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बिटकॉइन ने करवा दिया मालामाल, पहली बार पहुंचा 1 लाख डॉलर के पार

पहली बार बिटकॉइन के रेट 1 लाख डॉलर के पार पहुंच गए हैं। कहा जा रहा है कि डोनाल्ड ट्रंप की जीत के चलते आई यह रफ्तार आने वाले समय में और भी बढ़ सकती है।

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बिटकॉइन की प्रतीकात्मक तस्वीर, Source: Freepik

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जब से अमेरिका के चुनाव में डोनाल्ड ट्रंप को जीत मिली है। बिटकॉइन के दाम लगातार बढ़ रहे हैं। डोनाल्ड ट्रंप खुद को क्रिप्टो फ्रेंडली बताते रहे हैं और उन्होंने वादा भी किया था कि वह अमेरिका को बिटकॉइन और क्रिप्टोकरेंसी की कैपिटल बनाएंगे। यही वजह है कि बिटकॉइन के दाम पहली बार 1 लाख डॉलर के पार पहुंच गए हैं। यानी अगर आपके पास 1 बिटकॉइन है तो उसकी कीमत लगभग 84 लाख रुपये है। चर्चाएं हैं कि राष्ट्रपति के पद पर डोनाल्ड ट्रंप की वापसी के साथ ही बिटकॉइन के दाम और बढ़ जाएंगे।

 

न्यूज एजेंसी रॉयटर्स के मुताबिक, क्रिप्टो ऐनलिस्ट जस्टिन डी एंथेन कहते हैं, 'बिटकॉइन का 1 लाख डॉलर के पार पहुंचना एक पड़ाव से कहीं ज्यादा है। यह दिखाता है कि फाइनेंस, टेक्नोलॉजी और जियोपॉलिटिक्स में कितना बदलाव हो रहा है।' बता दें कि इस एक साल में बिटकॉइन के दाम लगभग दोगुना बढ़ गए हैं। इतना ही नहीं, डोनाल्ड ट्रंप के चुनाव जीतने के बाद 4 हफ्ते में बिटकॉइन के दाम 45 पर्सेंट बढ़ गए हैं और लगातार इसमें बढ़ोतरी होती जा रही है।

US बदलेगा क्रिप्टोकरेंसी की दिशा?

 

इसी बुधवार को डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि वह पूर्व SEC कमिश्नर पॉल एटकिन्स को सेक्योरिटी एक्सचेंज कमीशन का हेड बनाने जा रहे हैं। बता दें कि पॉल एटकिन्स वही शख्स हैं जो डिजिटल असेट इंश्योरेंस और ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म के तौर पर काम करने वाले टोकन अलायंस के साथ जुड़े रहे हैं। क्रिप्टोकरेंसी की दिशा में काम करने के लिए डोनाल्ड ट्रंप ने एक नई क्रिप्टो अडवाइजरी काउंसिल बनाने और कई कंपनियां बनाने का भी वादा किया है। कहा जा रहा है कि यह नई काउंसिल ही अमेरिका की क्रिप्टो पॉलिसी में बदलाव करने की दिशा में ट्रंप की मदद करेगी। यही वजह है कि कई क्रिप्टो एक्सपर्ट और निवेशक इस काउंसिल का हिस्सा बनना चाह रहे हैं। डोनाल्ड ट्रंप के करीबी और मशहूर कारोबारी एलन मस्क भी क्रिप्टो से जुड़े इस तरह के कामों के समर्थक रहे हैं।

क्या है क्रिप्टोकरेंसी?

 

यह एक तरह की डिजिटल करेंसी है। यह ब्लॉकचेन पर आधारित एक वर्चुअल करेंसी है। इसकी सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसे ट्रेस नहीं किया जा सकता है। यह कंप्यूटरों के नेटवर्क पर आधारित करेंसी है और इसे कोई बैंक या किसी देश का नेशनल बैंक जारी नहीं करता है। यह पूरी तरह से सरकारी कंट्रोल से बाहर है इसलिए कई बार गलत कारणों की वजह से भी यह चर्चा में आता है। अब बिटकॉइन के अलावा दर्जनों क्रिप्टोकरेंसी मार्केट में हैं और इनमें निवेश करके लोग मोटी रकम भी कमा रहे हैं।

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