logo

मूड

ट्रेंडिंग:

'ऑर्डर देना बंद कर देंगे', स्विगी की प्लेटफॉर्म फीस बढ़ने से भड़के लोग

जोमैटो के बाद स्विगी ने भी अपनी प्लेटफॉर्म फीस बढ़ाकर 17.58 रुपये कर दी है। जिससे सोशल मीडिया पर यूजर्स ने नाराजगी जाहिर की है। कुछ ने संकेत दिए कि ऑर्डर देना बंद कर देंगे।

representative image of delivery boy

प्रतीकात्मक तस्वीर। (AI Generated Image)

शेयर करें

google_follow_us

अगर आप भी किसी वजह से घर बैठे खाना मंगाने के शौकीन हैं तो अपनी जेब थोड़ी और ढीली करने के लिए तैयार हो जाइए। ऑनलाइन फूड डिलीवरी स्विगी ने अपने प्रतिद्वंद्वी जोमैटो के नक्शे कदम पर चलते हुए प्लेटफॉर्म फीस में बढ़ोतरी कर दी है। अब ग्राहकों को हर ऑर्डर पर 14.99 रुपये के बजाय 17.58 रुपये प्लेटफॉर्म फीस के रूप में चुकाने होंगे। बाजार में दबदबा रखने वाली इन दोनों कंपनियों के इस फैसले से सोशल मीडिया पर यूजर्स का गुस्सा फूट पड़ा है।

 

पिछले ही हफ्ते जोमैटो ने भी अपनी फीस में इजाफा किया था। जानकारों का मानना है कि फूड एग्रीगेटर्स अब डिस्काउंट के दौर को पीछे छोड़कर पूरी तरह से मुनाफे पर ध्यान केंद्रित कर रहे हैं। हालांकि, बाजार में कुछ नए छोटे प्लेयर्स की एंट्री हुई है लेकिन फिलहाल स्विगी और जोमैटो के वर्चस्व के आगे ग्राहकों के पास विकल्प सीमित हैं।

 

यह भी पढ़ें: मिडिल-ईस्ट संकट के बीच में सोने-चांदी की कीमत बढ़ने के बजाय कम क्यों हो रही है?

फीस क्यों बढ़ रही है?

फूड डिलीवरी ऐप्स के लिए प्लेटफॉर्म फीस अभी कम लगती है लेकिन धीरे-धीरे बिल का एक बड़ा हिस्सा बनती जा रही है। भले ही एक बार में यह ज्यादा न लगे लेकिन जो लोग अक्सर ऑर्डर करते हैं उन्हें कुल मिलाकर काफी ज्यादा पैसे देने पड़ते हैं। कंपनियों का कहना है कि ऐप चलाने का खर्च, टेक्नोलॉजी अपडेट और दूसरे ऑपरेशनल खर्चों को पूरा करने के लिए यह फीस जरूरी है।

 

दिलचस्प बात यह है कि फीस बढ़ाने का समय भी अहम है। नई कंपनियां अब फूड डिलीवरी मार्केट में आ रही हैं। राइड-हेलिंग कंपनी रैपिडो ने बेंगलुरु में अपनी नई सर्विस 'ओनली' लॉन्च की है। रैपिडो का कहना है कि वह स्विगी और जोमैटो की तरह अलग से प्लेटफॉर्म फीस नहीं लेगी। वह सिर्फ डिलीवरी फीस लेगी जिससे कस्टमर्स को कुछ राहत मिल सकती है।

 

यह भी पढ़ें: किन देशों के तेल पर चलती हैं भारत की गाड़ियां? कहां से आता है तेल

फीस बढ़ने से भड़के यूजर्स

सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर इस बढ़ोतरी को लेकर तीखी बहस छिड़ गई है। एक यूजर ने लिखा, 'सब्सिडी का जमाना गया, अब कंपनियां अपनी बैलेंस शीट सुधारने के लिए ग्राहकों की जेब काट रही हैं।' वहीं दूसरे यूजर ने चुटकी लेते हुए कहा, 'ये कंपनियां जानती हैं कि हम पास के ढाबे तक पैदल जाने से बचने के लिए कितना भी एक्स्ट्रा पैसा देने को तैयार हैं।' एक यूजर ने कहा, 'यह उस स्टेज पर पहुंच रहा है जहां लोग ऑर्डर करना बंद कर देंगे क्योंकि टोटल चार्ज बहुत ज्यादा हैं।'

Related Topic:#Business News

और पढ़ें