आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के दौर में दुनिया की दिग्गज टेक कंपनियां इसी पर अरबों-खरबों रुपये खर्च कर चुकी हैं। डेटा सेंटर बनाने, महंगे कंप्यूटर लगाने और तमाम अन्य खर्च के चलते अब इन कंपनियों की चिंता बढ़ने लगी है। यही वजह है कि अब एलन मस्क की टेस्ला ने हफ्ते का खर्च तय कर दिया है। दुनिया की सबसे बड़ी कंपनियों में से एक Meta के मालिक मार्क जुकरबर्ग ने खुद कहा है कि उनकी कंपनी हजारों करोड़ खर्च कर चुकी है लेकिन प्रगति वैसी नहीं है जैसी उम्मीद थी। दिग्गज कंपनियों का यह हश्र AI को लेकर फिर से सोचने पर मजबूर कर रहा है। ये सब तब हो रहा है जब कई कंपनियों ने AI के चक्कर में लोगों को नौकरी से हटाया लेकिन फिर से लोगों को काम पर रखने के लिए मजबूर होना पड़ा।  

 

अब AI पर होने वाला खर्च कंपनियों की चिंता बढ़ा रहा है। इसमें AI पर निवेश करने वाली कंपनियों से लेकर टूल्स का इस्तेमाल करने वाली कंपनियां तक शामिल हैं। AI इन्फ्रा में निवेश करने वाली कंपनियों का मानना है कि उन्हें वैसी रफ्तार नहीं मिल पाई जैसी उम्मीद थी। दूसरी तरफ, महंगे प्लान वाले टूल्स का इस्तेमाल करने वाली कंपनियों की चिंता यह है कि इंसानों की जगह लेने वाला AI कई बार उन्हें एक कर्मचारी की सैलरी से भी महंगा पड़ जा रहा है। यही वजह है कि अब कंपनियां इस खर्च पर नकेल करने में जुट गई हैं। 

 

यह भी पढ़ें: साइबर अपराधी भी जमकर कर रहे AI का इस्तेमाल, जानिए कैसे बना ठगी का हथियार

Tesla ने खर्च पर लगाई लगाम

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, Tesla ने AI पर होने वाले खर्च पर नकेल कसने का एलान किया है। 'द इन्फर्मेशन' की रिपोर्ट के मुताबिक, 6 जुलाई से शुरू होने वाले हफ्ते से हर हफ्ते अधिकतम 200 डॉलर की लिमिट तय कर दी है। यह हैरान करने वाला इसलिए है क्योंकि कुछ दिन पहले ही कंपनी ने अपने कर्मचारियों से कहा था कि वे AI का खूब इस्तेमाल करें। अब इसी कंपनी ने लिमिट लगा दी है। इस रिपोर्ट के मुताबिक, अगर कंपनी का कोई भी शख्स हफ्ते में 200 डॉलर से ज्यादा खर्च करना चाहता है तो उसे मैनेजर से अप्रूवल लेना होगा। कहा जा रहा है कि फिजूलखर्ची कम करने के लिए ऐसा कदम उठाया गया है क्योंकि कई इंजीनियर हजारों डॉलर खर्च कर दे रहे थे।

जुकरबर्ग खुश नहीं हैं?

हाल ही में मेटा की इंटरनल मीटिंग में मार्क जुकरबर्ग ने कहा कि कंपनी ने AI पर खर्च बहुत खर्च किया है लेकिन उसकी प्रोग्रेस ठीक नहीं है। हालांकि, इस साल मेटा अपने AI इन्फ्रास्ट्रक्चर पर 145 बिलियन डॉलर खर्च करने वाला है। इसके बारे में जुकरबर्ग का कहना है कि उन्हें उम्मीद है कि अगले 3 से 6 महीने में AI से उनकी कंपनी को अच्छा फायदा भी होने लगेगा।    

 

यह भी पढ़ें: यूजरनेम फीचर पर सरकार सख्त! WhatsApp के बाद टेलीग्राम और सिग्नल को भी भेजा नोटिस

चिंतित हैं कंपनियां?

खर्च में कमी करने वाली कंपनियों में मेटा या Tesla ही नहीं हैं। कई कंपनियां ऐसी हैं जिन्हें महसूस हो रहा है कि AI पर उनका खर्च ज्यादा हो रहा है। रोचक बात है कि AI के पक्ष में मजबूत दलील दी जाती है कि यह कम खर्च और समय में ज्यादा काम कर सकता है, ऐसे में यही AI ही खर्च का कारण बन रहा है तो कंपनियों की चिंता बढ़ती जा रही है। अब कई कंपनियों में लिमिट तय की जा रही है क्योंकि AI टूल्स के इस्तेमाल का बिल इन कंपनियों को ही भरना पड़ रहा है।

 

टेस्ला की तरह ही ऊबर ने भी अधिकतम 1500 डॉलर हर महीने की लिमिट तय की है। मेटा, अमेजन और वालमार्ट जैसी कंपनियां भी लिमिट लगा चुकी हैं ताकि खर्च को कंट्रोल किया जा सके।