अगर आप कंप्यूटर पर गेम खेलने के शौकीन हैं तो आपने ग्राफिक कार्ड का नाम सुना होगा। वही ग्राफिक गार्ड जिसके चलते आपका सिस्टम हैवी गेम्स को चला सकता है, अच्छे से वीडियो एडिटिंग हो सकती है और भारी भरकम काम आसानी से किए जा सकते हैं। इसी ग्राफिक कार्ड का सबसे खास हिस्सा ग्राफिक्स प्रोसेसिंग यूनिट (GPU) होता है। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से जुड़े काम करने में सबसे जरूरी चीज यही GPU ही माने जाते हैं। AI के मामले में आत्मनिर्भर बनने की राह पर चल रहे भारत के पास सबसे बड़ी समस्या यही है कि उसके पास GPU की बेहद कमी है और वह इस मामले में अमेरिका और चीन जैसे देशों से सैकड़ों-हजारों गुना पीछे है।

 

भारत में अभी तक इंस्टॉल किए हुए GPUs की संख्या 38 हजार से ज्यादा हो चुकी है। कुल तीन बार में टेंडर निकाले गए हैं और लगभग एक दर्जन कंपनियों ने मिलकर इतने GPU इंस्टॉल किए हैं। हाल ही में सरकार ने 22 हजार और GPU इंस्टॉल करने का एलान किया है। जब दूसरे देशों को देखें तो यह संख्या बेहद कम लगती है। मौजूदा वक्त में भारत में जिन GPU का इस्तेमाल करके स्वदेशी मिशन चलाया जा रहा है, वे भी विदेश से लाए जा रहे हैं। चौतरफा मांग बढ़ने की वजह से भारत में काम करने वाली कंपनियों को भी इसमें समस्या आ रही है और इसमें समय भी काफी लग रहा है।

क्या है GPU?

 

जब कंप्यूटर गेमिंग की शुरुआत हुई थी तब GPU बनाए गए थे। कंप्यूटर की क्षमता बढ़ाने वाले ये GPU असल में कई सारे टास्क को छोटे-छोटे हिस्सों में बांटकर करते हैं और काम की रफ्तार बढ़ा देते हैं। AI मॉडल्स की ट्रेनिंग, डेटा की प्रोसेसिंग और बहुत बड़े डेटाबेस को ऐक्सेस करने के लिए ऐसे ही GPU की जरूरत पड़ती है। 

 

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अब AI के जमाने में आपके सवालों का जवाब देने के लिए सुपरफास्ट कंप्यूटर की जरूरत होती है। अगर किसी देश को या कंपनी को अपना डेटा सेंटर तैयार करना है या क्लाउड सर्विस शुरू करनी है या फिर उसे लार्ज लैंग्वेज मॉडल बनाना है तो बड़ी संख्या में ऐसे GPU की जरूरत होती है जिनकी क्षमता ज्यादा हो। जिस देश के पास जितनी ज्यादा क्षमता हो, उस देश की AI क्षमता उतनी ही ज्यादा मानी जाएगी।

GPU और कंप्यूटिंग में कितना पीछे है भारत?

 

जॉन पेडी रिसर्च की सितंबर 2025 की एक रिपोर्ट बताती है कि साल की दूसरी तिमाही में ही लगभग 7.5 करोड़ यूनिट GPU बेचे गए। इसी रिपोर्ट के मुताबिक, साल 2028 तक दुनियाभर में कुल इंस्टॉल्ड GPU की संख्या 299 करोड़ से भी ज्यादा हो सकती है। इसकी तुलना में देखें तो भारत अभी बहुत पीछे है। 

 

क्षमता के हिसाब से देखने पर भी पता चलता है कि भारत को अभी लंबा सफर तय करना है। अमेरिका में कुल 187 AI क्लस्टर हैं और इनकी कुल क्षमता 3.97 करोड़ (H100 वाले GPU) के आसपास है। वहीं, UAE के 8 क्लस्टर की कुल क्षमता 2.31 करोड़ है। इस लिस्ट में तीसरे नंबर पर सऊदी अरब है। भारत 12 लाख की क्षमता के साथ छठे नंबर पर है।

 

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भारत में कब कितने GPU लगे?

 

पहला राउंड- 18417 GPU (मई 2025)
दूसरा राउंड- 15916 GPU (मई 2025)
तीसरा राउंड- 3850 (18 अगस्त 2025)

तीसरे राउंड में Locuz ने 1300 GPU, इशान इन्फोटेक ने 50 TPU और Sify ने 2500 GPU लगाए। इस तरह अभी तक भारत में लगे कुल GPU की संख्या 34333 हो गई है। 

GPU की कमी बन रही रुकावट

 

भारत के AI मिशन में सबसे बड़ी रुकावट GPU की कमी ही है। AI मॉडल्स को ट्रेन करने, बड़े डेटा सेंटर बनाने के लिए GPU की जरूरत बहुत पड़ती है। अब दुनियाभर में मांग बढ़ने के कारण GPU की सप्लाई कम हुई है और दाम बढ़ गए हैं। भारत के सामने समस्या यह है कि अभी भारत में GPU का निर्माण न के बराबर है और वह GPU के लिए दूसरे देशों पर निर्भर है। मतलब अगर आपके पास भरपूर पैसा है तब भी आप एक झटके में GPU नहीं खरीद सकते हैं।

 

मौजूदा वक्त में भारत अमेरिका, चीन और ताईवान जैसे जैसे देशों से GPU खरीद रहा है। साल 2022-23 में भारत ने अमेरिका से लगभग 10 करोड़ रुपये के GPU, चीन से 40 करोड़ से ज्यादा के और ताईवान से लगभग 90 लाख रुपये के GPU खरीदे थे। साल 2023-24 में इन्हीं तीनों देशों को मिलाकर कुल 60 करोड़ रुपये से ज्यादा के GPU खरीदे गए।

 

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एक समस्या यह भी है कि अमेरिका जैसे देश अब GPU के निर्यात पर रेगुलेशन भी लगा रहे हैं। अमेरिका ने ऐसे नियम लगाए हैं कि मिडिल टियर के देशों को कोई कंपनी एक साल में अधिकतम 1700 GPU ही बेच सकती है। दूसरी तरफ अमेरिकी कंपनियां हर लाखों की संख्या में GPU इंस्टॉल कर रही हैं।


दूसरी बड़ी समस्या है कि भारत अभी GPU डिजाइनिंग के मामले में बेहद पीछे है। अभी भी भारत रिसर्च और डेवलपमेंट फेज में है। अनुमान लगाया जा रहा है कि अगर सब कुछ ठीक रहा तो साल 2030 तक भारत अपने GPU बना सकेगा। हालांकि, मौजूदा रफ्तार के हिसाब तब तक भारत बेहद पीछे छूट चुका होगा।