उत्तर प्रदेश की ब्रजभूमि में आस्था और अटूट संकल्प का अद्भुत उदाहरण देखने को मिल रहा है। आगरा के आराध्य गुप्ता ने अपनी स्वर्गीय दादी की स्मृति को की स्मृति में हाथ के बल पांव आसमान की ओर उठाकर बरसाना की करीब सात किलोमीटर लंबी परिक्रमा करने का संकल्प लिया है। यह केवल एक धार्मिक यात्रा नहीं, बल्कि भक्ति, समर्पण और आत्मविश्वास का ऐसा अनूठा संदेश है, जिसने हर किसी का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है। आराध्य का लक्ष्य इस उपलब्धि के जरिए गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड सहित कई प्रतिष्ठित रिकॉर्ड बुक में अपना नाम दर्ज कराना भी है।

 

आराध्य गुप्ता ने यह कठिन परिक्रमा अपनी स्वर्गीय दादी की स्मृति को समर्पित की है। उनका मानना है कि श्रद्धा, आस्था और दृढ़ इच्छाशक्ति से कोई भी कठिन लक्ष्य हासिल किया जा सकता है।आगरा के प्रतीक विहार फेस-2 निवासी कमलेश गुप्ता और सीमा गुप्ता के बेटे आराध्य का झुकाव बचपन से ही धार्मिक और आध्यात्मिक गतिविधियों की ओर रहा है। परिवार के अनुसार, वह अपनी जुड़वां बहन के साथ नियमित रूप से पूजा-पाठ, भजन और धार्मिक आयोजनों में भाग लेते रहे हैं।

 

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पांच साल की मेहनत अब आई सामने

हाथों के बल कई किलोमीटर तक चलना बेहद कठिन माना जाता है। आराध्य पिछले पांच वर्षों से लगातार इसका अभ्यास कर रहे हैं। आठ वर्ष की उम्र से शुरू हुई उनकी मेहनत अब बरसाना की इस ऐतिहासिक परिक्रमा के रूप में सामने आई है। पूरी यात्रा के दौरान उनकी मां सीमा गुप्ता लगातार उनके साथ रहकर हौसला बढ़ा रही हैं।

 

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गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड पर नजर

आराध्य का सपना केवल परिक्रमा पूरी करना नहीं, बल्कि अपनी इस उपलब्धि को विश्व स्तर पर दर्ज कराना भी है। इसके लिए उन्होंने गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड, इंडिया बुक ऑफ रिकॉर्ड, लिम्का बुक ऑफ रिकॉर्ड और एशिया बुक ऑफ रिकॉर्ड में आवेदन किया है। आराध्य का यह संकल्प केवल व्यक्तिगत उपलब्धि नहीं, बल्कि नई पीढ़ी के लिए प्रेरणा भी बन रहा है। कम उम्र में अनुशासन, कठिन परिश्रम और आस्था का यह संगम लोगों को यह संदेश दे रहा है कि दृढ़ निश्चय के सामने कोई भी लक्ष्य असंभव नहीं होता।