TMC से आए शुभेंदु तो CM बन गए, BJP के पुराने नेताओं का क्या हुआ?
भारतीय जनता पार्टी के संस्थापक प्रेरणाओं में से एक श्यामा प्रसाद मुखर्जी थे। वह पश्चिम बंगाल से थे। राज्य में दशकों बाद, बीजेपी अपनी सरकार, अपने दम पर बना पाई है।

प्रधानमंत्री नरेद्र मोदी और शुभेंदु अधिकारी। Photo Credit: PTI
भारतीय जनता पार्टी के लिए दशकों का इतजार खत्म हुआ है। राज्य में पहली बार बीजेपी का मुख्यमंत्री बना है। बंगाल विधानसभा में नेता विपक्ष रहे शुभेंदु अधिकारी, अब राज्य के मुख्यमंत्री हैं। उनका अतीत तृणमूल कांग्रेस से जुड़ा है। पार्टी में उनसे पहले बीजेपी से जुड़े कई नेता हैं, जो शपथ ग्रहण कार्यक्रम में अगली पंक्ति में नजर नहीं आए। अलग बात है कि मंच पर बीजेपी ने अपने 90 साल के एक वयोवृद्ध कार्यकर्ता माखनलाल सरकार को जगह दी, जिसके पांव प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने छुए।
पश्चिम बंगाल में भारतीय जनता पार्टी की नवनिर्वाचित सरकार में मुख्यमंत्री समेत कुल 6 मंत्री हैं। उन मंत्रियों में 2 ऐसे चेहरे हैं, जो तृणमूल कांग्रेस से हैं। मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी खुद 2019 तक उन नेताओं में शुमार रहे हैं, जिनके खिलाफ भारतीय जनता पार्टी का शीर्ष नेतृ्त्व मुखर होकर बोलता था। दिलीप घोष जैसे नेता, शुभेंदु अधिकारी से जमीनी लड़ाई लड़ रहे थे। अब उन्हें, शुभेंदु अधिकारी मंत्रिमंडल में जगह तो दी गई है लेकिन पार्टी में सीनियर होने के बाद भी मंत्रिमंडल में वह जूनियर हैं।
ऐसा ही हाल, उन नेताओं का हुआ है, जो हमेशा से भारतीय जनता पार्टी के साथ ही जुड़े थे। शुभेंदु के तेवर, किसी जमाने में सेक्युलर राजनीति वाले रहे, अब वह हिंदुत्व के पोस्ट बॉय बन चुके हैं।
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आइए जानते हैं उन नेताओं का क्या हुआ, जिन्होंने बंगाल में बीजेपी को साल 2014 से एक नई दिशा दी और जिनकी वजह से बंगाल में बीजेपी की सरकार बनी-
राहुल सिन्हा कहां है, जिन्होंने 2014 में संभाली थी BJP की कमान
राहुल सिन्हा, पश्चिम बंगाल बीजेपी के अध्यक्ष रहे हैं। वह अब बीजेपी के राज्यसभा सांसद हैं। उन्होंने बीजेपी को राज्य में मजबूत करने में अहम भूमिका निभाई है। उन्हें पार्टी स्तंभ के तौर पर देखती है। साल 2009 से लेकर 2015 तक, दो बार वह राज्य बीजेपी के अध्यक्ष रहे हैं। बंगाल में उन्होंने तब कमान संभाली, जब बीजेपी की पश्चिम बंगाल में जमीन ही नहीं थी।
राहुल सिन्हा के कार्यकाल के दौरान ही 2014 के लोकसभा चुनावों में बीजेपी के वोट शेयर में इजाफा हुआ। यही वह चुनाव था, जिसने बीजेपी के भविष्य में मुख्य विपक्षी दल बनने की नींव रखी। एक कुशल वक्ता और जमीनी नेता के तौर पर, उन्होंने कार्यकर्ताओं का मनोबल बढ़ाया। TMC के खिलाफ जमीन तैयार की। वह बीजेपी के राष्ट्रीय सचिव तक के पद तक पहुंचे। अब वह राज्यसभा सांसद हैं।
एसएस अहलूवालिया का क्या हुआ, जो बंगाल में BJP के स्तंभ रहे
एसएस अहलूवालिया बीजेपी के सीनियर नेताओं में शामिल हैं। 3 दशक से ज्यादा समय से संसद सदस्य के तौर पर अपनी सेवाएं दे रहे हैं। वह पश्चिम बंगाल की बर्धमान-दुर्गापुर लोकसभा सीट से सांसद हैं। वह दार्जिलिंग लोकसभा क्षेत्र से आते हैं। 2014 से वह पश्चिम बंगाल में बीजेपी को मजबूत कर रहे हैं। वह कई बार राज्यसभा सदस्य रहे, जहां उन्होंने बिहार और झारखंड का प्रतिनिधित्व किया। 1999 से ही वह बीजेपी में हैं। उनके पास मोदी सरकार में भी मंत्रालय रहा है।
