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18 वाली सिगरेट 70 में मिलेगी? दाम बढ़ने का पूरा गणित समझ लीजिए

चर्चा है कि 1 फरवरी से सिगरेट महंगी हो रही है। टैक्स में बदलाव हुआ है तो सिगरेट के दाम तो बढ़ने हैं लेकिन कितने बढ़ेंगे, इसको लेकर कंफ्यूजन है।

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प्रतीकात्मक तस्वीर, Photo Credit: Khabargaon

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आज 1 फरवरी से सिरगेट और पान मसाले के दाम 2 से 3 गुना तक महंगे होने वाले हैं। 18 रुपये की सिगरेट 70 से 72 रुपये तक पहुंच सकती है या कुछ रिपोर्ट्स का दावा है कि दाम बढ़कर 21 से 28 रुपये तक पहुंचेंगे लेकिन एक बात तय है- दाम बढ़ेंगे और अच्छे खासे बढ़ेंगे। इसका कारण है कि टैक्स सिस्टम में बदलाव हुआ है। अभी तक देश में सिगरेट के ऊपर 4 तरह के टैक्स लगते हैं।

 

1. बेसिक एक्साइज ड्यूटी- 5 रुपये से 10 रुपये प्रति 1 हजार सिगरेट
2. NCCD (नेशनल कलैमिटी कंटिंजेंट ड्यूटी) 230 रुपये से 850 रुपये प्रति 1 हजार सिगरेट
3. GST (गुड्स एंड सर्विसेज टैक्स)- 28%
4. कंपेसेशन टैक्स Compensation Tax - Ad valorem (मूल्य आधारित टैक्स)
                                     

Ad valorem - 5% से 36% तक होता है और  Flat Rate -  ₹2076 - ₹4170 (प्रति 1 हजार सिगरेट)  1 हजार सिगरेट पर 2 हजार 76 रुपये से 4 हजार 1 सौ 70 रुपये तक हो सकता है। कुल मिलाकर सिरगेट पर मोटा टैक्स हमेशा से लगता आ रहा है लेकिन इस बार दाम बहुत ज़्यादा बढ़ सकते हैं।  

कितनी महंगी हो जाएगी सिगरेट?

 

साल 2017 में जब देश में GST लागू हुआ। तब तंबाकू प्रोडक्ट्स को टैक्स के सबसे ज्यादा वाले स्लैब में डाल दिया गया। 28% टैक्स। लेकिन राज्य सरकारों को डर था कि अगर सारे टैक्स को सेंट्रलाइज़ कर दिया जाए तो राज्य की कमाई में असर पड़ सकता है क्योंकि पुराने टैक्स सिस्टम से उन्हें जो पैसा मिलता था, उसे GST में मर्ज कर दिया गया था। केन्द्र सरकार ने वादा किया कि ऐसा होने नहीं देंगे। सरकार ने सिरगेट पर जितना भी टैक्स लगता है। उसके ऊपर 5% तक एक्स्ट्रा टैक्स लगा दिया। अब यह टैक्स राज्य सरकार की मांग की भरपाई करने के लिए था। इसलिए इसे कहा गया- कम्पंसेशन टैक्स।

 

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इस कम्पंसेशन टैक्स की अवधि मार्च 2026 तक की ही थी। सरकार को चिंता था कि इसके हटते ही तंबाकू से होने वाले टैक्स की कमाई में कमी आ सकती है। ऐसे में सरकार नया बिल लेकर आई। सेंट्रल एक्साइज अमेंडमेंट बिल 2025 और नए बिल पर सरकार ने तंबाकू प्रोडक्ट्स पर लगने वाले टैक्स को बढ़ा दिया।

 

अभी तक 1 हजार सिरगेट पर एक्साइज़ ड्यूटी 200 से 735 के बीच थी। जो सिरगेट की लंबाई और उसके प्रकार पर निर्भर करती थी। छोटी सिगरेट, बड़ी सिगरेट, लंबी वाली पतली सिगरेट या फिर सिगार। इस तरह से ड्यूटी अलग-अलग लगती थी लेकिन नया बिल इसे कई गुना बढ़ा देना वाला है। इससे प्रति 1 हजार सिगरेट पर 2 हजार 50 रुपये से साढ़े 8 हजार रुपये तक लगने वाले हैं। कुछ स्पेशल कैटेगरी का टैक्स बढ़ कर 11 हजार रुपये पहुंच जाएगा।

 

इसके अलावा सिरगेट और पान मसाले पर GST का जो मैक्सिमम स्लैब है। यानी 40% वाला लगाया जाएगा। अभी तक सिगरेट और पान मसाले पर 28% GST लगती है। यानी कुल मिलाकर टैक्स का बोझ अब 60 से 70 परसेंट तक पहुंच सकता है। जो पहले करीब 50 से 55 परसेंट तक था। इसी डेटा के हिसाब से दावा किया जा रहा है कि सिगरेट के दाम कई गुना बढ़ जाएंगे। कुछ मीडिया रिपोर्ट्स में 18 रुपये की सिगरेट का दाम बढ़ कर 70 से 72 रुपये तक होने का दावा किया गया है।

कब तक बढ़ेंगे दाम?

