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जिन चेहरों के भरोसे बंगाल जीतती हैं ममता, BJP ने उनके खिलाफ किसे उतारा?

पश्चिम बंगाल की सत्तरूढ़ पार्टी, तृणमूल कांग्रेस में कई ऐसे मंत्री हैं, जो ममता बनर्जी की कोर टीम का हिस्सा हैं। उनके खिलाफ, बीजेपी कैसे रणनीति बना रही है, आइए समझते हैं।

Mamata Banerjee

पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी। Photo Credit: PTI

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पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी की सरकार डेढ़ दशक से कायम है। हर चुनाव में ममता बनर्जी और मजबूत होकर उभरती हैं। उनकी कोर टीम का हिस्सा रहे, कई दिग्गज, अब भारतीय जनता पार्टी (BJP) के साथ हैं। ममता बनर्जी के साथ, सिंगूर और नंदीग्राम के आंदोलनों से पहले भी कुछ ऐसे साथी हैं, जो उन्हें बार-बार चुनाव जीतने में मदद करते हैं। ये नेता, सिर्फ अपनी विधानसभाओं में नहीं मजबूत हैं, बल्कि आसपास की विधानसभाओं में चुनाव जिताने या हराने का दम रखते हैं।

जैसे 'अधिकारी परिवार' का गढ़ नंद्रीग्राम रहा है, वैसे ही ममता बनर्जी के कई मजबूत नेता हैं, जिनकी पकड़, अपनी लोकसभा और विधानसभाओं में ऐसी है, जो बीजेपी के लिए आज भी किसी चुनौती से कम नहीं है। ये नेता, पश्चिम बंगाल के जातीय और धार्मिक समीकरणों में ऐसे फिट बैठते हैं कि बीजेपी चाहकर भी साल 2017 से सेंध नहीं लगा पा रही है। 

एक तरफ, ऐसे राज्य, जहां कभी बीजेपी की सरकार नहीं थी, बीजेपी ने वहां सरकार बनाई, गठबंधन मजबूत किया, दूसरी तरफ, पश्चिम बंगाल में जस की तस स्थिति बनी रही। 2021 में पूरी जोर-आइजमाइश और प्रचंड मोदी लहर के बाद भी 100 सीटों तक नहीं पहुंच पाई थी। आखिर कौन से ऐसे नेता हैं, जो ममता को अजेय बनाते हैं, भारतीय जनता पार्टी, 2024 के चुनाव में ऐसा क्या कर रही है, आइए समझते हैं-

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फिरहाद हकीम, इस बार कड़ी है चुनौती

फिरहाद हाकिम, ममता बनर्जी के भरोसेमंद नेताओं में शामिल रहे हैं। वह कोलकाता के पूर्व मेयर और टीएमसी दिग्गज नेताओं में शामिल रहे हैं। अभी उनके पास है शहरी विकास और नगर निगम मामलों का मंत्रालय है। वह कोलकाता पोर्ट से चुनाव लड़ रहे हैं। हर मुश्किल में टीएमसी के संकट मोचक रहे हैं। ममता बनर्जी की टीम के मुस्लिम चेहरे हैं। 

नारदा स्टिंग ऑपरेशन में उनका नाम रहा, पार्टी के सबसे विवादित चेहरों में से एक हैं लेकिन ममता बनर्जी के करीबी हैं। उन्हें हर बार, ममता बनर्जी बड़ा मौका देती हैं। भारतीय जनता पार्टी ने उनके खिलाफ भारतीय जनता पार्टी ने राकेश सिंह को उतारा है। राकेश सिंह, प्रेजीडेंसी जेल में बंद थे। उन्हें चुनाव से पहले सशर्त जमानत मिली है। सितंबर 2025 में कोलकाता के तंगरा इलाके से उन्हें गिरफ्तार किया गया था। आरोप हैं कि उन्होंने बीजेपी समर्थकों के साथ विधान भवन पर हमला कर दिया था।  

चंद्रिमा भट्टाचार्य, ममता की दुलारी, सीट बचा ले जाएंगी?

