दिल्ली में आयोजित AI इम्पैक्ट समिट 2026 में रोबोटिक डॉग को लेकर जमकर विवाद हो रहा है। गलगोटिया यूनिवर्सिटी ने समिट में रोबोटिक डॉग को अपने एक प्रोडक्ट की तरह पेश किया लेकिन बाद में पता चला कि यह रोबोटिक डॉग तो चीन की एक कंपनी का है। इसके बाद गलगोटिया यूनिवर्सिटी ने भी कहा कि उन्होंने कभी यह दावा नहीं किया कि यह रोबोटिक डॉग उनकी यूनिवर्सिटी ने बनाया है। इस विवाद का केंद्र लेटेस्ट तकनीक से बना रोबोटिक डॉग है, जो AI से चलता है और बड़े काम की चीज है। इसके कमाल के फीचर्स लोगों को पसंद आ रहे हैं।
विवाद होने से पहले इस रोबोटिक डॉग के फीचर्स काफी चर्चा में थे। इस रोबोटिक डॉग के कारण गलगोटिया यूनिवर्सिटी के स्टॉल पर भारत मंडपम में जमकर भीड़ लगी रही। हालांकि, बाद में विवाद बढ़ने के कारण लोग उस तरफ कम आकर्षित हुए लेकिन यह रोबोटिक डॉग लोगों को पसंद आया। कनीकी जानकारों का कहना है कि यह रोबोटिक डॉग आने वाले समय में सुरक्षा बलों और कई सरकारी विभागों के लिए बहुत काम का साबित हो सकता है। यह सिर्फ एक मशीन नहीं, बल्कि मुश्किल हालात में इंसान की मदद भी कर सकता है।
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क्या है यह रोबोटिक डॉग?
यह एक खास तरह का रोबोट है जो चार पैरों पर चलता है। इसे इस तरह डिजाइन किया गया है कि यह ऊबड़-खाबड़ रास्तों पर भी आसानी से चल सकता है। सीढ़ियां चढ़ना, संकरी जगह में जाना और अंधेरे में काम करना इस रोबोट के लिए बहुत आसान है। इसमें कैमरे और सेंसर लगे होते हैं। ये कैमरे चारों तरफ की तस्वीरें और वीडियो रिकॉर्ड कर सकते हैं। सेंसर की मदद से यह अपने आसपास की रुकावटों को पहचान लेता है और बिना टकराए आगे बढ़ता है। यह चार पैरों पर चलता जरूर है लेकिन जरूरत पड़ने पर दो पैरों पर दौड़ भी लगा सकता है। इसके इन्हीं फीचर्स की वजह से इसके व्यापक इस्तेमाल की चर्चा चल रही है।
सुरक्षा बलों के लिए फायदेमंद
देश की सुरक्षा में तैनात अलग-अलग सुरक्षा बल भी तकनीक के बढ़ते प्रभाव से प्रभावित हुए हैं। लेटेस्ट तकनीक का इस्तेमाल करके सुरक्षा बल अपने आपको और ज्यादा मजबूत करने की कोशिश कर रहे हैं। सुरक्षा बलों के लिए यह रोबोटिक डॉग बहुत फायदेमंद है। इसका सबसे बड़ा फायदा तो यही है कि इसे खतरनाक इलाकों में भेजा जा सकता है। यानी जिस काम के लिए एक सैनिक की जान जोखिम में डालनी पड़ सकती थी उस काम के लिए इस रोबोट को भेजा जा सकता है।
इसे ऐसी जगहों पर भेजा जा सकता है जहां बम होने, आतंकियों के छिपे होने, आग या गैस रिसाव या फिर भूकंप और इमारत गिरने का खतरा हो। ऐसी जगहों पर पहले इंसानों को जाना पड़ता है, जिससे जान का खतरा रहता है लेकिन रोबोटिक डॉग पहले जाकर हालात की जानकारी दे सकता है। यह लाइव वीडियो कंट्रोल रूम तक भेज सकता है, जिससे सुरक्षा बल सही फैसला ले सकें। ऐसी परिस्थितियों में बिना किसी की जान को खतरा पहुंचाए सुरक्षा बल अपना काम कर सकते हैं। सेना बॉर्डर एरिया में भी गश्त के लिए इस रोबोट के इस्तेमाल पर विचार कर रही है और ट्रायल के तौर पर इंडियन आर्मी में कुछ रोबोटिक डॉग को शामिल भी किया गया है।
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आपदा में मददगार
यह रोबोट आपदा के समय भी काफी मददगार साबित हो सकता है। अगर कहीं भूकंप आ जाए या कोई बिल्डिंग गिर जाए, तो मलबे के अंदर फंसे लोगों तक पहुंचना मुश्किल हो जाता है। सुरक्षा में लगे कर्मचारी जब तक मलबा हटाते हैं तब तक बहुत देर हो चुकी होती है लेकिन ऐसी स्थिति में इस डॉग का इस्तेमाल किया जा सकता है। रोबोटिक डॉग छोटे रास्तों से अंदर जाकर स्थिति देख सकता है। यह थर्मल कैमरे की मदद से गर्मी पहचान सकता है, जिससे फंसे हुए लोगों का पता लगाने में मदद मिल सकती है। इससे राहत और बचाव कार्य तेज हो सकते हैं।
इंडस्ट्री में इस्तेमाल
रोबोटिक डॉग का इस्तेमाल आप रोजमर्रा के कामों के लिए, सुरक्षा के लिए या फिर किसी फैक्ट्री और बड़े प्लांट में कर सकते हैं। यह एक इंसान की तरह मशीनों की निगरानी, पाइपलाइन की जांच करना, खतरनाक इलाकों का निरीक्षण, बड़ी बिल्डिंग में जांच के लिए गश्त जैसे काम बड़ी आसानी से कर सकता है। इससे कर्मचारियों का काम कम होता है और जोखिम भी कम हो जाता है।