सोना भारतीय मिडिल क्लास के लिए हमेशा से महंगा रहा है। मगर, बीते साल से जिस तरह से सोने ने महंगाई की रफ्तार पकड़ी है, यह लोगों की पहुंच से लगभग बाहर हो गया है। इसके बावजूद भी लोगों के लिए सोना की डिमांड बनी हुई है। इस बीच एक रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि अब पहले के मुकाबले में अधिक संख्या में भारतीय गहनों की तुलना निवेश के लिए सोना खरीद रहे हैं।
चालू वित्त वर्ष में ऐसे उपभोक्ताओं की हिस्सेदारी बढ़कर 40 प्रतिशत तक होने की उम्मीद है। सोमवार को जारी एक रिपोर्ट में यह जानकारी दी गई। घरेलू रेटिंग एजेंसी केयरएज की इस रिपोर्ट के अनुसार कुल सोना की खरीद में आभूषणों की खपत का हिस्सा 2025 में गिरकर 60 प्रतिशत से नीचे आ गया, जबकि लंबी अवधि का औसत 70 प्रतिशत रहा है।
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निवेश करने वाले उपभोक्ताओं की हिस्सेदारी
घरेलू रेटिंग एजेंसी केयरएज ने अपनी रिपोर्ट में बताया है कि चालू वित्त वर्ष में सोने में निवेश करने वाले उपभोक्ताओं की हिस्सेदारी बढ़कर 40 प्रतिशत तक हो सकती है। सोमवार को जारी की गई इस रिपोर्ट में बताया गया है कि कुल सोना की खरीद में आभूषणों की खपत का हिस्सा 2025 में गिरकर 60 प्रतिशत से नीचे आ गया, जबकि लंबी अवधि के निवेश के लिए इसका औसत 70 प्रतिशत रहा है।
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कैसे बढ़ रही निवेश मांग?
केयरएज के डायरेक्टर अखिल गोयल ने कहा कि यह दुनिया के सबसे बड़े स्वर्ण उपभोक्ताओं में एक भारत के सोना खरीदने के प्रतिरूप में एक संरचनात्मक बदलाव को दर्शाता है। गोयल ने कहा, 'भू-राजनीतिक अनिश्चितता, सोने की कीमतों में तेजी और पोर्टफोलियो विविधीकरण की प्राथमिकताएं सोने की निवेश मांग को बढ़ावा देती रहेंगी। वित्त वर्ष 2026-27 में कुल स्वर्ण खपत में निवेश की हिस्सेदारी 35-40 प्रतिशत रहने का अनुमान है।'
भारत में निवेश की मांग रिकॉर्ड स्तर पर
रिपोर्ट में कहा गया कि 60 प्रतिशत गहनों की खपत अभी भी 50 प्रतिशत के वैश्विक औसत से अधिक है। भारत में निवेश की मांग रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई है, जिसका नेतृत्व गोल्ड ईटीएफ और बार तथा सिक्कों की खरीद ने किया है। यह अन्य बातों के साथ ही सुरक्षित निवेश की मांग को दर्शाता है।
एजेंसी का मानना है कि सोने की कीमत अब एक स्थायी उच्च-मूल्य वाले दौर में प्रवेश कर चुकी हैं। इसे मांग में संरचनात्मक बदलाव, केंद्रीय बैंकों द्वारा निरंतर खरीद और वैश्विक व्यापक आर्थिक तथा भू-राजनीतिक अनिश्चितता से समर्थन मिल रहा है।