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टैक्स चोरी रोकने के लिए साथ आए 140 देश, क्या है वैश्विक न्यूनतम कर?

दुनियाभर के देशों ने बड़ी कंपनियों पर 15 फीसदी टैक्स का नियम लागू किया है। अब कंपनियां कम टैक्स वाले देशों में अपना मुनाफा दिखाकर टैक्स चोरी नहीं कर पाएंगी।

What is Global Minimum Tax

प्रतीकात्मक तस्वीर, AI Generated Image

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दुनिया की बड़ी कंपनियां सालों से एक खेल खेल रही थीं। वो अपना मुनाफा उन देशों में दिखाती थीं जहां टैक्स बहुत कम होता है। इस तरह वो खुद के देश में टैक्स भरने से बच जाती थीं। इसी पर रोक लगाने के लिए 140 से ज्यादा देश एक साथ आए हैं। उन्होंने फैसला किया कि अब कोई भी बड़ी कंपनी दुनिया में कहीं भी काम करे, उसे कम से कम 15 फीसदी टैक्स तो भरना ही होगा। इसी को वैश्विक न्यूनतम कर (Global Minimum Tax) कहते हैं।

 

देश एक-दूसरे से कम टैक्स रेट देकर बड़ी कंपनियों को अपनी तरफ खींचते थे। कंपनियां इसका फायदा उठाती थीं। वो अपना मुनाफा Tax Haven देशों में ट्रांसफर कर देती थीं। Tax Haven मतलब वो देश जहां टैक्स बहुत कम या बिल्कुल नहीं होता। फेसबुक और अल्फाबेट जैसी बड़ी टेक कंपनियों पर जब जांच बढ़ी तब यह साफ हुआ कि ये कंपनियां अपनी कमाई कम टैक्स वाली जगहों पर दिखाकर टैक्स बचा रही थीं। 

 

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वैश्विक न्यूनतम कर है क्या?

यह ओईसीडी (Organisation for Economic Co-operation and Development) का बनाया हुआ नियम है। इसके तहत 75 करोड़ यूरो से ज्यादा कमाने वाली बड़ी कंपनियों पर कम से कम 15 फीसदी टैक्स लगेगा। अगर कोई कंपनी किसी देश में 10 फीसदी टैक्स भरती है तो बाकी 5 फीसदी उसके होम कंट्री की सरकार वसूल करेगी। यानी Tax Haven में जाकर भी कंपनी टैक्स से नहीं बच पाएगी। 

 

2024 की शुरुआत से यह नियम लागू होना शुरू हुआ। ओसीईडी के मुताबिक 2025 तक इस नियम के दायरे में आने वाली 90 फीसदी कंपनियों पर यह टैक्स लागू हो जाना था। अब 2026 चल रहा है और यह नियम बड़े पैमाने पर काम कर रहा है। हालांकि अमेरिका के अलग रुख की वजह से यह पूरी तरह ग्लोबल नहीं बन पाया है। ओसीईडी का अनुमान है कि इस टैक्स से दुनियाभर की सरकारों को हर साल 15 हजार करोड़ डॉलर की अतिरिक्त कमाई होगी। साथ ही दुनिया में कम टैक्स पर होने वाला मुनाफा करीब 80 फीसदी तक घट जाएगा। 

अमेरिका का क्या रुख है?

जनवरी 2025 में राष्ट्रपति ट्रंप ने मैसेज दिया कि अमेरिका इस नियम से अलग हो सकता है। जून 2025 में G7 देशों ने एक समझौता किया। इसके तहत अमेरिकी कंपनियों को इस नियम के कुछ हिस्सों से छूट मिल सकती है। इससे यह नियम पूरी तरह ग्लोबल बनने में अभी वक्त लगेगा। 

 

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भारत शुरू से इस नियम का समर्थक रहा है। देश की बड़ी आबादी की वजह से बड़ी टेक कंपनियां यहां खूब कमाती हैं। भारत पहला देश था जिसने ऑनलाइन विज्ञापन पर Equalisation Levy लगाया था। भारत की मांग है कि जिन देशों में कंपनियां ज्यादा कमाती हैं उन्हें टैक्स में ज्यादा हिस्सा मिलना चाहिए।

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