Eleven Labs vs Sarvam AI: सच में तगड़ी टक्कर होगी या देर हो चुकी है?
भारत के खुद के देसी Sarvam AI ने अपने कुछ टूल्स से सबको प्रभावित किया है और इसकी तुलना Eleven Labs तक से होने लगी है। क्या यह टूल मार्केट कैप्चर कर पाएगा?

Eleven labs vs Sarvam AI, Photo Credit: Social Media
इंडिया AI इंपैक्ट समिट में कई भारतीय AI कंपनियों ने स्वदेशी मॉडल पेश किए। खुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने Bharat Gen, Sarvam AI, Soket AI के स्टॉल पर जाकर उनके प्रोडक्ट देखे और अपने भाषण में भी इनकी चर्चा की। कई पैनल डिस्कसन में भी इनका जिक्र हुआ और ऋषि सुनक जैसी शख्सयतें भी भारतीय मॉडल्स के बारे में बात करते नजर आए। इनमें से एक Sarvam AI की खूब चर्चा हो रही है। कहा जा रहा है कि यह कई दिग्गज कंपनियों के मॉडल को टक्कर दे सकता है और भारतीय भाषाओं के मामले में पहले से मौजूद कई टूल्स से बेहतर भी है।
असल में इसकी तुलना सबसे चर्चित टेक्स्ट टू स्पीच टूल Eleven Labs से हो रही है। इसके अलावा गूगल क्लाउड TTS, ऐमजॉन पॉली, माइक्रोसॉफ्ट अज्यूर और स्पीचिफाई जैसे कई टूल्स हैं जो पहले से ऐसा ही काम कर रहे हैं। ऐसे में भारत के इस नए टूल के सामने चुनौती यही है कि खुद को स्थापित करने के साथ-साथ वह इन टूल्स से भी मुकाबला करे।
क्या है Sarvam AI?
बेंगलुरु से शुरू हुई इस कंपनी ने दो लार्ज लैंग्वेज मॉडल बनाए हैं। एक 30 बिलियन पैरामीटर वाला है और दूसरा 105 बिलियन पैरामीटर वाला है। इन दोनों मॉडल को पूरी तरह से भारत में डेवलप किया गया है। कंपनी का दावा है कि यह कई मामलों में DeepSeek के R1 और गूगल के जेमिनी फ्लैश से बेहतर काम करता है। इसका 'विजन' टूल डॉक्युमेंट्स को स्कैन करने, अपलोडेड डॉक्युमेंट को पढ़ने, उनका विश्लेषण करने और उन्हें डिजिटाइज करने में मदद करता है।
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दूसरा टूल टेक्स्ट को वॉइस और वॉइस को टेक्स्ट में बदलने वाला एक AI टूल है। साथ ही इसके जरिए कई भारतीय भाषाओं में अनुवाद भी किया जा सकता है। इस कंपनी ने कन्वर्जेशनल एजेंट भी बनाए हैं जिसे आप बातचीत कर सकते हैं और अपने काम करा सकते हैं। साथ ही, किसी एक भाषा के वीडियो को दूसरी भाषा में डब भी किया जा सकता है। इसका बीटा वर्जन फ्री है लेकिन आगे आने वाले वर्जन में पेड वर्जन भी आएंगे। इसके प्लान 10 हजार रुपये से शुरू होते हैं। 10000 रुपये में 1000 रुपये का बोनस क्रेडिट मिलेगा और हर मिनट 200 रिक्वेस्ट की जा सकेंगी।अगर आप कमर्शियल इस्तेमाल के लिए इसकी API लेना चाहते हैं तो स्पीच टू टेक्स्ट के लिए 30 रुपये घंटे देने होंगे।
Sarvam AI vs Eleven Labs
Sarvam टूल कुल 11 भाषाओं में काम करता है। इसमें हिंदी और अंग्रेजी के अलावा, बांग्ला, गुजराती, कन्नड़, तमिल, तेलुगू, मलयालम, मराठी, पंजाबी और उड़िया हैं। वहीं, ElevenLabs में भारतीय भाषाओं के अलावा विदेशी भाषाओं से जुड़े काम भी किए जा सकते हैं। दोनों टूल टेक्स्ट टू स्पीच, स्पीच टू टेक्स्ट और डबिंग जैसे काम किए जा सकते हैं। हालांकि, कुछ इलेवेन लैब्स के पास कुछ अतिरिक्त फीचर्स भी हैं जैसे कि ऑडियो बुक, वॉइस टेंजर, वॉइस आइसोलेटर, साउंड इफेक्ट्स आदि।
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हालांकि, अपने विजन टूल के दम पर कुछ मामलों में इलेवन लैब्स से आगे है। Sarvam ऑडियो के अलावा टेक्स्ट पर भी अच्छा काम कर रहा है और अलग-अलग भाषाओं का टेक्स्ट सीधे पढ़ लेने, मनचाही भारतीय भाषा में उसे ट्रांसलेट करने और उसे ऑडियो में बदलने के मामले में वह इलेवन लैब्स से बेहतर काम कर सकता है। हाल ही में Sarvam के को-फाउंडर प्रत्युष कुमार ने olmOCR का डेटा दिखाकर बताया था कि सर्वम की एक्यूरेसी 84.30 थी जो कि Gemini 3 Preo, GPT 5.2 और डीपसीक OCR v2 से भी ज्यादा थी।
सस्ता कौन सा है?
