उत्तर प्रदेश में त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव को लेकर इलाहाबाद हाईकोर्ट ने शुक्रवार को बड़ा फैसला सुनाते हुए राज्य सरकार के उस आदेश पर रोक लगा दी, जिसके तहत ग्राम प्रधानों को प्रशासक बनाया गया था। अदालत ने स्पष्ट किया कि जिन कानूनी प्रावधानों के आधार पर यह आदेश जारी किया गया, उन्हें पहले ही असंवैधानिक घोषित किया जा चुका है।
हाईकोर्ट ने सरकार से पंचायत चुनाव की स्पष्ट समय-सीमा और ओबीसी आयोग की रिपोर्ट पेश करने का निर्देश देते हुए मामले की अगली सुनवाई 13 जुलाई तय की है। न्यायमूर्ति सिद्धार्थ नंदन की एकल पीठ ने अरविंद राठौर की याचिका पर सुनवाई करते हुए कहा कि पंचायत चुनाव को अनिश्चितकाल तक टालना संविधान की मंशा के विपरीत है। अदालत ने कहा कि संविधान के अनुच्छेद 243-ई और 243-के के तहत पंचायतों का कार्यकाल पांच वर्ष का निश्चित है और समय पर चुनाव कराना अनिवार्य है।
सरकार के आदेश को माना असंवैधानिक
कोर्ट ने कहा कि 25 और 26 मई 2026 को जारी सरकारी आदेश उस कानूनी प्रावधान के आधार पर पारित किए गए थे, जिसे इलाहाबाद हाईकोर्ट की खंडपीठ पहले ही असंवैधानिक घोषित कर चुकी है। ऐसे में उन्हीं प्रावधानों के आधार पर ग्राम प्रधानों को प्रशासक बनाए रखने का आदेश न्यायिक व्यवस्था के अनुरूप नहीं माना जा सकता।
सुनवाई के दौरान राज्य सरकार ने पंचायत चुनाव में देरी की वजह ओबीसी आयोग की रिपोर्ट लंबित होना बताया। इस पर हाईकोर्ट ने सवाल उठाते हुए कहा कि सर्वोच्च न्यायालय के निर्देशों के बावजूद आयोग की रिपोर्ट अब तक क्यों प्रस्तुत नहीं की गई। अदालत ने सरकार को विस्तृत हलफनामा दाखिल कर पूरी स्थिति स्पष्ट करने का निर्देश दिया है।
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चुनाव आयोग ने कहा- हम तैयार हैं
राज्य निर्वाचन आयोग ने अदालत को बताया कि पंचायत चुनाव के लिए मतदाता सूची 10 जून 2026 को प्रकाशित की जा चुकी है और आयोग चुनाव कराने के लिए पूरी तरह तैयार है। हालांकि, राज्य सरकार से आवश्यक प्रशासनिक और लॉजिस्टिक सहयोग नहीं मिलने के कारण चुनाव प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ पा रही है।
हाई कोर्ट ने मांगा जवाब
हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को अंतिम अवसर देते हुए निर्देश दिया है कि अगली सुनवाई से पहले ओबीसी आयोग की रिपोर्ट, चुनाव कराने की समय-सीमा और पूरी कार्ययोजना अदालत के समक्ष प्रस्तुत की जाए। अदालत ने यह भी कहा कि यदि सरकार संतोषजनक जवाब नहीं देती है तो संबंधित अधिकारी को व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होकर स्पष्टीकरण देना होगा। आदेश का पालन न होने की स्थिति में इसे प्रथम दृष्टया न्यायालय की अवमानना माना जा सकता है।
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13 जुलाई को होगी अगली सुनवाई
मामले की अगली सुनवाई 13 जुलाई 2026 को दोपहर दो बजे होगी। अब पूरे प्रदेश की नजर इस बात पर है कि राज्य सरकार अदालत के निर्देशों का पालन करते हुए पंचायत चुनाव को लेकर क्या रोडमैप पेश करती है। यह फैसला प्रदेश की पंचायत राजनीति और चुनावी प्रक्रिया पर बड़ा असर डाल सकता है।