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शहरी लोगों की पसंद बन रहीं ई-बाइक, लोगों का फायदा है या नुकसान?

शहरों में पेट्रोल का खर्च बचाने के लिए अब 35% लोग अपनी पुरानी गाड़ियों के साथ इलेक्ट्रिक स्कूटर भी रख रहे हैं और इसी वजह से देश में इनकी बिक्री 9 लाख के पार पहुंच गई है।

Electric Scooter, Photo credit: Social Media

इलेक्ट्रिक स्कूटर, Photo credit: Social Media

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भारतीय शहरों की सड़कों पर अब पेट्रोल गाड़ियों के शोर के बजाय इलेक्ट्रिक स्कूटर और ई-बाइक ज्यादा दिखने लगी हैं। नई रिपोर्ट्स और आंकड़ों से पता चलता है कि शहरों में आने-जाने का तरीका अब पूरी तरह बदल रहा है। फेडरेशन ऑफ ऑटोमोबाइल डीलर्स एसोसिएशन (FADA) और 'वाहन' पोर्टल के मुताबिक पिछले दो सालों में इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर की बिक्री दोगुनी से भी ज्यादा बढ़ गई है। अब लोग इसे सिर्फ शौक के लिए नहीं बल्कि अपनी जरूरत के लिए खरीद रहे हैं। पेट्रोल के लगातार बढ़ते दाम और प्रदूषण की चिंता ने आम आदमी को इलेक्ट्रिक गाड़ियों की तरफ मोड़ने में बड़ी भूमिका निभाई है।

 

इलेक्ट्रिक वाहनों की बिक्री के पुराने और नए आंकड़ों की तुलना करें तो फर्क एकदम साफ नजर आता है। साल 2021-22 के दौरान देशभर में लगभग 2.3 लाख इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर की बिक्री हुई थी। वहीं साल 2023-24 के ताजा डेटा के अनुसार, यह संख्या बढ़कर 9 लाख के पार पहुंच चुकी है। नीति आयोग की एक हालिया रिपोर्ट, जो 'ई-अमृत' पोर्टल पर शेयर की गई है, उसके मुताबिक भारत में हर महीने लगभग 70,000 से 80,000 नए इलेक्ट्रिक स्कूटर सड़कों पर उतर रहे हैं। इसका सीधा मतलब यह है कि पहले के मुकाबले अब चार गुना ज्यादा लोग बैटरी वाली गाड़ियों पर भरोसा जता रहे हैं और उन्हें अपना रहे हैं।

 

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पेट्रोल गाड़ी होते हुए भी इलेक्ट्रिक की भारी डिमांड

मार्केट रिसर्च करने वाली फर्म 'कास्टेलम' और कुछ दूसरी स्वतंत्र संस्थाओं की रिपोर्ट में एक बहुत ही दिलचस्प बात सामने आई है। इस डेटा के अनुसार, लगभग 35% लोग ऐसे हैं जिनके घर में पहले से ही एक पेट्रोल वाली बाइक या कार मौजूद है लेकिन इसके बावजूद उन्होंने एक नया इलेक्ट्रिक स्कूटर खरीदा है।

 

लोग लंबी  दूरी की यात्रा या शहर से बाहर जाने के लिए अपनी पुरानी पेट्रोल गाड़ियों का इस्तेमाल करते हैं लेकिन घर के पास के काम, ऑफिस जाने या बाजार जाने के लिए इलेक्ट्रिक स्कूटर को ही पहली पसंद मान रहे हैं। डेटा यह भी बताता है कि ऐसा करने से लोगों के महीने का पेट्रोल खर्च लगभग 80% तक कम हो जाता है, जो एक बड़ी बचत है।

पर्यावरण पर इसका असर

सोसाइटी ऑफ मैन्युफैक्चरर्स ऑफ इलेक्ट्रिक व्हीकल्स (SMEV) की रिपोर्ट के अनुसार, इलेक्ट्रिक स्कूटरों के बढ़ते इस्तेमाल से शहरों में प्रदूषण कम करने में बहुत बड़ी मदद मिली है। एक औसत इलेक्ट्रिक स्कूटर पेट्रोल वाली गाड़ी के मुकाबले साल भर में लगभग 300 किलोग्राम कार्बन डाइऑक्साइड कम पैदा करता है। अगर खर्चे की बात करें तो जहां पेट्रोल वाले स्कूटर को चलाने का खर्च प्रति किलोमीटर 2.5 से 3 रुपये के बीच आता है, वहां इलेक्ट्रिक स्कूटर को चलाने का खर्च मात्र 20 से 30 पैसे प्रति किलोमीटर ही बैठता है। इसी भारी बचत की वजह से सामान की डिलीवरी करने वाले लोग और छोटे दुकानदार अब इसे सबसे ज्यादा पसंद कर रहे हैं।

 

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चार्जिंग की सुविधा

इलक्ट्रिक गाड़ियों की बढ़ती संख्या को देखते हुए अब शहरों में चार्जिंग पॉइंट्स को लेकर बहुत तेजी से काम हो रहा है। कन्वर्जेंस एनर्जी सर्विसेज लिमिटेड (CESL) के मुताबिक, बड़े शहरों में कोशिश की जा रही है कि हर 3 से 5 किलोमीटर की दूरी पर चार्जिंग की सुविधा मिल सके। इसके अलावा सरकार की फेम-2 (FAME-II) योजना और राज्यों से मिलने वाली छुट की वजह से अब ये गाड़ियां खरीदना आम आदमी के बजट में आ गया है। एक्सपर्ट्स का तो यहां तक कहना है कि साल 2030 तक सड़कों पर चलने वाली हर 10 में से 8 टू-व्हीलर गाड़ियां इलेक्ट्रिक ही होंगी। 


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