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GDP के साथ-साथ टैक्स कलेक्शन क्यों बढ़ने लगता है? समझिए Tax Buoyancy

अर्थव्यवस्था की रफ्तार बढ़ने से सरकारी टैक्स कलेक्शन में अपने आप बड़ी बढ़त होती है। टैक्स बॉइअन्सी का यह सकारात्मक आंकड़ा देश की मजबूत आर्थिक स्थिति को दर्शाता है।

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प्रतीकात्मक तस्वीर, AI Generated Image

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जब देश की अर्थव्यवस्था रफ्तार पकड़ती है तो सरकार के खाते में आने वाला टैक्स उससे भी तेज दौड़ने लगता है। सरकार ने कोई नया टैक्स नहीं लगाया, कोई रेट नहीं बढ़ाया, फिर भी खजाने में पैसा पहले से ज्यादा आने लगा। यह कोई हैरत की बात नहीं बल्कि अर्थव्यवस्था का एक स्वाभाविक तरीका है जिसे टैक्स बॉइअन्सी कहते हैं।

 

जब लोगों की कमाई बढ़ती है तो वे ज्यादा खर्च करते हैं। जब ज्यादा खर्च होता है तो बाजार में चहल-पहल बढ़ती है। कंपनियों का कारोबार बढ़ता है, उनका मुनाफा बढ़ता है और इन सबके साथ टैक्स भी अपने आप बढ़ने लगता है, वह भी अर्थव्यवस्था की रफ्तार से कहीं तेज। सीधे शब्दों में अगर GDP 10% बढ़े और टैक्स कलेक्शन 15% बढ़ जाए तो टैक्स बॉइअन्सी 1.5 है। यह सिर्फ एक आंकड़ा नहीं बल्कि देश की आर्थिक सेहत का एक अहम पैमाना है जो बताता है कि बिना किसी पर बोझ डाले सरकार की कमाई कितनी अपने आप बढ़ सकती है।

 

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Tax Buoyancy क्या होती है?

टैक्स बॉइअन्सी एक आसान फॉर्मूले पर काम करती है टैक्स में हुई प्रतिशत बढ़ोतरी को GDP में हुई प्रतिशत बढ़ोतरी से भाग दो। जो नंबर आए, वही टैक्स बॉइअन्सी है। अगर यह 1 से ज्यादा है मतलब टैक्स GDP से तेज बढ़ रहा है। अगर 1 है, तो दोनों बराबर चल रहे हैं और अगर 1 से कम है, तो GDP बढ़ने के बावजूद टैक्स पीछे रह गया।


जैसे कि GDP 10% बढ़ी और इनकम टैक्स 18% बढ़ा। तो इनकम टैक्स की टैक्स बॉइअन्सी होगी 18 ÷ 10 = 1.8 यानी GDP के हर 1% बढ़ने पर Income Tax 1.8% बढ़ा।

GDP बढ़ने पर टैक्स तेज क्यों बढ़ता है?

इसके पीछे की सबसे बड़ी वजह है इनकम टैक्स का स्लैब सिस्टम जैसे-जैसे किसी की कमाई बढ़ती है वह ऊंचे टैक्स स्लैब में चला जाता है और ज्यादा कीमत से टैक्स देने लगता है। इसलिए आमदनी थोड़ी बढ़ने पर भी टैक्स काफी ज्यादा बढ़ जाता है। GST में भी यही होता है। जब लोगों की जेब में ज्यादा पैसा होता है तो वे ज्यादा खर्च करते हैं, ज्यादा सामान खरीदते हैं और उस पर GST अपने आप बढ़ जाता है। कॉर्पोरेट टैक्स भी तभी ज्यादा आता है जब कंपनियां ज्यादा मुनाफा कमाती हैं यानी अर्थव्यवस्था की रफ्तार सीधे टैक्स कलेक्शन की रफ्तार तय करती है।

बॉइअन्सी और इलास्टिसिटी

टैक्स बॉइअन्सी और टैक्स इलास्टिसिटी को अक्सर एक समझ लिया जाता है पर दोनों अलग हैं। बॉइअन्सी में टैक्स की पूरी बढ़त गिनी जाती है चाहे वह अर्थव्यवस्था की स्वाभाविक ग्रोथ हो, सरकार ने रेट्स बढ़ाए हों या GST जैसा नया सिस्टम लागू किया हो। इलास्टिसिटी सिर्फ वह बढ़त देखती है जो बिना कोई नया कानून या दर बदले सिर्फ अर्थव्यवस्था के बढ़ने से आई हो। 

 

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भारत में Tax Buoyancy का हाल

2017 में GST लागू होने के बाद भारत की Tax Buoyancy काफी बेहतर हुई। बड़े पैमाने पर बिजनेस फॉर्मल इकॉमनी में आए, कंप्लाइन्स बढ़े और डिजिटल पेमेंट की वजह से ट्रैकिंग आसान हो गई। FY2024 में डाइरेक्ट टैक्स की टैक्स बॉइअन्सी करीब 1.4 रही, जो एक मजबूत मैसेज है। हालांकि, एक बड़ी चुनौती अभी भी बनी हुई है इन्फॉर्मल  सेक्टर देश का एक बड़ा हिस्सा अभी भी टैक्स के दायरे से बाहर है। जब तक टैक्स बेस यानी टैक्स देने वाले लोगों और कारोबारों की तादाद नहीं बढ़ती, बॉइअन्सी की पूरी क्षमता का फायदा नहीं उठाया जा सकता।


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