• NEW DELHI
07 Jun 2025, (अपडेटेड 07 Jun 2025, 2:14 PM IST)
भारत न तो G-7 देशों का सदस्य है, न ही पर्यवेक्षक लेकिन कई बार अतिथि देश के तौर पर आमंत्रित किया जाता रहा है। पीएम नरेंद्र मोदी G-7 शिखर सम्मेलनों में 5 बार शामिल हो चुके हैं। भारत के लिए G-7 देश क्यों अहम हैं, आइए जानते हैं।
2024 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी G7 नेताओं के साथ। (Photo Credit: PTI)
साल 2025 का G-7 देशों का शिखर सम्मेलन एक बार फिर चर्चा में है। कनाडा के अल्बर्टा प्रांत के कानानास्किस में यह आयोजन बुलाया गया है। एक बार फिर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को G-7 की बैठक में मेहमान के तौर पर बुलाया गया है। भारत न तो इस समूह का हिस्सा है, न ही पर्यवेक्षक है फिर भी अब तक पीएम नरेंद्र मोदी 5 बार इसकी बैठक में शामिल हो चुके हैं।
G-7 की मेजबानी कर रहे देश, भारत को प्रमुखता से बुलाते रहे हैं। अमेरिका, फ्रांस, ब्रिटेन, जापान, इटली और कनाडा जैसे शीर्ष देशों की इस अहम बैठक में भारत मेहमान के तौर पर शामिल होगा। न्योता मिलने की देरी को लेकर कांग्रेस ने देश में सवाल उठाए थे कि पीएम नरेंद्र मोदी की विदेश नीति कमजोर है लेकिन खुद पीएम ने ही तस्वीर साफ कर दी। कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी ने खुद उन्हें फोन करके बुलाया है।
G-7 दुनिया के सबसे विकसित देशों का संगठन है। दुनिया की राजनीति पर इन देशों का प्रभुत्व है। वैश्विक जीडीपी में इन देशों की 28 प्रतिशत से ज्यादा हिस्सेदारी मानी जाती है। साल 2014 से पहले तक इसे ग्रुप 8 के तौर पर जाना जाता था लेकिन जब रूस ने क्रीमिया पर कब्जा किया, तब से उसे बाहर कर दिया गया।
पीएम नरेंद्र मोदी अब तक G-7 की 5 बैठकों में हिस्सा ले चुके हैं। (Photo Credit: PTI)
न सदस्य, न ऑब्जर्वर, फिर भी हर बार बुलावा क्यों?
भारत दुनिया की आर्थिक महाशक्ति बढ़ने की ओर है। भारत सैन्य नजरिए से भी दुनिया के सबसे ताकतवर देशों में शुमार है। ग्लोबल फायरपावर की 2024 की रिपोर्ट बताती है कि भारती सेना, विश्व की चौथी सबसे शक्तिशाली सेना है। भारत की जीडीपी, 3.94 ट्रिलियन डॉलर के करीब है, यह जी-7 के चार देशों कनाडा, फ्रांस, इटली और यूके से भी ज्यादा है। भारत विश्व की सबसे तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्थाओं में से एक है।
भारत की गिनती, लोकतांत्रिक देशों में होती है, G-7 देश भी लोकतांत्रिक देश ही हैं। भारत ग्लोबल साउथ का एक अहम देश है और इंडो-पैसिफिक में रणनीतिक तौर पर बेहद अहम है। दुनिया भारत को चीन के बढ़ते प्रभाव के संतुलन के तौर पर देखती है। अमेरिका, जापान, फ्रांस, जर्मनी और यूके का झुकाव, चीन की तुलना में ज्यादा है। G-7 देश, इन्हीं वजहों से भारत को साथ रखना चाहते हैं।
(आंकड़े, अरब डॉलर में। सोर्स: www.india-briefing.com)
भारत G-7 नहीं, G-20 का सदस्य देश है। (Photo Credit: PMO/X)
भारत और चीन इसका हिस्सा क्यों नहीं?
असिस्टेंट प्रोफेसर निखिल गुप्ता, इंटरनेशनल लॉ, दीवान लॉ कॉलेज:- भारत अर्थव्यवस्था के लिहाज से दुनिया का 5वां सबसे बड़ा देश है। भारत की अर्थव्यवस्था करीब 3.93 ट्रिलियन डॉलर है, वहीं चीन की अर्थव्यवस्था करीब 18.53 ट्रिलियन डॉलर है। चीन अर्थव्यवस्था के लिहाज से दूसरे पायदान पर है लेकिन प्रति व्यक्ति आय इन देशों से कम है। जी-7 में केवल सात विकसित, लोकतांत्रिक अर्थव्यवस्थाएं शामिल हैं। चीन का कम्युनिस्ट शासन और मानवाधिकार उल्लंघन, प्रति व्यक्ति आय में कमी की वजह से उसे बाहर रखा गया है। भारत का विकासशील देश है, इसलिए बाहर है। दोनों देश जी-20 का हिस्सा हैं। एक यह भी मान्यता है कि ये देश, 'अभिजात्यवाद' बनाए रखने के लिए विकासशील देशों को इस लिस्ट से बाहर रखते हैं।