 

कुछ एक्सपर्ट्स का मानना है कि मीडिया में जो दाम में 300 से 400 परसेंट हाइक की बात हो रही है। वह बढ़ा-चढ़ाकर बताया गया है। इकोनॉमिस्ट रिजो एम जॉन लिखते हैं- 'ग्राउंड लेवल पर कीमत में 10 से 15 परसेंट का ही इजाफा होगा। यानी जो सिगरेट 18 रुपये की थी। वह सीधे 72 की नहीं होगी। 21 से 28 रुपये के बीच बेची जा सकती है क्योंकि कुछ सिगरेट कंपनियां कस्टमर रिटेन करने के लिए कुछ नुकसान खुद उठाएंगी।

 

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'

इसका कारण है कि भारत में अभी साढ़े 4 करोड़ लोग तंबाकू इंडस्ट्री से डायरेक्ट या इनडायरेक्ट तरीके से जुड़े हुए हैं। अगर दाम में 15 से 40 परसेंट की वृद्धि होती है तो सिगरेट की खरीदी में कमी आने की आंशका है।  

इंडियन एक्सप्रेस की आंचल मैग्जीन ने अपनी रिपोर्ट में दावा किया है कि शुरुआती स्तर पर बढ़े हुए टैक्स का पूरा भार सिगरेट मेकिंग कंपनियों पर ही पड़ने वाला है। ऐसे में ग्राहकों को रिटेन करने के लिए ये कंपनियां एक साथ रेट न बढ़ाएं। शुरुआती स्तर में कुछ घाटा सहते हुए धीरे-धीरे रेट बढ़ाएं। ताकी ग्राहकों को एकाएक बोझ न पड़े।

 

ऐसा ही कुछ पान मसाला और गुटखा के साथ भी होने वाला है। बिना तंबाकू वाले पान मसाले पर लगने वाला GST भी अब 28% से बढ़ाकर 40% पर ला दिया गया है। इसके ऊपर से सरकार एक और टैक्स लगाएगी। HSNS सेस यानी हेल्थ सिक्योरिटी नेशनल सिक्योरिटी सेस। इसे मिलाकर गुटखा पर टोटल टैक्स 91 परसेंट हो जाएगा और तंबाकू पर 82%।

 

इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, अब सरकार चबाने वाले तंबाकू जैसे खैनी, जरदा, गुटाखा पर एक्साइज़ ड्यूटी उसे बनाने वाली मशीन की उत्पादन क्षमता के आधार पर लेगी। उदाहरण के तौर पर अगर मशीन 500 पाउच प्रति मिनट बना सकती है और पाउच का रिटेल प्राइस 2 रुपये है तो चबाने वाले तंबाकू पर प्रति मशीन प्रति महीने करीब 83 लाख रुपये ड्यूटी लगेगी। अगर पाउच का प्राइस 4 रुपये है तो मशीन की ड्यूटी और ज्यादा बढ़ जाएगी।

प्रोडक्शन वाली मशीन पर लगेगा टैक्स

 

मशीन की अधिकतम स्पीड और पाउच का रिटेल प्राइस देखकर ही हर मशीन के लिए महीने का टैक्स तय कर दिया जाएगा। सरकार का दावा है कि पाना मसाला और कुछ तंबाकू उत्पाद ऐसे हैं जहां टैक्स चोरी आसानी से की जा सकती है। इसलिए बिक्री के हिसाब से GST लिया जाएगा और मशीन की उत्पादन क्षमता के हिसाब से सेस वसूला जाएगा। ताकी प्रोडक्शन से बिक्री तक का हिसाब रहे और टैक्स की चोरी को रोका जा सके।

 

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इसके अलावा सरकार, हुक्का पर 33%, होमोजेनाइज्ड तंबाकू 60.5%, जबकि पाइप और सिगरेट के स्मोकिंग मिक्सचर्स पर 279% ड्यूटी लगाएगी। कुल मिलाकर सिगरेट, पान मसाला, खैन, जरदा, गुटखा। सब कुछ महंगा होने वाला है लेकिन बड़े-बड़े आंकड़े देखकर कन्फ्यूज़ होने की जरूरत नहीं है। छोटी सिगरेट पर कम अमाउंट में टैक्स बढ़ेगा। बड़ी सिगरेट में उससे थोड़ा ज्यादा। स्पेशल फ्लेवर सिगरेट पर और थोड़ा ज्यादा। इम्पोर्टेड सिगरेट पर और ज्यादा या फिर सिगरेट बनाने के लिए जो फ्लेवर्ड तंबाकू यूज़ होता है। उसमें और ज्यादा 279% टैक्स लगेगा।

WHO का क्या रोल है?

