UP में मोदी-योगी के लिए आसान नहीं विधानसभा चुनाव 2027? अखिलेश यादव ने चला दांव
उत्तर प्रदेश में योगी आदित्यनाथ सरकार इन दिनों कई मोर्चे पर बुरी तरह विपक्ष के निशाने पर है। दिलचस्प बात यह है कि विपक्ष के ये मुद्दे, 2027 में होने वाले विधानसभा चुनावों पर असर भी डाल सकते हैं।

समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव। Photo Credit: PTI
उत्तर प्रदेश में समाजवादी पार्टी ने विधानसभा चुनावों से करीब साल भर पहले ही तैयारियां शुरू कर दी हैं। पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष और सूबे के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव, योगी सरकार को घेरने का एक मौका नहीं छोड़ रहे हैं। उनके पास घेरने के मौके भी खूब हैं, जो आए दिन सुर्खियां बन रहीं हैं। बात चाहे स्मार्ट मीटर की हो, पेट्रोल, डीजल और गैस के लिए तरसते लोगों की हो या सरकारी नौकरियों की, योगी सरकार कई मोर्चे पर घिरी है।
यूपी में स्मार्ट मीटर को लेकर भीषण हंगामा बरपा है। कई जिलों में लोग प्रदर्शन कर रहे हैं। महिलाएं अपने घरों से स्मार्ट मीटर नोच रहीं हैं, सड़कों पर फेंक रही हैं। दावा किया जा रहा है जिन घरों में 500 रुपये प्रति माह का बिल आता था, उन्हें कभी 1200 का बिल मिल रहा है, कभी 1500 का। यूपी के कई जिलों में स्मार्ट मीटकर को लेकर आक्रोश की स्थिति पैदा हो रही है। सरकार के खिलाफ लोग नारेबाजी कर रहे हैं। महिलाएं सबसे ज्यादा मुखर हैं।
सोशल मीडिया पर कई ऐसे क्लिप वायरल हैं, जिनमें लोग अपनी परेशानियां साझा कर रहे हैं और योगी सरकार को घेर रहे हैं। कुछ लोग पेट्रोल और डीजल के लिए पेट्रोल पंप पर लंबे इंतजार को लेकर परेशान हैं, कुछ लोग गैस की किल्लत को लेकर सरकार को घेर रहे हैं। कुछ लोग स्मार्ट मीटर को लेकर राज्य सरकार से नाराज हैं। ये मुद्दे, चाहे केंद्र के हों राज्य के, लोग इन पर बीजेपी सरकारों के खफा हैं।
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स्मार्ट मीटर पर क्यों घिरी है योगी सरकार?
उत्तर प्रदेश में स्मार्ट प्रीपेड बिजली मीटरों को लेकर जनाक्रोश और विरोध प्रदर्शनों देखने को मिल रहे हैं। अब यह मुद्दा चुनावी हो चुका है। अखिलेश यादव ने एलान किया है कि 2027 में उनकी सरकार बनने पर 300 यूनिट मुफ्त बिजली दी जाएगी। लखनऊ समेत कई शहरों में प्रदर्शन हो रहे हैं। बीजेपी विधायकों ने भी इसे लेकर आवाज उठाई है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इस मामले की जांच के लिए एक चार सदस्यीय समिति गठित कर दी है, जिसे 10 दिनों में रिपोर्ट सौंपनी है। नए स्मार्ट मीटर लगाने पर अस्थाई रोक लगा दी गई है।
अखिलेश यादव, राष्ट्रीय अध्यक्ष, समाजवादी पार्टी:-
बीजेपी सरकार ने जनता को लूटने के लिए जो टेक्नोलॉजी का दुरुपयोग करके प्रीपेड मीटर के नाम पर बिजली में भ्रष्टाचार की लूट मचा रखी है। अब उनकी चोरी जनता ने पकड़ ली है। इस बार स्मार्ट मीटर तोड़ें जा रहे हैं अगली बार EVM।
केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण (CEA) के 1 अप्रैल 2026 के संशोधन के बावजूद उपपद (UPPCL) उपभोक्ताओं को प्रीपेड या पोस्टपेड मीटर चुनने का विकल्प नहीं दे रहा है, जिसकी उपभोक्ता परिषद ने कड़ी आलोचना की है। बिना सहमति के 70 लाख कनेक्शनों को प्रीपेड में बदले जाने के बाद लाखों उपभोक्ताओं को बिजली कटौती, महंगे बिल और रिचार्ज से जूझना पड़ रहा है, जिसकी वजह से लोग गुस्से में हैं। कुछ लोगों की शिकायत है कि उनहें पर्याप्त बिजली नहीं मिल पा रही है। सरकार की खूब किरकिरी हो रही है।
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इंडस्ट्रियल मजदूरों की हड़ताल को कैसे भुना रहे अखिलेश?
