logo

ट्रेंडिंग:

ऑर्डर आपका, रिस्क उनका... 10 मिनट डिलीवरी मॉडल को बंद करना क्यों जरूरी था?

लंबे समय से गिग वर्कर्स '10 मिनट डिलीवरी मॉडल' को खत्म करने की मांग कर रहे थे और अब इसे खत्म कर दिया है। ऐसे में जानते हैं कि क्विक कॉमर्स इंडस्ट्री कितनी बड़ी है और '10 मिनट में डिलीवरी' को खत्म करना क्यों जरूरी था?

gig

प्रतीकात्मक तस्वीर। (AI Generated Image)

शेयर करें

संबंधित खबरें

Advertisement
Group2

ब्लिंकिट और जेप्टो से कुछ ऑर्डर करने पर अब 10 मिनट में सामान नहीं मिलेगा। कंपनियों ने अब '10 मिनट डिलीवरी मॉडल' को खत्म कर दिया है। इसका मतलब हुआ कि अब जरूरी नहीं है कि जो सामान आपने ऑर्डर किया है, वह 10 मिनटे के भीतर ही आपको डिलीवर किया जाए। केंद्रीय श्रम मंत्री मनसुख मंडाविया के दखल के बाद ब्लिंकिट जैसी क्विक कॉमर्स कंपनियों ने '10 मिनट में डिलीवरी' वाले सिस्टम को खत्म कर दिया है।

 

पिछले साल 25 दिसंबर और 31 दिसंबर को ब्लिंकिट, जेप्टो, स्विगी और जोमैटो जैसी कंपनियों से जुड़े गिग वर्कर्स ने हड़ताल की थी। उनकी बड़ी मांगों में से एक '10 मिनट डिलीवरी मॉडल' को खत्म करने की मांग भी थी।

 

आम आदमी पार्टी के सांसद राघव चड्ढा ने भी संसद से लेकर सड़क तक इस मॉडल को खत्म करने की मांग उठाई थी। उन्होंने रविवार को ब्लिंकिट के डिलीवरी एजेंट के साथ डिलीवरी भी की थी। इस मॉडल को खत्म करने का फैसला लिए जाने के बाद राघव चड्ढा ने इसे गिग वर्कर्स के लिए बड़ी जीत बताया।

 

यह भी पढ़ें-- आपके 100 रुपये ईरान में 12 लाख हैं... खामेनेई के मुल्क की करंसी कितनी गिर गई?

गिग वर्कर्स का क्या है कहना?

गिग वर्कर्स लंबे समय से '10 मिनट डिलीवरी सिस्टम' को खत्म करने की मांग कर रहे थे। मंगलवार को सबसे पहले ब्लिंकिट ने इसे खत्म किया। ब्लिंकिट ने ब्रांड मैसेजिंग को भी बदल दिया। ब्लिंकिट ने इसे '10 मिनट में 10,000+ प्रोडक्ट्स डिलीवर' से बदलकर '30,000+ प्रोडक्ट्स आपके दरवाजे तक' कर दिया है।

 

इस पर आम आदमी पार्टी के सांसद राघव चड्ढा ने कहा, 'आज देश के गिग वर्कर्स के लिए बहुत अहम दिन है। यह उन सभी के लिए अच्छी खबर है। ब्लिंकिट जैसी क्विक कॉमर्स कंपनियां अब 10 मिनट डिलीवर ब्रांडिंग हटा देंगी। आपकी आवाज शायद इन कंपनियों के मैनेजमेंट तक नहीं पहुंची होगी या उन्होंने इसे नजरअंदाज कर दिया होगा। लेकिन केंद्र सरकार ने आपकी आवाज सुनी और कार्रवाई की।'

 

 

इस फैसले पर एक गिग वर्कर ने कहा, 'अगर हम समय पर नहीं पहुंचते हैं तो कस्टमर हमें गाली देते हैं। हमारी आईडी ब्लॉक करवा देते हैं और जुर्माना लगाता हैं। हमें रॉन्ग साइड भी जाना पड़ता है। हमें फास्ट डिलीवरी के लिए सभी ट्रैफिक नियमों को तोड़ना पड़ता है।'

 

 

एक और गिग वर्कर ने कहा, 'सरकार ने जो किया है, वह अच्छा है। यह बहुत मुश्किल था। मेरे दो एक्सीडेंट हुए हैं। मेरा पैर दो बार फ्रैक्चर हुआ। अगर हमें ज्यादा समय मिलेगा तो हमें ज्यादा आसानी होगी। हमें बहुत जल्दी डिलीवरी करनी पड़ती थी। अगर कोई देरी होती थी तो इसका असर हमारी रैंक पर पड़ता था। अगर देरी होती थी तो हमारी रेटिंग गिर जाती थी।'

 

 

गाजियाबाद में एक क्विक कॉमर्स कंपनी से जुड़े गिग वर्कर ने कहा, 'अब हम अपनी स्पीड से चल सकते हैं। अब कोई दबाव नहीं होगा कि हमें 10 मिनट में डिलीवरी करनी है।'

 

यह भी पढ़ें-- क्या होती है 'ऑरेंज इकॉनमी'? जिस पर सरकार ने बढ़ा दिया अपना फोकस

 

कितना बड़ा है क्विक कॉमर्स का बाजार?

