हरियाणा से जुड़े 597 करोड़ रुपये के बड़े बैंक घोटाले की जांच तेज हो गई है और रोज नए खुलासे सामने आ रहे हैं। इस मामले में हाल ही में एक ज्वेलर की गिरफ्तारी के बाद कुल गिरफ्तार आरोपियों की संख्या 12 तक पहुंच गई है। जांच एजेंसियों के अनुसार यह घोटाला सरकारी विभागों के पैसे को फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) में रखने के बजाय फर्जी कंपनियों और खातों के जरिए इधर-उधर ट्रांसफर करने से जुड़ा है।
शुरुआती जांच से पता चला है कि हरियाणा सरकार के कई विभागों से संबंधित फंड IDFC First Bank की चंडीगढ़ शाखा में जमा किए गए थे। हालांकि, बैंक के कुछ कर्मचारियों और कुछ अन्य व्यक्तियों की कथित मिलीभगत से इन फंड्स को धोखाधड़ी वाले खातों में ट्रांसफर कर दिया गया और बाद में कई कंपनियों के जरिए अलग-अलग जगहों पर भेज दिया गया।
इस मामले की जांच कर रही हरियाणा सतर्कता ब्यूरो एवं भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB) ने राजन कटोडिया नाम के ज्वेलर को गिरफ्तार किया है। वह सावन ज्वेलर्स नाम की ज्वेलरी दुकान का मालिक है।
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जांच एजेंसियों के मुताबिक आरोपियों से जुड़ी कई कंपनियों ने करीब 250 करोड़ रुपये से अधिक की रकम इस ज्वेलरी फर्म के खाते में भेजी। कागजों में इसे सोने के आभूषणों की खरीद-फरोख्त के रूप में दर्ज किया गया था, जबकि असल में यह पैसा सरकारी फंड से निकाला गया था। अधिकारियों का कहना है कि इस लेनदेन के बदले ज्वेलर को भारी कमीशन दिया गया।
मिलीभगत से हुआ खेल
जांच के अनुसार घोटाले का केंद्र चंडीगढ़ के सेक्टर-32 में स्थित बैंक शाखा रही। यहां हरियाणा के कम से कम आठ सरकारी विभागों जैसे पंचायत विभाग और प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड का पैसा FD के रूप में रखा जाना था।
हालांकि, आरोप है कि इस रकम को 12 अलग-अलग बैंक खातों में ट्रांसफर कर दिया गया। इनमें से 10 खाते IDFC First Bank में और दो AU Small Finance Bank में थे। जांच एजेंसियों का मानना है कि बैंक के पूर्व कर्मचारी ऋभव ऋषि और अभय कुमार इस पूरे नेटवर्क के प्रमुख किरदार थे, जिन्होंने सरकारी खातों तक पहुंच का फायदा उठाकर पैसा शेल कंपनियों में भेजा।
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बड़ा कारोबारी बना आरोपी
मामले में एक और बड़ा खुलासा विक्रम वाधवा की गिरफ्तारी के बाद हुआ। वह चंडीगढ़ का होटल और रियल एस्टेट कारोबारी है और पुलिस के मुताबिक कई दिनों से फरार चल रहा था। बाद में उसे खरड़ से गिरफ्तार किया गया।
पूछताछ में वाधवा ने बताया कि बैंक अधिकारी ने उसे सरकारी पैसे को उसकी कंपनियों के जरिए घुमाने का प्रस्ताव दिया था और भरोसा दिलाया था कि जरूरत पड़ने पर रकम वापस सरकारी खातों में दिखा दी जाएगी। वाधवा का दावा है कि वह पहले गेस्टहाउस में 1500 रुपये महीने की नौकरी करता था लेकिन बाद में उसने रियल एस्टेट का बड़ा कारोबार खड़ा कर लिया।
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इस घोटाले में अब तक 12 लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है। जांच के दौरान कई जगहों पर छापेमारी कर इलेक्ट्रॉनिक उपकरण, लग्जरी गाड़ियां और कई संपत्तियों का पता लगाया गया है। वहीं प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने भी कई शहरों में छापेमारी कर 100 से ज्यादा बैंक खातों को फ्रीज किया है। जांच एजेंसियों को शक है कि इस मामले में कुछ सरकारी अधिकारियों की भी भूमिका हो सकती है और आने वाले दिनों में और बड़े खुलासे हो सकते हैं।