 

जाते-जाते एक सवाल का जवाब और दे देते हैं। आखिरकार सरकार ऐसा कर क्यों रही है? और इससे क्या-क्या नुकसान हो सकते हैं? वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गेनाइजेशन की सभी देशों से सिफारिश है कि सिगरेट जैसे तंबाकू उत्पादों पर कम से कम 75% का टैक्स होना चाहिए। दुनिया के 85 से ज्यादा देश लगातार सिगरेट पर टैक्स बढ़ाते हैं। taxfoundation.org की रिपोर्ट से बात करें तो सिगरेट पर यूरोप का औसत टैक्स वैसे तो 60% तक का है लेकिन कई देश 80% तक टैक्स ठोकते हैं । आयरलैंड पूरी दुनिया में सिगरेट पर सबसे ज्यादा टैक्स वसूलता है। 84 से 90 mm वाली बड़ी सिगरेट के 20 वाले डिब्बे पर 10.71 यूरो टैक्स ही लेता है। भारतीय रुपयों में बात करें तो 20 सिगरेट वाले डिब्बे पर 1100 से 1200 रुपये तक सिर्फ टैक्स लिया जाता है और यहां खुदरा सिगरेट की बिक्री पर भी प्रतिबंध है। आप यहां खुली हुई 1-2 सिगरेट नहीं खरीद सकते। लेना है तो पूरा 20 वाला पैकेट खरीदना पड़ेगा।

 

भारत भी अब इसी दिशा में आगे बढ़ रहा है। टैक्स बढ़ाए जा रहे हैं। नए बिल पेश करते हुए वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी ने बताया था कि इस बिल के आने से, सिगरेट, पान मसाला, तंबाकू के दाम बढ़ने से उम्मीद है कि लोगों की तंबाकू कन्ज्यूम करने की हैबिट कम होगी। ग्लोबल यूथ टोबैको सर्वे का डेटा कहता है कि देश में 8.5% ऐसे लोग हैं जिन्होंने बहुत कम उम्र में ही तंबाकू का इस्तेमाल शुरू कर दिया था। उम्मीद है कि कीमत बढ़ने पर नए स्मोकर्स के लिए शुरुआत करना मुश्किल और महंगा होगा। इससे तंबाकू से होने वाले कैंसल, हार्ट अटैक, COPD जैसी बीमारियों के केस कम होंगे लेकिन इसके कुछ नेगेटिव इम्पैक्ट भी होंगे।

असर क्या होगा?

 

सबसे पहला निगेटिव इम्पैक्ट तो तंबाकू इंडस्ट्री पर ही पड़ेगा। जैसे ही हमने ऊपर बताया कि भारत में करीब साढ़े 4 करोड़ लोग डायरेक्टली और इनडायरेक्टी तंबाकू इंडस्ट्री से जुड़े हुए हैं। इसमें किसान, फैक्ट्री वर्कर, खुदरा व्यापारी या फिर सप्लाई चेन देखने वाला स्टाफ शामिल है। सिगरेट के दाम बढ़ने से कंपनियों को प्रोडक्शन घटाना पड़ेगा। जिससे नौकरियों में खतरा आ सकता है। खासकर बिहार और आंध्र प्रदेश जैसे राज्यों में। जहां तंबाकू का अच्छे खासे अमाउंट में उत्पादन होता है।

 

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दूसरी चिंता है ब्लैक मार्केटिंग और स्मगलिंग को लेकर। इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, इंडस्ट्री का दावा है कि देश में हर 3 कानूनी सिगरेट के साथ 1 स्मगल्ड या नकली सिगरेट बिक जाती है। टैक्स में अचानक इतनी ज्यादा बढ़ोतरी से अवैध व्यापार और बढ़ जाएगा। इंडस्ट्री के मुताबिक, देश में जितना भी तंबाकू प्रोडक्ट बिकता है, उसका सिर्फ 10 परसेंट सिगरेट होता है लेकिन पूरे तंबाकू प्रोडक्ट से जितना टैक्स आता है। उसका 80% टैक्स 10 पर्सेंट हिस्सेदारी वाले सिगरेट से आता है।

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