ममता बनर्जी की कोर टीम का हिस्सा हैं। ममता बनर्जी भरोसा जताती हैं। वह राज्य की वित्त, पर्यावरण और भूमि सुधार मंत्री हैं। कई अहम भूमिकाएं उनके पास पार्टी और सरकार में है। दमदम उत्तर उनकी विधानसभा रही है। साल 2011 में जब ममता बनर्जी, मुख्यमंत्री बनी थीं, तब से वह साथ हैं। वह पूर्व वित्त मंत्री रहे अमित मित्रा की भी करीबी है। भारतीय जनता पार्टी ने उनकी चुनावी राह मुश्किल करने के लिए अरिजित बख्शी को उतारा है। अरिजित, बीजेपी के सक्रिय नेता हैं, ममता बनर्जी सरकार के मुखर आलोचक हैं। सरकार के खिलाफ कई आंदोलनों का नेतृत्व कर चुके हैं। 

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मदन मित्रा, क्या इस बार टिक पाएंगे?

मदन मित्रा, ममता बनर्जी के सबसे भरोसेमंदर नेताओं में से एक हैं। वह कमरहाटी विधानसभा से चुनावी मैदान में हैं। वह पश्चिम बंगाल ट्रांसपोर्ट कॉर्पोरेशन के अध्यक्ष हैं। वह बंगाली फिल्मों के लोकप्रिय अभिनेता हैं। साल 1998 में वह तृणमूल कांग्रेस से जुड़े। ममता बनर्जी से वह तब से ही जुड़े हैं। जब 2011 में ममता बनर्जी, मुख्यमंत्री बनीं, तब उन्हें राज्य मंत्री का दर्जा मिला था। वह शारदा चिट फंड स्कैम को लेकर विवादों में रहे हैं। 22 महीने की जेल भी काट चुके हैं। बीजेपी ने उनके खिलाफ अरूप चौधरी को उतार दिया है। 

प्रदीप मजूमदार, क्या इस बार भी मिलेगी कामयाबी?

प्रदीप मजूदर, टीएमसी के सीनियर नेताओं में से एक हैं। पार्टी ने उन्हें दुर्गापुर पूरब से चुनावी मैदान में फिर उतारा है। उनके पास पंचायत, ग्रामीण विकास विभाग भी है। वह पश्चिम बंगाल एग्रो इंडस्ट्रीज कॉर्पोरेशन के चेयरमैन भी हैं। ममता बनर्जी, राज्य के औद्योगिक विकास के मामलों में इनकी सलाह 2011 से लेती रहीं हैं। उन्हें 2011 में कृ्षि सलाहकार भी बनाया गया था। बीजेपी ने उनके खिलाफ चंद्र शेख बनर्जी को उतारा है। वह दुर्गापुर में मंदिरों का दौरा कर रहे हैं, हिंदुत्ववादी राजनीति पर जोर दे रहे हैं। वह जनता में पकड़ बनाने की कोशिश कर रहे हैं। पार्टी के युवा चेहरे हैं। 

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उदयन गुहा, मुश्किल होगी जंग

उदयन गुहा, पश्चिम बंगाल के बड़े नेताओं में शुमार हैं। उत्तर बंगाल विकास मंत्री हैं। वह दिनहटा विधानसभा से चुनाव लड़ते हैं। TMC के पुराने नेताओं में शुमार रहे है। उनके खिलाफ बीजेपी ने अजय रे को उतारा है। बीजेपी ने नए चेहरो को मौका दिया है। यह सीट इतनी अहम है कि ममता बनर्जी, कई बार दौरा कर चुकी हैं।


ममता बनर्जी के मंत्रिमंडल में कुल 54 मंत्री हैं। मंत्रिमंडल में कुछ चेहरे बार-बार बदलते हैं, कुछ चेहरे नहीं बदलते, हमेशा रहते हैं और ममता बनर्जी की कोर टीम के हिस्सा हैं। 

पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव कब हैं?

राज्य की 294 विधानसभा सीटों पर दो चरणों में चुनाव हैं। 23 और 29 अप्रैल को वोट डाले जाएंगे और 4 मई को चुनाव के नतीजे आएंगे।

 

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