तेलंगाना में सैकड़ों कुत्तों की शामत आ गई है। जगह-जगह उन्हें मारा गया है, दफनाया गया है, अचानक 900 से ज्यादा कुत्तों की लाशें मिलीं हैं। जगतियाल जिले के पेगडापल्ली गांव में गुरुवार को करीब 300 कुत्तों की लाश, एक गड्ढे में फेंके देखे गए हैं। हैदराबाद से करीब 200 किलोमीटर दूर कुत्तों की लाशें मिलने पर राज्य में हड़कंप मच गया है। लोगों सवाल पूछ रहे हैं कि आखिर ऐसा क्या हुआ है कि इतनी बड़ी संख्या में कुत्तों को मारकर फेंका जा रहा है। 

आवारा पशुओं के अधिकारों की लड़ाई लड़ने वाली संस्था 'स्ट्रे एनिमल फाउंडेशन ऑफ इंडिया' की एक टीम ने गांव का दौरा किया है। एनिमल एक्टिविस्ट प्रीति मुदावथ ने भी पेगडापल्ली गांव का दौरा किया है। ग्रामीणों ने प्रीती मुदावथ को बताया कि दो महिलाओं ने कुत्तों को जानलेवा इंजेक्शन दिए। पहले गड्ढा आधा भरा था, लेकिन शाम तक उसमें 75 फीसदी तक कुत्तों के शव भर गए। 

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गड्ढे में दफनाए गए कुत्तों के शव

ग्राम पंचायत के मजदूरों ने ट्रैक्टर से शवों को गांव से 2 किलोमीटर दूर एक गड्ढे में दफना दिया। प्रीति ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई, जिसके आधार पर पेगडापल्ली पुलिस ने गांव के सरपंच, ग्राम पंचायत सचिव और कुछ अन्य लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया। यह केस भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 325 के साथ 3(5) और पशु क्रूरता निवारण अधिनियम 1960 की धारा 11(1)(a) के तहत दर्ज हुआ है। ये धाराएं जानवरों को जहर देकर या मारने से जुड़ी हैं। अगर कोई समूह ऐसा करता है, तब ये धाराएं लगाई जाती हैं। 

क्या कह रही हैं ये धाराएं?

दिल्ली हाई कोर्ट में वकील स्निग्धा त्रिपाठी ने बताया कि  भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 325 जानवरों के साथ क्रूरता से जुड़ी है। इसमें किसी जानवर को जानबूझकर मारना, जहर देना, अपंग बनाना या उपयोगी न होने लायक करना अपराध है। इसके दोषियों को 5 साल तक कैद हो सकती है, जुर्माना या दोनों हो सकता है। यह जमानती अपराध है।

एडवोकेट स्निग्धा त्रिपाठी ने बताया कि BNS की धारा 3(5) सामान्य आशय  या कॉमन इंटेंशन से जुड़ी है। जब कई लोग मिलकर अपराध करते हैं और सबका एक ही इरादा होता है, तो हर व्यक्ति को उतनी ही सजा मिलती है, जितनी मुख्य दोषी को।  पशु क्रूरता निवारण अधिनियम 1960 की धारा 11(1)(a) कहती है कि किसी जानवर को पीड़ा देना, मारना या क्रूरता करना अपराध है। इसेक तहत दोषी पर जुर्माना लगाया जाता है और 3 महीने तक कैद हो सकती है।  

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तेलंगाना में 900 से ज्यादा कुत्तों की मौत

टाइम्स ऑफ इंडिया की एक रिपोर्ट बताती है कि बीते कुछ सप्ताह से तेलंगाना के कई जिलों में ऐसी घटनाएं सामने आ रहीं हैं। कमरेड्डी में 200, हनुमकोंडा में 300, रंगा रेड्डी में 100 और जगतियाल में 30 कुत्ते मारे गए थे। कुल मिलाकर इस महीने अब तक 900 के करीब स्ट्रे डॉग्स की मौत हो चुकी है। 

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तेलंगाना में कुत्तों की मौतें क्यों हो रही हैं?

राज्य में आए ज्यादातर मामलों में आरोप है कि नए चुने गए सरपंचों और ग्राम पंचायत प्रतिनिधियों ने चुनाव के दौरान वादा किया था कि वे गांव में सड़क पर घूमने वाले कुत्तों और बंदरों की समस्या खत्म करेंगे। इसी वादे को पूरा करने के लिए उन्होंने कुत्तों को मारने का फैसला किया। 

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इंजेक्शन या जहर देकर मारे जा रहे हैं कुत्ते

ज्यादातर मामलों में कुत्तों को जहर या इंजेक्शन देकर मारा गया। एनिमल एक्टिविस्ट इसे बेहद क्रूरता बता रहे हैं। वे कहते हैं कि सड़क कुत्तों की समस्या का हल मारना नहीं, बल्कि नसबंदी और वैक्सीनेशन है। भारत में पशु क्रूरता निवारण कानून 1960 और सुप्रीम कोर्ट के कई फैसलों में साफ कहा गया है कि स्ट्रे डॉग्स को मारना गैरकानूनी है। 

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क्या कह रहे हैं लोग?

ज्यादातर लोगों का कहना है कि अगर कुत्तों की संख्या बढ़ रही है तो एनिमल बर्थ कंट्रोल (ABC) मेथड से इन्हें संभाला जाए। कुत्तों की नसबंदी की जाए और उन्हें छोड़ दिया जाए। पशु प्रेमी इंसाफ मांग रहे हैं। पुलिस ने कई जगहों पर FIR दर्ज की है। लोगों का कहना है कि सिर्फ FIR से बात नहीं बनेगी, गिरफ्तारी भी होनी चाहिए। तेंलगाना का चुनावी वादा, कुत्तों के अस्तित्व के लिए ही काल बनकर आ गया है।