तृणमूल कांग्रेस (TMC) के सांसद कल्याण बनर्जी ने लोकसभा में वित्त मंत्री से अमरीकी डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपये में आई गिरावट से जुड़े कुछ सवाल पूछे। इस सवाल का जवाब वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी ने दिया। वित्त मंत्रालय की तरफ से लोकसभा में पेश किए गए लेटेस्ट डेटा के मुताबिक, मौजूदा फाइनेंशियल ईयर में अमरीकी डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपये में भारी गिरावट आई है।
कल्याण बनर्जी के सवाल के जवाब में वित्त मंत्रालय ने बताया कि 1 अप्रैल 2025 से 22 जनवरी 2026 के बीच डॉलर के मुकाबले रुपये में 6.7% की गिरावट आई है। इस गिरावट ने भारतीय मुद्रा को वैश्विक स्तर पर सबसे खराब प्रदर्शन करने वाली मुद्राओं की श्रेणी में लाकर खड़ा कर दिया है ।
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अन्य मुद्राओं से तुलना में स्थिति
सरकार द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार, इसी अवधि (1 अप्रैल 2025 से 22 जनवरी 2026 तब) में कई प्रमुख मुद्राओं ने डॉलर के मुकाबले मजबूती दिखाई। यूरो में करीब 8.7% और ब्राजीलियाई रियाल में 7.9% की बढ़त दर्ज की गई। वहीं, जापानी येन और इंडोनेशियाई रुपिया जैसी कुछ मुद्राएं भी कमजोर हुईं लेकिन भारतीय रुपये की गिरावट अपेक्षाकृत अधिक रही। इसके अलावा वित्त मंत्रालय ने यह भी बताया कि 2014 के अंत में जहां 1 डॉलर की कीमत करीब 63 रुपये थी, वहीं मार्च 2026 तक यह बढ़कर 92 रुपये के पार पहुंच गई है।
गिरते रुपये के पीछे मुख्य कारण
वित्त मंत्रालय ने साफ किया है कि रुपये के इस गिरावट के पीछे कोई एक कारण नहीं, बल्कि कई जटिल आर्थिक कारक जिम्मेदार हैं। सरकार के अनुसार, डॉलर सूचकांक में होने वाले उतार-चढ़ाव और वैश्विक स्तर पर पूंजी प्रवाह की बदलती प्रवृत्तियों ने रुपये पर दबाव बनाया है। विशेष रूप से चालू वित्त वर्ष 2025-26 के दौरान व्यापार घाटे में हुई वृद्धि और पूंजी खाते से मिलने वाले समर्थन में कमी ने आग में घी डालने का काम किया है । इसके अलावा, अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में अस्थिरता और ब्याज दरों के स्तर ने भी विनिमय दर को नकारात्मक रूप से प्रभावित किया है ।
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RBI ने उठाए कदम
रुपये की अस्थिरता को नियंत्रित करने के लिए भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने विदेशी मुद्रा बाजार में सक्रिय हस्तक्षेप किया है। आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2025 में RBI ने बाजार में तरलता बनाए रखने और रुपये में अत्यधिक उतार-चढ़ाव को रोकने के लिए 51,714 मिलियन अमेरिकी डॉलर की निवल बिक्री (Net Sell) की। यह हस्तक्षेप पिछले वर्षों की तुलना में काफी अधिक रहा।
वर्ष 2024 में RBI ने 12,350 मिलियन डॉलर की निवल बिक्री की थी, जबकि 2023 में केंद्रीय बैंक ने 18,135 मिलियन डॉलर की निवल खरीद (Net Buy) की थी। इससे साफ है कि हाल के वर्षों में RBI ने रुपये को स्थिर रखने के लिए डॉलर बेचने की रणनीति अपनाई है। साथ ही, केंद्रीय बैंक कच्चे तेल की कीमतों, डॉलर इंडेक्स और वैश्विक भू-राजनीतिक घटनाओं पर लगातार नजर बनाए हुए है, ताकि जरूरत पड़ने पर समय रहते हस्तक्षेप किया जा सके।