उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर में करणी सेना के प्रदेश महासचिव गौरव चौहान का एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। इस वीडियो में उन्होंने यूनिवर्सिटी ग्रांट्स कमीशन (UGC) के एक नए कानून के खिलाफ अपना कड़ा विरोध जताया है। वीडियो में गौरव यह कहते हुए नजर आ रहे हैं कि जनरल वर्ग के लोग अपने कॉलेजों, अस्पतालों और होटलों के बाहर ऐसे पोस्टर लगाएं जिनमें अनुसूचित जाति और अन्य पिछड़े वर्ग (SC-OBC) वर्ग के लोगों के प्रवेश पर रोक की बात लिखी हो। 


उन्होंने सामान्य वर्ग के कारोबारियों और संस्थान के मालिकों से अपील की है कि वे विरोध स्वरूप अपने ठिकानों पर सामाजिक भेदभाव को बढ़ावा देने वाले कदम उठाएं। उनका तर्क है कि जब तक सरकार इस कानून को वापस नहीं लेती, तब तक वे किसी भी तरह का सामाजिक तालमेल या ‘भाईचारा’ नहीं निभाएंगे।

 

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विवाद की मुख्य वजह

इस पूरे घटनाक्रम के पीछे मुख्य कारण यूजीसी का वह नया नियम बताया जा रहा है जिसे लेकर जनरल वर्ग के कुछ संगठन नाराज हैं। गौरव चौहान ने सीधे तौर पर जनरल वर्ग के लोगों को लामबंद होने के लिए कहा है। उन्होंने अपील की है कि जनरल वर्ग के मालिकाना हक वाले सभी संस्थान जैसे कॉलेज और अस्पताल पर स्पष्ट तौर पर लिख दिया जाए कि यहां आरक्षित वर्गों के एंट्री पर बैन है। उनका कहना है कि जब कानून में किसी तरह की समानता नहीं है तो समाज में भाईचारा दिखाने का कोई मतलब नहीं रह जाता। उन्होंने इसे कानून वापस होने तक जारी रखने की चेतावनी दी है।

उन्होंने कहा, 'यह कानून बहुत खराब है। इसके अंतर्गत अगर किसी जनरल वर्ग की लड़की पर आरोप लगाया गया कि उसने किसी SC या OBC वालों को गाली दी है तो बिना किसी जांच के उसे भी जेल भेज दिया जाएगा। भलें ही बाद में उस पर लगे आरोप झूठे साबित हो जाए फिर भी उसमें किसी को भी सजा नहीं होंगी। यह अंधा कानून है। केंद्र की सरकार को यह सोचना चाहिए कि केवल जनरल कास्ट ही इस देश की रीढ़ की हड्डी है।' 

 

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कौन है गौरव चौहान?

वे हाल ही में मुजफ्फरनगर के सिविल लाइन थाना क्षेत्र में समाजवादी पार्टी (SP) जिला अध्यक्ष जिया चौधरी के साथ हुई हिंसक झड़प के लिए चर्चा में आए थे जहां उन्होंने SP ऑफिस पर हमला किया और अपशब्द कहे। जनवरी 2026 की शुरुआत में महावीर चौक पर SP के कैंडल मार्च के दौरान दोनों पक्षों में मारपीट हुई, जिसके बाद पुलिस ने गौरव चौहान को हिरासत में लिया था। हिंदू संगठनों ने उनकी गिरफ्तारी का विरोध किया और थाने पर प्रदर्शन हुए। उन्हें संगीत सोम जैसे नेताओं पर टिप्पणियों से जुड़े विवादों में भी देखा गया है।