ज्योतिर्मठ के शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने एक बार फिर उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को औरंगजेब बताया है। उन्होंने कहा है कि योगी सरकार में वाराणसी में मूर्तियां तोड़ी गईं, वह अपने आप को संत कैसे कह सकते हैं। उन्होंने अपने ऊपर लगे यौन शोषण के आरोपों को फर्जी बताया है। अविमुक्तेश्वरानंद ने कहा है कि अगर यौन शोषण के आरोप सच हैं तो पीड़ित बच्चे, आशुतोष महाराज के पास क्यों हैं। उन्होंने 11 मार्च को लखनऊ कूच करने का एलान किया है।
यौन शोषण मामले में अविमुक्तेश्वरानंद ने इलाहाबाद हाई कोर्ट के फैसले को अपनी जीत बताई है। हाई कोर्ट ने इस मामले में अपना आदेश सुरक्षित रख लिया है और जांच पूरी होने तक या फैसला आने तक उनकी गिरफ्तारी पर रोक लगा दी है। अविमुक्तेश्वरानंद के खिलाफ POCSO एक्ट के तहत केस दर्ज है, जिसमें उन पर गंभीर आरोप लगे हैं। कोर्ट ने अविमुक्तेश्वरानंद को पुलिस जांच में पूरा सहयोग करने का निर्देश दिया है। हाई कोर्ट ने राज्य सरकार और शिकायतकर्ता आशुतोष ब्रह्मचारी से जवाब दाखिल करने को कहा है।
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अविमुक्तेश्वरानंद, शंकराचार्य, ज्योतिर्मठ:-
योगी आदित्यनाथ औरंगजेब से भी बुरे हैं। औरंगजेब ने भी इतनी मूर्तियां नहीं तोड़ी होंगी, जितनी योगी-मोदी के सरकार में टूटी हैं। मंदिर तोड़ने वाले औरंगजेब ही तो होते हैं। औरंगजेब ने मंदिर तोड़े थे। अगर वह मंदिर तोड़ रहे थे तो हमने यह संज्ञा दे दी। हमें वेदना थी तो हमने कही। हम औरंगजेब भी न कहें। यह तो वही बात हो गई कि मारें और रोने भी न दें।
अविमुक्तेश्वरानंद ने कहा, 'वाराणसी में 150 से ज्यादा मंदिर तोड़े। हजारों साल पुराने मंदिर थे। 100 साल से पुरानी इमारतों को पुरातत्व विभाग संरक्षण देता है। हम इन्हें औरंगजेब भी न कहें? औरंगजेब ने मंदिर तोड़े थे लेकिन उन्हें तोड़कर शौचालय नहीं बनाया था। ये लोग औरंगजेब से भी बुरे हैं। औरंगजेब ने गो हत्या बंद कराई थी।'
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आरोपों पर क्या बोले अविमुक्तेश्वरानंद?
अविमुक्तेश्वरानंद ने कहा, 'हमने कभी ऐसा अनुमान नहीं लगाया था कि कोई इतनी नीची हरकत करेगा। लोग कितना नीचे जा सकते हैं। जहां तक यह कहना है कि हमने जो बोला, वह नहीं बोलना चाहिए, हम साधु संतों से समाज को अपेक्षा क्या है। समाज दबा है, सच नहीं बोलता है। साधु संत बनाए इसलिए गए हैं कि ये लोग सच बोलें। अगर हमने बोलना छोड़ दिया तो यह धर्म के साथ गद्दारी है। यह हानि नहीं है, इससे अंतर सुख मिलता है।'
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विपक्ष क्या कह रहा है?
उत्तर प्रदेश कांग्रेस के अध्यक्ष अजय राय ने कहा, 'यह कोर्ट का फैसला दुर्भावना से स्वामी जी को निशाना बनाने की कोशिशों को करारा जवाब है। सत्य की जीत होती है और सत्यमेव जयते। यह न्याय और सच की जीत है। काशी के लोग और कांग्रेस पार्टी उनके साथ है। संतों का अपमान बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। काशी संत परंपरा की पवित्र भूमि है, इसे ठेस पहुंचाना निंदनीय है।'
समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता और सांसद राजीव राय ने कहा, 'कोर्ट सरकार के ऐसे कदमों से वाकिफ है और जानता है कि ऐसा क्यों किया जा रहा है। यह मामला राजनीतिक रूप से प्रेरित है।'