इलेवन लैब्स का पहला और बेस स्टार्टर प्लान 440 रुपये महीने का है जिसमें 30 मिनट तक का ऑडियो तैयार किया जा सकता है। वहीं, इसके प्रो वर्जन के लिए 8712 रुपये हर महीने देने होंगे। साथ ही, कुछ अतिरिक्त चार्ज भी लगता है। वहीं, Sarvam का बिजनेस प्लान 50 हजार रुपये में मिलता है जिसमें 57,500 क्रेडिट, 1000 रिक्वेस्ट प्रति मिनट की लिमिट और फुल सपोर्ट भी मिलता है। Sarvam की API का चार्ज बेहद कम रखा गया है ताकि छोटी कंपनियां भी इसका इस्तेमाल कर सकें।
वहीं, Eleven Labs का मॉडल अगर आप महीने के हिसाब से लेना चाहते हैं तो आपको 1320 डॉलर हर महीने यानी लगभग 1.20 लाख रुपये महीने देने होंगे। Sarvam की तुलना में Eleven Labs के बाकी प्लान भी महंगे हैं।
खुद Eleven Labs के CEO मति स्टैनिसजेवस्की से जब Sarvam के बारे में पूछा गया तो उन्होंने कहा, 'दोनों में 11 भाषाए हैं। Sarvam की टीम बहुत अच्छी है, उनके इंजीनियर्स अच्छे हैं। कई भाषाओं को लेकर उनका टूल काफी बेहतर भी है। हालांकि, आपको बेस्ट मॉडल के साथ-साथ बेस्ट प्रोडक्ट भी चाहिए होता है। यहीं से अंतर शुरू होता है। यह देखना होगा कि आपके एजेंट्स एंटरप्राइज एडिशन के लिए तैयार हों, भरोसेमंद हों। हो सकता है कि कुछ सेगमेंट में कुछ कंपनियां जीत जाएं, और कुछ में न जीतें। अभी तक हम बाकी सारी कंपनियों से आगे रहने में कामयाब रहे हैं।'
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इस मामले में मति स्टैनिसजेवस्की की बात बेहद अहम है। असल में पहले से आने के चलते Eleven Labs जैसे कई अन्य टूल्स का खूब इस्तेमाल हो रहा है। काम में बेहतर होने के बावजूद अगर Sarvam की मार्केटिंग और पैकेजिंग बेहतर नहीं होती है और उसे लोगों तक नहीं पहुंचाया जाता है तो उसकी यह कामयाबी किसी काम की नहीं रहेगी। अगर यह टूल भारतीय भाषाओं के काम को पूरी तरह से कैप्चर कर सके और दूसरे देशों की भाषाओं में भी खुद को फैला सके तो यह सच में Eleven Labs और ऐसे बाकी टूल्स को भी टक्कर दे सकता है।
Sarvam AI को कितने पैसे मिले?
India AI मिशन के तहत कुल 12 कंपनियों को चुना गया है और उन्हें फंडिंग भी दी गई है। इन कंपनियों को यह मदद दी जा रही है ताकि वे स्वेदशी फाउंडेशन मॉडल तैयार कर सकें। इसी क्रम में Sarvam को भी मदद मिली है। इंडिया AI इंपैक्ट समिट में अपने मॉडल पेश करने वाली कंपनियों में ये कंपनियां भी शामिल थीं। इन कंपनियों को पैसे दिए जा रहे हैं ताकि उनकी वास्तविक कंप्यूट कॉस्ट कवर हो जाए और अगर जरूरत पड़े तो 25 प्रतिशत अतिरिक्त पैसे भी दिए जा सकते हैं।
ये पैसे दो अलग-अलग मद में दिए जाते हैं। संसद में भारत सरकार की ओर से दी गई जानकारी के मुताबिक, Sarvam को अभी तक 246.72 करोड़ रुपये मिले हैं। ये पैसे उसे कंप्यूट सपोर्ट के लिए दिए गए हैं। Sarvam को नॉन कंप्यूट मद में अभी पैसे नहीं दिए गए हैं। इसी तरह Gnani को कुल 177.27 करोड़, Soket AI को कुल 177.08 करोड़ और Genloop 2.61 करोड़ रुपये की फंडिंग दी गई है।
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