उत्तर प्रदेश के नोएडा में औद्योगिक मजदूर हड़ताल पर हैं। कुछ दिनों पहले उनके विरोध प्रदर्शनों के दौरान छिटपुट हिंसा की खबरें सामने आईं थीं। मजदूर न्यूनतम मजदूरी, ओवर टाइम और सुरक्षा को लेकर प्रदर्शन कर रहे थे। ये मजदूर, यूपी के कोने-कोने से आए हुए होते हैं। अब अखिलेश यादव इसे भी चुनावी मुद्दे की तरह घेर रहे हैं।
अखिलेश यादव, राष्ट्रीय अध्यक्ष, समाजवादी पार्टी:-
नोएडा में औद्योगिक असंतोष से जन्मे प्रदर्शन के प्रति टकराव का नहीं सुलझाव का रास्ता निकालना चाहिए। प्रदर्शनकारियों और उनके मुद्दों के समर्थन में एकजुटता दिखाने वाले और शांति की अपील करनेवाले युवाओं, एक्टिविस्ट पर लगाए गए फर्जी मुकदमे हटाए जाएं और उनकी तत्काल रिहाई हो। बीजेपी के लोग इतिहास पढ़ें और समझें जन शक्ति से बड़ी कोई ताकत न कभी हुई है न कभी होगी।
महंगा सिलेंडर कैसे बन रहा चुनावी मुद्दा?
अमेरिका और ईरान की जंग की वजह से स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से जहाजें नहीं गुजर रहीं हैं। होर्मुज से भारत, आयातित तेल नहीं ला पा रहा है। अमेरिका ने हालात और बिगाड़ दिए हैं। होर्मुज बंद होने से गैस और तेल संकट की स्थिति तेजी से बढ़ रही है। यूपी में यह संकट और गहरा रहा है। अब सरकार ने अचानक कमर्शियल सिलेंडर के दाम बढ़ाए तो अखिलेश यादव ने इस पर भी योगी सरकार को घेर लिया।
अखिलेश यादव, राष्ट्रीय अध्यक्ष, समाजवादी पार्टी:-
सिलेंडर महंगा नहीं होता, रोटी-थाली महंगी होती है। यह बात वही जानता है जो खुद खरीदकर खाता है, वह नहीं जो दूसरों के यहां जाकर खाता है या दूसरों की थाली से चुराता है। सिलेंडर महंगा करना था तो सीधे 1000 रूपये महंगा कर देते। 1000 में 7 रुपये कम करके ये बीजेपी वाले किस पर एहसान कर रहे हैं? बीजेपी महंगाई, बेरोजगारी, बेकारी व मंदी पर निंदा प्रस्ताव कब लाएगी?
