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पूर्व सांसदों को मैदान में उतारने से एनडीए के अंदर विरोध, कितना पड़ेगा असर?

बिहार विधानसभा चुनाव में एनडीए ने तमाम ऐसे उम्मीदवार उतारे हैं जो कि 2024 का लोकसभा का चुनाव हार गए थे। इसकी वजह से कई लोगों में असंतोष का भाव है।

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नरेंद्र मोदी और नीतीश कुमार Photo Credit: PTI

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संजय सिंह, पटनाः चुनाव के अंतिम दिनों तक सीट शेयरिंग को लेकर एनडीए और महागठबंधन में सस्पेंस बना रहा। महागठबंधन में तो आधे दर्जन से ज्यादा सीटों पर फ्रैंडली मैच हो रहा है। उधर जेडीयू और बीजेपी ने अपनी जीत सुनिश्चित करने के लिए सात सीटों पर राजनीति के माहिर पूर्व सांसदों को मैदान में उतारा है। पार्टी के इस फैसले से जेडीयू के कुछ सांसद नाराज भी हो गए।


नाराजगी की वजह से पूर्णियां के सांसद संतोष कुशवाहा ने पाला बदल लिया। बांका के सांसद गिरिधारी यादव के पुत्र आरजेडी में चले गए। भागलपुर के सांसद अजय मंडल ने तो अपने
इस्तीफे की पेशकश मुख्यमंत्री से कर दी। लोकसभा में पराजय का मुंह देखने वाले सांसद विधानसभा चुनाव में कोई करिश्मा कर पाएंगे। इस पर सबकी निगाहें लगी हुई है।

 

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पूर्व सांसदों पर दांव

जहानाबाद का इलाका राजनीतिक रूप से काफी उर्वर है। यहां से जेडीयू की टिकट पर विधानसभा का चुनाव पूर्व सांसद चंद्रवंशी लड़ रहे हैं। 2019 के चुनाव में वे सांसद के रूप में निर्वाचित हुए थे, लेकिन 2024 के लोकसभा चुनाव में वे हार गए। क्षेत्र में इनकी पकड़ मजबूत है। जातीय समीकरण भी इनके पक्ष में फिट बैठता है। इस कारण पार्टी ने इन पर भरोसा करते हुए विधानसभा का टिकट दिया है। काराकाट विधानसभा क्षेत्र भी राजनीति दृष्टिकोण से काफी महत्वपूर्ण है। यह संसदीय सीट भी है। 2019 में जेडीयू प्रत्याशी के रूप में महाबली सिंह सांसद बने थे। दोबारा वे सांसद का चुनाव नही जीत पाए। अब विधायक बनने के लिए चुनाव मैदान में उतरे हैं। 

 

कटिहार के सांसद दुलाल चंद गोस्वामी का भी यही हाल है। 2024 के लोकसभा में कांग्रेस के प्रत्याशी तारिक अनवर से चुनाव हार गए थे। अब विधायक बनने के लिए मैदान में आए हैं। वे पहले भी विधायक रह चुके हैं। वर्ष 2014 में आरजेडी की टिकट पर भागलपुर से सांसद रहे। बुलो मंडल अब जेडीयू में हैं। जेडीयू ने गोपालपुर विधानसभा सीट से गोपाल मंडल का टिकट काटकर बुलो मंडल को दिया है। समस्तीपुर से सांसद रहीं अश्वमेघ देवी अब उजियारपुर से विधानसभा का चुनाव लड़ेंगी। 

कुछ सांसदों में नाराजगी

पार्टी के इस फैसले से जेडीयू के एक पूर्व और दो वर्तमान सांसद नाराज हो गए। पूर्णिया के पूर्व सांसद संतोष कुशवाहा भी चुनाव लड़ना चाहते थे। पार्टी ने टिकट देने से मना कर दिया। परिणामस्वरूप वे पार्टी बदलकर आरजेडी में चले गए। अब आरजेडी की टिकट पर वे धमदाहा से चुनाव लड़ेंगे। बांका के सांसद गिरिधारी यादव अपने बेटे चाणक्य के लिए टिकट चाहते थे, लेकिन पार्टी ने ऐसा करने से मना कर दिया। 

 

अब सांसद के बेटे आरजेडी में हैं। वे जेडीयू प्रत्याशी मनोज यादव के खिलाफ बेलहर से चुनाव लड़ेंगे। भागलपुर के सांसद अजय मंडल को भी अपने चहेते के लिए टिकट चाहिए था। उनकी भी मंशा पूरी नही हुई। उन्होंने अपने त्यागपत्र की पेशकश मुख्यमंत्री से कर दी।

बीजेपी ने भी दिया मौका

बीजेपी ने भी दो पूर्व सांसदों को विधानसभा चुनाव लड़ने का मौका दिया है। रामकृपाल यादव 2019 में पाटलिपुत्र लोकसभा से चुनाव जीते थे। 2024 के लोकसभा चुनाव में वे चुनाव हार गए। पार्टी ने अब उन्हें दानापुर से चुनाव मैदान में उतारा है। सीतामढ़ी के पूर्व सांसद सुनीत कुमार पिंटू की कहानी भी कुछ इसी तरह मिलती जुलती है। पार्टी ने उन्हें फिर से सीतामढ़ी विधानसभा क्षेत्र से चुनाव लड़ने का मौका दिया है। राजनीतिक समीकरण में इनकी स्थिति बेहतर है।

 

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पार्टी के फैसले से नाराजगी

पार्टी के इस फैसले से कुछ लोग नाराज भी हैं। बक्सर के पूर्व सांसद अश्वनी चौबे अपने बेटे अर्जित चौबे के लिए भागलपुर विधानसभा का टिकट चाहते थे, लेकिन पार्टी ने टिकट रोहित पांडेय को दे दिया। अब पूर्व सांसद के बेटे निर्दलीय चुनाव लड़ने के लिए तैयार हैं। पार्टी ने नाराजगी कम करने के लिए अश्वनी चौबे का नाम स्टार प्रचारकों की सूची में रखा है।

 

दूसरे नाराज सांसद में सैयद शाहनवाज हुसैन हैं। वे भागलपुर और किशनगंज के सांसद रहे हैं। इस बार वे भागलपुर से विधानसभा चुनाव लड़ना चाहते थे। पार्टी उन्हें किशनगंज से टिकट देने के लिए तैयार थी। पर उन्होंने किशनगंज से चुनाव लड़ने से मना कर दिया।

 


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