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क्या दिल्ली से खत्म हो गया है रेड राज?

दिल्ली में रेड राज से अरविंद केजरीवाल ने व्यापारियों को मु्क्ति दिलाने की बात कही थी। इस वादे का क्या हुआ, आइए समझते हैं।

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Creative Image (Photo Credit: Khabargaon)

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वादा- रेड-राज की समाप्ति

'हम पिछले 5 वर्षों की तरह दिल्ली के सभी व्यापारियों को एक स्वतंत्र और उचित कारोबारी माहौल प्रदान करते रहेंगे। रेड़-राज पर अंकुश जारी रहेगा। हम दिल्ली की अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के लिए विश्वास और सहयोग की भावना के साथ व्यापार और व्यवसाय करने वाले लोगों से जुड़कर काम करेंगे।'

 

 

साल 2020। चुनावों से ठीक पहले अरविंद केजरीवाल ने वादा किया था कि वह दिल्ली में व्यापारियों पर पड़ने वाले रेड से, दिल्ली के व्यापारियों को आजादी दिलाएंगे। व्यापार और व्यवसाय  से जुड़े लोगों के साथ वह सहयोग की भावना से काम करेंगे। उनका कहना था कि दिल्ली के व्यापारी ईमानदार हैं, उन्हें बेवजह रेड डाल कर परेशान नहीं करना चाहिए।

अरविंद केजरीवाल का कहना था कि दिल्ली में नगर निगम अधिकारी, आयकर विभाग, मार्केटिंग अधिकारियों की बार-बार रेड से व्यापारी वर्ग परेशान है और इसे वह खत्म कर देंगे। दिल्ली के व्यापारियों का एक तबका मानता है कि उनकी सरकार में व्यापारियों पर होने वाली बेवजह रेड रुकी है।

 

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इतने सालों में क्या-क्या बदला?
24 सितंबर 2019। दिल्ली के तत्कालीन मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल की सत्ता के 4 साल बीत गए थे। उन्होंने एक जनसभा में कहा कि दिल्ली से रेड राज खत्म कर दिया गया है। आम आदमी पार्टी की सरकार के सत्ता में आने के बाद लोग ज्यादा कर देने लगे हैं। 

अरविंद केजरीवाल ने कहा कि साल 2015 में सरकार को करों से मिलने वाला राजस्व 30 हजार करोड़ रुपये था, जो इस साल बढ़कर 60 हजार करोड़ रुपये हो गया। उन्होंने इस बदलाव को अजूबा बताया गया था। अरविंद केजरीवाल की राजनीति व्यापारियों को लुभाने की रही है।

कैसे हुआ यह आखिर?
अरविंद केजरीवाल आयकर विभाग में अधिकारी रहे हैं। उनका कहना है कि अगर सरकार ईमानदार हो तभी व्यापारी कर देना चाहते हैं। अरविंद केजरीवाल ने कहा, 'हमने बार-बार छापेमारी करने वाली रीति में बदलाव किया, व्यापारियों को तंग नहीं किया तो लोगों ने कर भी दिया।'

रेड राज से परेशानी क्या थी?
- सरकारी रेड से स्थानीय व्यापारी परेशान थे। उनका आरोप था कि अवैध वसूली की जा रही है।
- व्यापारियों पर होने वाली औचक छापेमारी से लोग परेशान थे।
- अधिकारी कोई न कोई चूक जरूर निकाल देते थे, जुर्माना लगाते थे।
- भ्रष्टाचार की शिकायतें भी बढ़ गई थीं। 

 

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दिल्ली सरकार ने किया क्या था?
दिल्ली सरकार ने बिजनेस इंटेलिजेंस यूनिट का गठन किया था। इससे उन्हें ऐसे मामलों को ट्रेस करने में मदद मिली।


दावे की हकीकत क्या है?
व्यापारी संगठन भी अरविंद केजरीवाल की बात से सहमत नजर आ रहे हैं कि रेड राज का दौर खत्म हो गया है। व्यापारी संगठनों का कहना है कि दिल्ली में उन्हें खुलकर काम करने दिया जाता है, रेड नहीं पड़ती है। सुमित कुमार व्यापारी हैं और दिल्ली के पांडव नगर में उनकी किराने की दुकान हैं। वह 5 साल से किराने की दुकान चला रहे हैं। वह बताते हैं कि वह समय से जीएसटी फाइल करते हैं, 5 साल में कोई भी अधिकारी उनके यहां जांच के लिए नहीं आया। सुमित कुमार के अलावा कई स्थानीय व्यापारियों ने भी कहा कि अधिकारियों की ओर से उन्हें परेशान नहीं किया जाता है। पहले महीने में एक-दो बार रेड हो जाती थी, अभी नहीं हो रही है। 


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