना होगा। 

अगर अधिकारी फोन नहीं रिसीव कर पाते हैं तो उन्हें जन प्रतिनिधियों को कारण भी बाना होगा। सांसद या विधायक, जिन मुद्दों को उनके सामने उठाएंगे, उनका समाधान भी उन्हें कराना होगा।

क्यों सरकार ने ऐसे निर्देश दिए हैं?

यूपी में अधिकारियों के रवैये को लेकर सवाल उठते रहे हैं। पुलिस स्टेशन में दरोगा स्तर के अधिकारी, जनप्रतिनिधियों से बदसलूकी कर देते हैं। विपक्ष के कई नेताओं ने ऐसे आरोप लगाए हैं। सरकार ने करीब 15 बार इस संबंध में निर्देश दिए हैं लेकिन कोई सुधार न दिखने के बाद अब सरकार ने यह आदेश जारी किया है। मुख्य सचिव ने अपने निर्देश में साफ तौर पर कहा है कि प्रोटोकॉल में कोई लापरवाही स्वीकार योग्य नहीं है।

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सवाल क्यों उठ रहे हैं?

अखिलेश यादव, राष्ट्रीय अध्यक्ष, समाजवादी पार्टी:-
बीजेपी अपने विधायकों-सांसदों का सम्मान भी मांग कर ले रही है। इज्जत फरमान से नहीं, अच्छे काम से मिलती है।

अखिलेश यादव ने इस आदेश का मजाक उड़ाया है। उन्होंने कहा है कि बीजेपी को अधिकारियों से सम्मान तक मांगना पड़ रहा है। असीम अरुण, माता प्रसाद पांडेय और अखिलेश यादव जैसे नेताओं ने भी यूपी के अधिकारियों के रवैये को लेकर सवाल उठाए हैं। अब सरकार ने जन प्रतिनिधियों का सम्मान करना अनिवार्य कर दिया है।