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पेट्रोल और डीजल के लिए तरस रहे यूपी के लोग
पूर्वांचल के कई जिलों में पेट्रोल और डीजल बहुत मुश्किल से मिल रहा है। लोगों को लंबा इंतजार करना पड़ रहा है। कुछ लोगों की जमाखोरी की वजह से ऐसी असुविधा पैदा हो रही है, जिसे पुलिस और प्रशासन नहीं रोक पा रहा है। गोरखपुर से लेकर वाराणसी तक एक जैसा हाल है, फिर भी उचित कदम नहीं उठाए जा रहे हैं। लोग अपनी जरूरी यात्राएं भी टाल रहे हैं। इसे लेकर भी योगी सरकार घिरी है। समाजवादी पार्टी के स्थानीय नेता, बीजेपी सरकार पर हमला बोल रहे हैं। सपा नेताओं का कहा है कि यह कुप्रबंधन है, जिसे सरकार चाहे तो एक दिन में ठीक कर दे लेकिन ऐसा नहीं हो रहा है।
महिला आरक्षण को भी बना गए मुद्दा
एक तरफ केंद्र सरकार, समाजवादी पार्टी समेत विपक्षी दलों पर आरोप लगा रही है कि इनकी वजह से महिला सांसदों की सीट नहीं बढ़ी, उन्हें उनकी जायज हिस्सेदारी नहीं मिली। केंद्र सरकार महिला आरक्षण से जुड़े जिन 3 विधेयकों को सदन में लेकर आई थी, वे अल्पमत की वजह से गिर गए थे। उसे मुद्दा बनाकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने समाजवादी पार्टी को भी राष्ट्र के नाम संबोधन में घेरा था। अब अखिलेश यादव, सरकार की उस मंशा पर ही सवाल उठा रहे हैं।
अखिलेश यादव, राष्ट्रीय अध्यक्ष, समाजवादी पार्टी:-
जो सत्र बुलाकर मूल विषय बदलकर पलट गए, वे गिरगिट की आत्म-उपमा दे रहे थे क्या? गिरगिट तो फिर भी सच्चा है जो रंग बदलता है तो दिखता है लेकिन उनका क्या जो मन में हर क्षण रंग बदलते हैं पर बाहर एकरंग दिखते हैं। बीजेपी दरअसल बदरंग है। पहले इन्होंने परिसीमन के षड्यंत्र का जाल बिछाकर महिला आरक्षण को आने से रोका, अब सीधे-सीधे महिला आरक्षण की बात को सशक्तीकरण का नाम देकर टाल रहे हैं। महिला आरक्षण तो पहले ही पास हो चुका है लेकिन बीजेपी और खासतौर से उनके पुरुषवादी संगी-साथी ऐसा कभी नहीं होने देना चाहते हैं, उन्होंने अपने संगठन में महिलाओं को कभी मान-सम्मान-स्थान नहीं दिया, संसद में क्या देंगे। महिलाएं ही बीजेपी का काल बनेंगी।
और किन मुद्दों पर घेरने की तैयारी है?
अखिलेश यादव इन दिनों खुलकर पिछड़ा, दलित और अल्पसंख्यक (PDA) पर जोर दे रहे हैं। वह अब ब्राह्मणों को भी अपने खेमे में मिलाने की कोशिश कर रहे हैं। हाल ही में विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) की नई गाइडलाइन को लेकर सवर्णों ने नाराजगी जाहिर की थी, सरकार की कड़ी आलोचना की थी, उसे अखिलेश यादव, अवसर की तरह देखते हैं। वह सवर्ण राजनीति के साथ-साथ पिछड़ा, दलित और अल्पसंख्यक राजनीति साध रहे हैं।
अखिलेश यादव, अपने बयानों में सरकार को बेरोजगारी और पेपर लीक पर गेर रहे हैं। उनका कहना है कि जो भर्तियां जरूरी हैं, उन्हें भी नजरअंदाज किया जा रहा है। वह योगी सरकार पर प्रशासनिक तौर पर असफल बताते हैं। आवारा पशुओं को लेकर पहले भी घेरते रहे हैं। किसानों के मुद्दे पर भी वह बीजेपी सरकार की आलोचना कर रहे हैं। अल्पसंख्यक तबके में 'बुलडोजर न्याय' की अखिलेश यादव जमकर आलोचना कर रहे हैं। ये मुद्दे, योगी सरकार की मुश्किलें बढ़ा सकती हैं।
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