अमेरिका ने भारत के रूस से तेल खरीदने की प्रक्रिया पर प्रतिबंध लगाया है। इन प्रतिबंधों को सरकार ने एक सिरे से खारिज किया है। भारत ने अपनी ऊर्जा सुरक्षा को स्पष्ट करते हुए कहा है कि रूस से कच्चा तेल खरीदना जारी रहेगा, चाहे अमेरिका की छूट मिले या न मिले।
पेट्रोलियम मंत्रालय की संयुक्त सचिव सुजाता शर्मा ने सोमवार को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि भारत पहले भी रूस से तेल खरीदता था, छूट के दौरान भी खरीदता रहा और अब भी खरीद रहा है। सुजाता शर्मा ने जोर देकर कहा कि भारत का तेल खरीदना मुख्य रूप से व्यावसायिक और आर्थिक जरूरतों पर आधारित है। उन्होंने यह भी बताया कि देश के पास पर्याप्त कच्चा तेल उपलब्ध है और कोई कमी नहीं है।
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क्यों देनी पड़ी सरकार को सफाई?
ब्लूमबर्ग की एक रिपोर्ट में दावा किया गया था कि भारत ने अमेरिका से रूसी तेल खरीदने के लिए तय छूट की सीमा बढ़ाने की मांग की है। अमेरिका ने मार्च में छूट दी थी, जिसकी समय सीमा 16 मई को खत्म हो गई थी। भारत रूस से सस्ता तेल खरीदकर अपनी ऊर्जा जरूरतें पूरी कर रहा है। मई महीने में भारत में रूसी तेल का आयात औसतन 19 लाख बैरल प्रतिदिन रहने का अनुमान है, जो अब तक का रिकॉर्ड स्तर है।
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भारत क्यों जारी रखेगा रूस से तेल आयात, समझिए
- सस्ती दरें: दुनिया में तेल की स्थिति अभी साफ नहीं है। ईरान युद्ध की वजह से स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में व्यापार, किसी देश के लिए आसान नहीं है। ऐसे में रूसी तेल सस्ता पड़ता है और उसकी सप्लाई भी ज्यादा स्थिर है क्योंकि यह सीधे स्ट्रेट ऑफ होर्मुज वाले रास्ते पर नहीं आता।
- ऊर्जा सुरक्षा: रूस से तेल लेना भारत की ऊर्जा सुरक्षा का हिस्सा है। भारत की जरूरतें, रूस पूरी कर रहा है। इतनी बड़ी मात्रा में सस्ता और अच्छा तेल दूसरे देशों से आसानी से नहीं मिल सकता। इसलिए भारत रूस से खरीदारी जारी रखेगा।
- अमेरिकी छूट बेअसर: वेवर खत्म होने के बाद भी आयात लगभग वैसा ही बना रहेगा, बस कुछ बदलाव होंगे। भारत अब और सावधानी बरतेगा। प्रतिबंधित कंपनियों या जहाजों से दूर रहेगा। पूरी तरह रूस से तेल लेना बंद नहीं होगा, सिर्फ प्रक्रिया थोड़ी सख्त होगी।
- अपना हित सर्वोपरि: भारत ने कई बार कूटनीतिक स्तर पर यह संकेत दिया है कि भारत के अपने रणनीतिक और आर्थिक हित सर्वोपरि हैं। जहां देश की जनता के लिए सस्ता और सुरक्षित तेल मिलता है, वहीं से खरीदारी जारी रहेगी। दोनों देशों के बीच एक तरह की समझ बनी हुई है कि भारत रूसी ऊर्जा खरीदता रहेगा, क्योंकि यह भारत की ऊर्जा सुरक्षा की रीढ़ बन चुकी है। रूसी तेल पर भारत की निर्भरता बनी रहेगी, चाहे अमेरिकी प्रतिबंध हों या न हों।