  • मार्केट लीडर: ब्लिंकिट सबसे बड़ा खिलाड़ी है, जिसका मार्केट शेयर 45% है। जेप्टो का 21% और स्विगी इंस्टामार्ट का 27% है। तीनों मिलकर 93% मार्केट पर कंट्रोल करते हैं। इन तीनों के अलावा 7% मार्केट पर बिग बास्केट का कब्जा है।
  • बिजनेस रेवेन्यू: क्राइसेम की रिपोर्ट के मुताबिक, क्विक कॉमर्स इंडस्ट्री में दो साल में बिक्री 280% से ज्यादा बढ़ी है। 2021-22 में इसकी वैल्यू 50 करोड डॉलर थी, जो 2023-23 तक बढ़कर 3.34 अरब डॉलर हो गई। 2029 तक यह लगभग 10 अरब डॉलर तक पहुंच जाएगी।
  • कितने ऑर्डर: हर दिन क्विक कॉमर्स से 30 से 50 लाख ऑर्डर होते हैं। इकोनॉमिक टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, शुरुआत में क्विक कॉमर्स पर औसतन 250 रुपये का ऑर्डर होता था। अब इन से ऑर्डर किए जाने वाले हर ऑर्डर की औसत कीमत 500 रुपये पहुंच गई है।
  • डिलीवरी एजेंट: अनुमान है कि भारत में क्विक कॉमर्स कंपनियों से 2.5 से 4 लाख लोग जुड़े हुए हैं। इनमें डिलीवरी एजेंट्स से लेकर वेयरहाउस में काम करने वाला स्टाफ और कंपनियों से जुड़े हुए लोग शामिल हैं।
  • काम कैसे करता है: इसमें 10 से 30 मिनट के भीतर डिलीवरी हो जाती है। जगह-जगह कंपनियों के 'डार्क स्टोर' होते हैं। ये डार्क स्टोर आम लोगों के लिए बंद रहते हैं। डिलीवर एजेंट यहां से ऑर्डर उठाते हैं और कस्टमर को डिलीवर करते हैं।

यह भी पढ़ें-- टैक्स बढ़ाने से कम होगी खपत? सिगरेट पर टैक्स का पूरा हिसाब-किताब

 

क्यों जरूरी था '10 मिनट डिलीवरी मॉडल' खत्म करना?

7 जनवरी को जेप्टो के डिलीवरी एजेंट के. अभिषेक की सड़क दुर्घटना में मौत हो गई थी। 25 साल के अभिषेक हैदराबाद के रहने वाले थे। अभिषेक सामान डिलीवर करने जा रहे थे और इसलिए तेज स्पीड में गाड़ी चला रहे थे। पुलिस ने बताया कि तेज स्पीड के कारण उनका कंट्रोल चला गया और बाइक फिसल गई।

 

'10 मिनट के भीतर डिलीवरी' करने का प्रेशर कितना बड़ा होता है, इसे अभिषेक के उदाहरण से समझ सकते थे। अगर उनके ऊपर जल्द से जल्द डिलीवरी करने का प्रेशर नहीं होता तो शायद वह आज जिंदा होते।

 

अल-जजीरा ने 2022 में एक रिपोर्ट की थी, जिसमें बताया गया था कि 10 मिनट में डिलीवरी करना डिलीवरी एजेंट्स पर कितना भारी पड़ता है। एक डिलीवरी एजेंट ने अल-जजीरा से कहा था कि 10 मिनट के अंदर 5 किलोमीटर दूर जाकर डिलीवरी करना पड़ता है। ये नामुमकिन है। अगर ट्रैफिक नियम भी तोड़ें तो भी इतने कम समय में 5 किलोमीटर जाकर सामान डिलीवर नहीं किया जा सकता।

 

एक डिलीवरी एजेंट ने बताया था कि 10 मिनट के भीतर डिलीवरी करने के चक्कर में ट्रैफिक नियम तोड़ने पड़ते हैं। इस पर उनका चालान कटता है, जिसका खर्च उन्हें ही उठाना पड़ता है। ये दिखाता है कि डिलीवरी एजेंट्स किस मानसिक दबाव में काम करते हैं।

 

 

अंग्रेजी अखबार 'द हिंदू' की नवंबर 2025 की रिपोर्ट बताती है कि अकेले बेंगलुरु में ही जल्दी डिलीवरी करने की भागदौड़ में तीन साल में 27 डिलीवरी एजेंट की मौत हो चुकी है। रिपोर्ट बताती है कि डिलीवरी एजेंट के ट्रैफिक नियम तोड़ने के मामले तीन साल में दोगुने हो गए हैं। 2023 में डिलीवरी एजेंट्स पर ट्रैफिक नियम तोड़ने के 30,968 चालान काटे गए थे। 2024 में 52,153 मामले सामने आए। वहीं, 2025 में जनवरी से सितंबर तक 63,718 मामले सामने आए। ये आंकड़े दिखाता है कि जल्दी डिलीवरी करने के लिए डिलीवरी एजेंट्स को किस तरह का खतरा उठाना पड़ता है।

 

इतना ही नहीं, क्विक कॉमर्स ने किराना दुकानों का धंधा भी चौपट कर दिया है। ऑल इंडिया कंज्यूमर प्रोडक्ट्स डिस्ट्रीब्यूटर्स फेडरेशन (AICPDF) के मुताबिक, क्विक कॉमर्स आने के बाद 2 लाख से ज्यादा किराना दुकानें बंद हो गई हैं।

 

हालांकि, जोमैटो के संस्थापक दीपिंदर गोयल डिलीवरी एजेंट्स की चिंताओं को खारिज करते हैं। उन्होंने हाल ही में कहा था कि ज्यादातर डार्क स्टोर 400 मीटर से 2 किलोमीटर के दायरे में होते हैं। राइडर्स को सामान डिलीवर करने के लिए औसतन 16 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से ही गाड़ी चलाना पड़ता है।

Related Topic:#Business News

और पढ़ें

design

हमारे बारे में

श्रेणियाँ

Copyright ©️ TIF MULTIMEDIA PRIVATE LIMITED | All Rights Reserved | Developed By TIF Technologies

CONTACT US | PRIVACY POLICY | TERMS OF USE | Sitemap