दिल्ली के एक बुजुर्ग शख्स के विचारों को लेकर सोशल मीडिया पर जबरदस्त बहस छिड़ गई है। एक बुजुर्ग शख्स ने एक सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर के साथ हुई बातचीत में कुछ ऐसा कहा है, जिसे महिलाएं पितृसत्तात्मक सोच का हवाला देकर ट्रोल कर रहीं हैं। सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहे वीडियो में बुजुर्ग शख्स महिलाओं और 'अच्छी बहू' को लेकर अपनी राय रख रहे हैं। यह वीडियो X पर एक कैप्शन के साथ पोस्ट किया गया है, जिसमें लिखा है भारत में तलाक का मुख्य कारण ससुराल वाले होते हैं।
वायरल वीडियो में बुज़ुर्ग व्यक्ति ने महिलाओं से जुड़ी कुछ अपेक्षाएं रखी हैं, जिन पर बड़ी संख्या में लोग आपत्ति जता रहे हैं। उनके बयान के बाद सोशल मीडिया पर तीखी प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं। बताया जा रहा है कि यह व्यक्ति दिल्ली का रहने वाला है। ग्रेजुएट की डिग्री भी है। उसका मानना है कि शादी के बाद एक महिला को अपना पूरा जीवन ससुराल और पति के माता-पिता की सेवा में लगा देना चाहिए, तभी वह अच्छी बहू कहलाने की हकदार होती है। इसी सोच को लेकर महिलाओं और पुरुषों के बीच बहस छिड़ गई है।
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वीडियो में क्या कहा गया है?
वायरल वीडियो में एक महिला बुजुर्ग व्यक्ति से सवाल पूछती है, 'आपके हिसाब से अच्छी बहू कौन होती है?' इसके जवाब में बुज़ुर्ग व्यक्ति कहता है कि 'अच्छी बहू का फर्ज है कि वह अपने माता-पिता की देखभाल करे, और माता-पिता से मेरा मतलब लड़के के माता-पिता से है। लेकिन आजकल की लड़कियां अपने पति के माता-पिता को अपना नहीं मानतीं, वे सिर्फ अपने माता-पिता को ही अहमियत देती हैं।' इस पर महिला सवाल करती है कि इसमें गलत क्या है। जवाब में बुजुर्ग व्यक्ति कहता है कि आजकल की बहुएं पहले सास-ससुर को तंग करती हैं और फिर सास-ससुर के लिए बहू को झेलना मुश्किल हो जाता है।'
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इतना ही नहीं, वह आगे कहता है कि 'लड़कियां शादी के बाद अपनी बहन से ज्यादा बात करती हैं। अगर बात करनी है तो अपनी मां से करें। नए घर में मिक्स-अप नहीं होतीं। यह मैं आपको प्रैक्टिकल बता रहा हूं।
बुज़ुर्ग व्यक्ति के अनुसार एक आदर्श महिला वही है जो शादी के बाद अपने माता-पिता को लगभग भूल जाए, उनकी देखभाल छोड़ दे और सिर्फ पति के माता-पिता को अपना माने।
लोग क्या कह रहे हैं?
इस वीडियो पर बड़ी संख्या में लोगों ने कमेंट किए हैं और बुजुर्ग व्यक्ति के विचारों का विरोध किया है। एक महिला ने लिखा, 'दामाद और बहू दोनों ही अपने-अपने माता-पिता की देखभाल के लिए जिम्मेदार हैं। इसे ड्यूटी नहीं समझना चाहिए। जिन माता-पिता ने हमें पाला-पोसा है, उन्हें बुढ़ापे में हमारे सहयोग की जरूरत होती है। लेकिन समाज में सारी उम्मीदें सिर्फ बहू से ही रखी जाती हैं।'
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एक अन्य महिला ने लिखा कि ‘ ऐसे चाचा हमारे आस-पास हर जगह मौजूद हैं, यहाँ तक कि हमारे अपने परिवारों में भी। शिक्षा का स्तर कोई मायने नहीं रखता, चाहे वे दिल्ली विश्वविद्यालय से स्नातक हों या नहीं। महिलाएं पीढ़ियों से ऐसे ससुराल वालों का सामना करती आ रही हैं।'
एक अन्य यूजर ने लिखा, 'पति के माता-पिता हमारे माता-पिता नहीं होते। यह जैविक सच्चाई है। सिर्फ इसलिए कि पुरुष ऐसा कहते हैं, डीएनए नहीं बदल जाता। अब 2026 है। ससुराल वालों के साथ न रहना और उनकी देखभाल न करना भी एक बुनियादी अधिकार होना चाहिए। बहू की कोई कानूनी ज़िम्मेदारी नहीं होती।'
