साइबर अपराधी भी जमकर कर रहे AI का इस्तेमाल, जानिए कैसे बना ठगी का हथियार
आजकल AI का इस्तेमाल लोग बहुत तेजी से कर रहे हैं और AI से काम काफी आसान हुआ है। इसके साथ ही स्कैमर्स ने भी AI का इस्तेमाल करके ठगी करने के नए तरीके निकाल लिए हैं।

प्रतीकात्मक तस्वीर। (Chatgpt Generated Image)
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) ने हमारी जिंदगी को पहले से कहीं आसान बना दिया है। आज एआई की मदद से लोग घंटो का काम कुछ ही मिनटों में कर रहे है, फोटो बना रहे है और अन्य कई काम तेजी से पूरे कर रहे हैं। जिस तकनीक का इस्तेमाल अच्छे कामों के लिए हो रहा है, उसी का गलत इस्तेमाल साइबर स्कैमर भी करने लगे हैं। यही वजह है कि ऑनलाइन ठगी के तरीके पहले से ज्यादा खतरनाक हो गए हैं और उन्हें समझना मुश्किल हो गया है।
स्कैमर फर्जी लिंक भेजकर या बैंक अधिकारी बनकर लोगों को धोखा देते थे और कई मामलों में लोग इन्हें पकड़ भी लेते थे क्योंकि फोन पर आवाज की पहचान हो जाती थी और लिंक की डिटेल्स भी मिल सकती थी। अब एआई की मदद से स्कैमर किसी की आवाज की हूबहू नकल कर सकते है, नकली वीडियो बना सकते है और ऐसे मैसेज कर सकते हैं जो बिल्कुल असली लगते हैं। ऐसे मामलों में आम लोगों के लिए असली और नकली के बीच फर्क करना मुश्किल हो गया है।
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AI के गलत इस्तेमाल ने बढ़ाई चिंता
प्राइम इन्फोसर्व डॉट कॉम के अनुसार, हाल ही में भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने अपनी फाइनेंशियल स्टेबिलिटी रिपोर्ट में कहा है कि एआई की मदद से होने वाले साइबर हमले अगले 12 महीनों में भारत के बैंकिंग और वित्तीय क्षेत्र के लिए सबसे बड़ा साइबर खतरा बन सकते है। वहीं, दूसरी और माइक्रोसॉफ्ट और अमेजन की रिपोर्ट से पता चलता है कि हैकर्स साइबर हमलों में एआई का तेजी से उपयोग कर रहे है।
वॉयस क्लोनिंग
वॉयस क्लोनिंक यानी आवाज की नकल करना स्कैमर्स के लिए पहले मुश्किल होता था लेकिन अब एआई की मदद से यह काफी आसान हो गया है। साइबर अपराधी किसी व्यक्ति की कुछ सेकंड की ऑडियो रिकॉर्डिंग लेकर एआई की मदद से उसकी जैसी आवाज तैयार कर लेते हैं। इसके बाद वे परिवार या दोस्तों को फोन करके किसी इमरजेंसी का बहाना बनाते हैं और पैसों की मांग करते है। आपको भी किसी दोस्त का फोन आ सकता है और आप यह तक नहीं पता लगा पाएंगे कि यह आवाज आपके दोस्त की नहीं है।
डीपफेक वीडियो
एआई की मदद से ऐसे वीडियो बनाए जा रहे है जिनमें कोई व्यक्ति ऐसी बातें करता हुआ दिखाई देता है जो उसने कभी कही ही नहीं। इन वीडियो का इस्तेमाल लोगों को गुमराह करने, ब्लैकमेल करने और उनको फंसाने के लिए किया जा रहा है। ऐसे कई मामले सामने आ चुके हैं जिनमें किसी व्यक्ति की डीपफेक वीडियो बनाकर उसे ब्लैकमेल करते हैं और फिर पैसे की मांग करते हैं।
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एआई से तैयार फर्जी ईमेल और मैसेज
पहले फर्जी ईमेल में भाषा की गलतियां होती थीं, जिससे उन्हें पहचानना आसान था। हालांकि, अब एआई ऐसे ईमेल और मैसेज तैयार कर सकता है जो बिल्कुल असली और भरोसेमंद लगते है। इन्हें देखकर लोग आसानी से अपनी जानकारी व बैंकिंग डिटेलस शेयर कर देते हैं।
नकली ग्राहक सेवा
