आज दुनिया में हर रोज अरबों रुपये एक देश से दूसरे देश जाते हैं। कोई विदेश में बैठा अपने परिवार को पैसे भेजता है, कोई दूसरे देश से सामान मंगवाता है तो कोई किसी विदेशी कंपनी को भुगतान करता है। ये सब इतनी आसानी से हो जाता है कि हम सोचते भी नहीं कि पर्दे के पीछे क्या चल रहा है। इसके लिए पूरी दुनिया में ऐसे सिस्टम बनाए गए हैं जिनकी मदद से इस काम को आसान बनाया जाता है।
असल में हर देश की अपनी करेंसी होती है। भारत में रुपया चलता है, अमेरिका में डॉलर, यूरोप में यूरो। जब एक देश का बैंक दूसरे देश में पैसा भेजता है तो वह सीधे नहीं जा सकता क्योंकि दोनों की करेंसी अलग है, कानून अलग हैं और बैंकिंग व्यवस्था अलग है। इसी समस्या को सुलझाने के लिए Nostro और Vostro खाते बनाए गए। Nostro एक लैटिन शब्द है जिसका मतलब है 'हमारा' और Vostro का मतलब है तुम्हारा।
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एक खाता, दो नाम
जैसे कि भारतीय स्टेट बैंक को अमेरिका में पैसे भेजने हैं पर उसका कोई ऑफिस वहां नहीं है तो वह अमेरिका के किसी बैंक के पास जाता है। वहां एक खाता खुलवाता है। उस खाते में डॉलर जमा करता है। अब भारतीय स्टेट बैंक इस खाते को कहेगा यह हमारा खाता है। इसी को नोस्ट्रो अकाउंट कहते हैं। जिस अमेरिकी बैंक के पास यह खाता रखा है वह कहेगा यह तुम्हारा खाता है जो हमारे पास है। इसी को 'वोस्ट्रो' खाता कहते हैं। खाता एक ही है। बस देखने वाले अलग हैं इसलिए नाम दो हैं।
कैसे काम करता है?
जब कोई भारत से अमेरिका पैसे भेजता है तो भारतीय स्टेट बैंक अमेरिका में अपने उसी खाते से पैसे निकालकर वहां के सही खाते में डाल देता है। कोई नोट इधर उधर नहीं जाता बल्कि बस दो बैंकों के बीच हिसाब बदलता है और पैसा पहुंच जाता है।
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भारत ने 2022 में क्या किया?
पहले भारत और दूसरे देशों के बीच जो भी लेनदेन होता था वह डॉलर में होता था। यानी किसी भी देश को भारत के साथ व्यापार करना हो तो उसे पहले डॉलर की जरूरत पड़ती थी। 2022 में भारत ने यह नियम बदल दिया और कहा कि अब दूसरे देशों के बैंक भारत में रुपये में भी खाता खोल सकते हैं। इसका सीधा मतलब यह हुआ कि अब कोई भी देश भारत के साथ सीधे रुपये में व्यापार कर सकता है, डॉलर की कोई जरूरत नहीं। यह भारत के लिए एक बड़ा कदम था क्योंकि इससे रुपया दुनिया में और मजबूत होने लगा।