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विदेश से पैसा भेजने में भारतीय नंबर 1, एक साल में भेजे 135 अरब डॉलर

विदेशों में रह रहे भारतीयों ने अपने देश पैसा भेजने का रिकॉर्ड बना दिया है। वित्त वर्ष 2024-25 में विदेशों में रहने वाले भारतीयों ने 135.46 अरब अमेरिकी डॉलर भारत भेजे हैं।

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विदेशों में रह रहे भारतीयों ने पैसा भेजने के मामले में अब तक के सारे रिकॉर्ड तोड़ दिए हैं। पिछले वित्तीय वर्ष 2024-25 में विदेश में रहने वाले भारतीयों ने 135.46 अरब अमेरिकी डॉलर (लगभग 11.5 हजार करोड़ रुपये) भारत भेजे हैं। इस वित्त वर्ष में भेजे गए पैसे पिछले कई साल से भेजे गए पैसों से कहीं ज्यादा हैं। पिछले 10 साल से भारत प्रवासी नागरिकों से प्राप्त होने वाले पैसे (रेमिटेंस) में दुनिया में सबसे अग्रणी बना हुआ है। हाल ही में भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की ओर से जारी किए गए बैलेंस ऑफ पेमेंट डेटा में इस बात की जानकारी मिली है। 

 

आंकड़ों से पता चलता है कि गैर-निवासी भारतीयों ने विदेश से जो पैसा भेजा है उसमें पिछले साल की तुलना में 14 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है। रिजर्व बैंक की बैलेंस शीट में इसे निजी ट्रांसफर के रूप में दिखाया गया है। वित्त वर्ष 2016-17 में गैर निवासी भारतीय 16 अरब अमेरिकी डॉलर भारत भेजते थे लेकिन 2016-17 से अब तक यह दोगुने से भी ज्यादा हो गई है। RBI के आंकड़ों से पता चला कि 31 मार्च को खत्म होने वाले वित्त वर्ष के दौरान 1 ट्रिलियन डॉलर के ग्रॉस अकाउंट इन्फ्लो में गैर निवासी भारतीयों ने जो पैसा भेजा है उसका हिस्सा 10 प्रतिशत है। 

 

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क्या बोले अर्थशास्त्री?

इस डेटा पर IDFC बैंक के मुख्य आर्थिक सलाहकार गौरा सेनगुप्ता ने कहा, 'कच्चे तेज की कीमतों में हुए बदलावों के बावजूद भी गैर निवासी भारतीय जो पैसा भेजते हैं उसमें लगातार ग्रोथ हो रही है, भारत के लिए यह अच्छा है।' एक अन्य अर्थशास्त्री ने कहा, 'भारत से स्किल्ड लेबर फोर्स विकसित देशों जैसे अमेरिका, इंग्लैंड में लगातार जा रही है। लेबर फोर्स में हुई बढ़ोतरी के कारण विदेशों से आने वाले पैसे में भी बढ़ोतरी हुई है।'

 

RBI की एक रिपोर्ट में कहा गया है, 'भारत को मिले पैसे आम तौर पर भारत के ग्रॉस इनवार्ड फॉरेन डायरेक्ट इनवेस्टमेंट (FDI) से ज्यादा रही हैं। इस प्रकार बाहरी फंडिंग के एक स्थिर सोर्स के रूप में उनका महत्व बना है।' इसके अलावा, वे भारत के व्यापार घाटे के फंडिंग का एक प्रमुख सोर्स हैं।

भारत के लिए अहम है रेमिटेंस

सॉफ्टवेयर सेवाओं और बिजनेस सेवाओं की आय पिछले वित्तीय वर्ष में 100 बिलियन डॉलर से ज्यादा रही, जो कि मौजूदा खाते में महत्वपूर्ण प्रवाह का हिस्सा हैं। रेमिटेंस के साथ मिलकर, इन तीनों स्रोतों ने कुल सकल करंट अकाउंट इन्फ्लो का 40 प्रतिशत से ज्यादा योगदान दिया। RBI की एक रिपोर्ट के अनुसार, भारत को मिलने वाली रेमिटेंस विदेशी प्रत्यक्ष निवेश (FDI) से ज्यादा रही है। वित्तीय साल 2025 में रेमिटेंस भारत के व्यापार घाटे को पूरा करने में काफी मददगार रही हैं। इस साल कुल रेमिटेंस ने देश के 287 बिलियन डॉलर के माल व्यापार घाटे का लगभग आधा हिस्सा कवर किया है।

रेमिटेंस में भारत नंबर 1

वर्ल्ड बैंक के आंकड़ों के अनुसार, भारत साल 2024 में सबसे ज्यादा इनवर्ड रेमिटेंस प्राप्त करने वाला देश बना। मैक्सिको दूसरे स्थान पर रहा, जहां लगभग 68 अरब डॉलर आए। भारत का पड़ोसी देश चीन तीसरे स्थान पर रहा, जिसे लगभग 48 अरब डॉलर प्राप्त हुए।

 

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रेमिटेंस क्या है?

विदेशी रेमिटेंस का मतलब है जब लोग विदेश में काम करके अपने घर पैसे भेजते हैं। ये पैसे अस्थायी या स्थायी रूप से विदेश गए लोग भेजते हैं। अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) की 2009 की परिभाषा के अनुसार, रेमिटेंस दो भागों में आता है – एक होता है कर्मचारियों को सैलरी और दूसरा होता है प्राइवेट ट्रांसफर। भारत के लिए, मुख्य रूप से प्राइवेट ट्रांसफर ही विदेशी रेमिटेंस का सबसे बड़ा हिस्सा होता है।

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