कुछ स्कैमर चैटबॉट का इस्तेमाल करके खुद को बैंक या किसी बड़ी कंपनी का ग्राहक सेवा प्रतिनिधि बताते है। इसके बाद वह आपको अपनी बातों में उलझाएंगे और बातचीत के दौरान व आपसे ओटीपी, पिन या बैंक खाते की जानकारी लेने की कोशिश करेंगे। कई बार ऐसे मामले सामने आ चुके हैं जिनमें ओटीपी और बैंक डिटेल्स के जरिए लोगों से उनका पैसा ठग लिया गया।
कई मामले आ चुके हैं सामने
मुंबई में एआई की मदद से हुई ठगी का एक चौंकाने वाला मामला सामने आया। ई। यह यहां 58 साल के एक एम्प्लोय को उनकी कंपनी के CEO के नाम से वीडियो कॉल आकॉल असली नहीं, बल्कि एआई से बनाई गई थी। वीडियो में CEO की आवाज , बोलने का तरीका और हाव-भाव बिल्कुल असली जैसे लग रहे थे। कॉल करने वाले ने जरूरी काम का बहाना बनाकर एम्प्लोय से 42 लाख रूपए ट्रांसफर करवा लिए। बाद में पता चला कि यह एआई से तैयार किया गया फर्जी वीडियो था।
ऐसा ही एक मामला बेंगलुरु में भी सामने आया। यहां एक सॉफ्टवेयर इंजीनियर को एआई की मदद से तैयार किए गए फर्जी निवेश प्लेटफॉर्म में पैसा लगाने के लिए फंसाया गया। स्कैमर एआई चैटबॉट के जरिए शेयर बाजार की जानकारी और नकली मुनाफे के स्क्रीनशॉट दिखाकर उसका भरोसा जीतते रहे। तीन महीने में इंजीनियर ने करीब 15 लाख रूपए लगा दिए। बाद में पता चला कि पूरा निवेश प्लेटफॉर्म ही फर्जी था और लोगों को ठगने के लिए एआई का इस्तेमाल किया गया था।
क्या बोले एक्सपर्ट्स?
विशेषज्ञों का कहना है कि एआई ने साइबर अपराधियों का काम आसान कर दिया है। अब कम समय और कम खर्च में हजारों लोगों को एक साथ निशाना बनाया जा सकता है। यही कारण है कि साइबर हमलों का तरीका पहले की तुलना में कहीं अधिक तेज़ और प्रभावी हो गया है। बढ़ते खतरे को देखते हुए भारतीय कंप्यूटर इमरजेंसी रिस्पॉन्स टीम (CERT-In) ने भी हाल के महीनों में एआई आधारित साइबर खतरों से निपटने के लिए नए दिशा-निर्देश जारी किए है। इनमें कंपनियों को एआई की मदद से सुरक्षा जांच करने, कमजोरियों को जल्दी पहचानने और सुरक्षा अपडेट तेजी से लागू करने की सलाह दी गई है।
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कैसे रहें सुरक्षित?
- किसी भी अनजान कॉल या वीडियो कॉल पर तुरंत भरोसा न करें।
- पैसे भेजने से पहले व्यक्ति से किसी दूसरे माध्यम से कन्फर्म जरूर करें।
- ओटीपी, पिन, पासवर्ड या बैंक की जानकारी किसी के साथ साझा न करें।
- किसी भी संदिग्ध लिंक पर क्लिक करने से बचें।
- केवल सर्टिफाइड वेबसाइट और मोबाइल ऐप का ही उपयोग करें।
- यदि साइबर ठगी का संदेह हो, तो तुरंत अपने बैंक और साइबर अपराध हेल्पलाइन पर शिकायत दर्ज कराएं।
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस अपने आप में कोई खतरा नहीं है। यह एक ऐसी तकनीक है जो शिक्षा, स्वास्थ्य, कृषि और उद्योग सहित कई क्षेत्रों में बड़ा बदलाव ला रही है। लेकिन जब यही तकनीक गलत हाथों में पहुंचती है, तो यह साइबर अपराध का नया हथियार बन जाती है। इसलिए एआई के बढ़ते इस्तेमाल के साथ लोगों में डिजिटल जागरूकता बढ़ाना, मजबूत साइबर सुरक्षा व्यवस्था तैयार करना और सतर्क रहना पहले से कहीं अधिक जरूरी हो गया है। तकनीक जितनी तेज़ी से आगे बढ़ रही है, उतनी ही तेजी से हमें अपनी सुरक्षा के तरीके भी मजबूत करने होंगे।
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