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दिलीप घोष, जो CM पद के दावेदार थे, मंत्री बने
दिलीप घोष, पश्चिम बंगाल भारतीय जनता पार्टी के अध्यक्ष रह चुके हैं। साल 2014 में जब बीजेपी को पश्चिम बंगाल में 3 सीटें आईं थीं, दिलीप घोष को यह खटक गया था। तब वह राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ में थे और बीजेपी के लिए जमीन तैयार कर रहे थे। दिलीप घोष, साल 1984 में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रचारक बने थे। वह पूर्व संघ प्रमुख केएस सुंदरशन के सहायक भी रह चुके हैं। साल 1999 से 2007 तक उन्होंने अंडमान और निकोबार द्वीप समूह में RSS की जिम्मेदारी संभाली। 2014 में संगठन ने उन्हें बीजेपी में भेजा। बंगाल यूनिट के महासचिव बनाया गया। 2015 में उन्हें पार्टी का बंगाल राज्य अध्यक्ष नियुक्त किया गया।
दिलीप घोष, जमीन पर टिके, जमकर प्रचार किया। साल 2016 में दिलीप घोष ने पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में खड़गपुर सदर सीट से कांग्रेस के दिग्गज नेता ज्ञान सिंह सोहनलाल को हराकर पहली बार विधायकी हासिल की। वह उन 3 लोगों में शामिल थे, जिन्होंने टीएमसी की लहर में भी अपनी सीट बचा ली। साल 2019 का लोकसभा चुनाव उनके लिए अग्निपरीक्षा की तरह रहा, जिसमें वे खरा सोना साबित हुए।
उनकी अगुवाई में बीजेपी ने बंगाल की 42 सीटों में से 18 सीटें जीतीं और 40 फीसदी से ज्यादा वोट हासिल किए। खुद दिलीप घोष मेदिनीपुर लोकसभा सीट से सांसद चुने गए। 2021 के विधानसभा चुनाव हुए। 3 सीटों वाली पार्टी, उनकी अगुवाई में 77 सीटों तक पहुंची। 2021 के बाद पार्टी में अनबन बढ़ा, वह नाराज हुए। शुभेंदु अधिकारी को समिक भट्टाचार्य को ज्यादा तरजीह मिली। 2026 के विधानसभा चुनाव से पहले सब सामान्य हो गया। वह पार्टी और सरकार दोनों में अहम भूमिका में हैं।
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अग्निमित्रा पॉल, BJP से सियासी सफर शुरू हुआ, इनाम भी मिला
अग्निमित्रा पॉल का 2019 से पहले सियासत से नाता नहीं था। वह फैशन इंडस्ट्री से थीं लेकिन राज्य में उनका सियासी कद, 2019 से तेजी से बढ़ता गया। शुभेंदु कैबिनेट की वह इकलौती महिला चेहरा हैं। वह आसनसोल दक्षिण से दो बार की विधायक हैं। बीजेपी की बंगाल यूनिट की उपाध्यक्ष और महिला मोर्चा की सक्रिय कार्यकर्ता हैं। साल 2019 में राजनीति में आईं और 2026 के चुनाव में अपनी सीट पर तृणमूल कांग्रेस के उम्मीदवार को 40,000 से अधिक वोटों से हराकर मजबूत वापसी की। वह महिलाओं की मुखर आवाज हैं, पार्टी उन्हें ममता बनर्जी की तुलना में बीजेपी में जगह दे रही है। ऐसी भी अटकलें लगाई गईं कि वह सीएम उम्मीदवार हो सकती हैं, लेकिन अब उन्हें कैबिनेट में अहम जगह दी गई है।
समिक भट्टाचार्य, जो संभाल रहे हैं बीजेपी की कमान
समिक भट्टाचार्य, राज्यसभा सांसद हैं और राज्य बंगाल के अध्यक्ष हैं। समिक भट्टाचार्य, चार दशक से ज्यादा समय से बीजेपी से जुड़े हुए हैं। वह पार्टी के प्रमुख चेहरे हैं। समिक, साल 2014 से 2016 के दौरान बसिरहाट दक्षिण से विधायक रह चुके हैं। 2021 में राजारहाट गोपालपुर से चुनाव लड़े थे। वह बीजेपी के उन नेताओं में शामिल हैं, जिन्होंने पश्चिम बंगाल में बीजेपी को खड़ा किया है।
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