हाल ही में वृंदावन के संत प्रेमानंद से मुलाकात करने भारतीय सेना के कुछ जवान पहुंचे थेसोशल मीडिया पर इस मुलाकात का वीडियो खूब शेयर किया जा रहा हैइस दौरान महाराज ने सैनिकों के प्रति गहरा सम्मान दिखाते हुए एक उनको प्रेरणा दीउन्होंने देश की रक्षा में तैनात जवानों के साहस को सलाम करते हुए कहा कि सेनिकों का बलिदान समाज के लिए प्रेरणा का काम करती हैसैनिकों से बात करते हुए प्रेमानंद ने कहा कि हम शास्त्र के माध्यम से लोगों के मन को सुधार रहे हैं और आप शस्त्र के माध्यम से देश की सीमाओं और शांति व्यवस्था को सुधार रहे हैं

 

प्रेमानंद ने स्पष्ट किया कि देश की प्रगति के लिए ज्ञान यानी शास्त्र और शक्ति यानी शस्त्र दोनों का साथ होना बहुत जरूरी है

 

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प्रेमानंद ने क्या कहा?

प्रेमानंद जी ने सैनिको से कहा, 'अगर आपने देश के लिए अपने प्राण समर्पित किए हैं, तो हमने भी देश के लिए अपना पूरा जीवन और तपस्या समर्पित की हैहम हृदय से देश के सभी सैनिकों को आशीर्वाद देते हैं कि वे स्वस्थ रहें, अपने परिवार के साथ सुखी रहें और निश्चिंत होकर देश की सेवा करते रहेंआप यह विश्वास रखें कि हमारे देश के ऋषि-मुनियों की तपस्या आज भी जारी है, वह समाप्त नहीं हुई है।'

आगे उन्होंने कहा, 'हम दोनों ही अपने-अपने तरीके से देश की रक्षा कर रहे हैंआप शस्त्रों के माध्यम से और हम शास्त्रों के माध्यम सेहम शास्त्रों से लोगों की सोच और बुद्धि को सुधारने का कार्य कर रहे हैं, जबकि आप उन विकृत तत्वों का अंत कर रहे हैं जो समाज के लिए कैंसर की तरह हैंहम भीतर से सुधार कर रहे हैं और आप बाहर सेइसलिए आप बिना किसी संकोच के गर्व के साथ अपना कर्तव्य निभाइए।'

 

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उन्होंने कहा कि जब देश का जवान सीमा पर जागता है, तभी पूरा देश चैन की नींद सो पाता हैमहाराज ने सैनिकों को प्रोत्साहित करते हुए कहा कि वे केवल अपनी ड्यूटी नहीं कर रहे बल्कि एक महान धर्म का पालन कर रहे हैंमहाराज ने आगे कहा कि जैसे एक संत समाज को कुरीतियों और बुराइयों से बचाने के लिए शास्त्रों का सहारा लेता है, वैसे ही एक सैनिक बाहरी दुश्मनों से देश को बचाने के लिए शस्त्र का इस्तेमाल करता है