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गुरुआ विधानसभा: हर बार नया चेहरा चुनती है जनता, BJP के लिए बनेगा मौका?

गयाजी जिले की गुरुआ विधानसभा की जनता को नया चेहरा पसंद है। अगर नया चेहरे को मौका मिलता है तो उसके जीत की संभावना बढ़ जाती है।

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गुरुआ विधानसभा सीट, Photo Credit- KhabarGaon

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बिहार की गयाजी जिले में पड़ने वाली गुरुआ विधानसभा 1977 में अस्तित्व में आई थी। गुरुआ सीट पर ढाई दशकों से बीजेपी और आरजेडी का मुकाबला होता रहा है। दिलचस्प बात यह है कि इस सीट पर हार और जीत का अंतर 6 से 7 हजार वोटों का ही होता है। 2015 में यहां हार-जीत का अंतर 6,515 और 2020 में 6,599 वोटों का था। इस सीट से अब तक 8 विधायक रहे हैं, जिनमें से तीन मुस्लिम हैं। 


गयाजी जिले में 10 विधानसभा सीटें आती हैं, जिनमें से एक गुरुआ भी है। बौद्ध धर्म को मानने वालों के लिए गयाजी आस्था का बड़ा केंद्र माना जाता है। ऐसी मान्यता है कि भगवान बुद्ध बोधगया से सारनाथ जाते समय इसी इलाके से होकर गुजरे थे। यहां बौद्धों से जुड़ीं कई प्रतिमाएं और अवशेष भी मिले हैं।


गुरुआ विधानसभा में 2000 से 2020 तक 6 विधानसभा चुनाव हुए हैं। इनमें से 4 बार आरजेडी और 2 बार बीजेपी को जीत मिली है। पिछले चुनाव में आरजेडी ने यह सीट बीजेपी से छीन ली थी।

 

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मौजूदा समीकरण

गुरुआ विधानसभा सामान्य वर्ग की सीट है लेकिन यहां अनुसूचित जाति (SC) की आबादी सबसे ज्यादा है। यहां SC आबादी 32 फीसदी से ज्यादा है। वहीं, मुस्लिम लगभग 10 फीसदी है। यहां आरजेडी और बीजेपी में मुख्य मुकाबला होता है। यहां की जनता के लिए हर चुनाव में नया चेहरा मायने रखता है। पिछले कुछ चुनाव का ट्रेंड बताता है कि अगर जीती हुई पार्टी फिर से मौजूदा विधायक को टिकट देती है तो जनता उसे नकार देती है। उदाहरण के लिए 2020 में बीजेपी ने मौजूदा विधायक राजीव नंदन दांगी को टिकट दिया था, जो हार गए थे। जबकि 2015 के चुनाव में बीजेपी ने मौजूदा विधायक सुरेंद्र प्रसाद सिन्हा की जगह राजीव नंदन को उतारा था तो वह जीत गए थे।

2020 में क्या हुआ था?

पिछले विधानसभा चुनाव में गुरुआ में आरजेडी के विनय यादव ने बीजेपी के राजीव नंदन दांगी को 6,599 वोटों से हरा दिया था। विनय यादव को 70,761 और राजीव नंदन को 64,162 वोट मिले थे। तीसरे नंबर पर बीएसपी के राघवेंद्र नारायण यादव रहे थे, जिन्हें 15,235 वोट मिले थे।

 

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विधायक का परिचय

गुरुआ सीट से इस समय आरजेडी के विनय यादव विधायक हैं। यह आरजेडी का एकदम नया चेहरा हैं। 2020 में विनय यादव ने अपना पहला विधानसभा चुनाव लड़ा था। पहले ही चुनाव में उन्होंने लगातार दो बार से जीतती आ रही बीजेपी को मात दे दी थी।


विनय यादव की छवि साफ नेता की रही है। वह 12वीं पास हैं। 2020 के चुनाव में दाखिल हलफनामे में विनय यादव ने अपने पास 32.97 लाख रुपये की संपत्ति होने की जानकारी दी थी। उनके खिलाफ कोई भी क्रिमिनल केस नहीं है।

विधानसभा का इतिहास

गुरुआ सीट पर पहली बार 1977 में विधानसभा चुनाव हुए थे। तब से अब तक यहां 11 बार चुनाव हो चुके हैं। इनमें 4 बार आरजेडी और 2-2 बार बीजेपी, कांग्रेस और निर्दलीय उम्मीदवार जीते हैं। पहले चुनाव में जनता पार्टी की जीत हुई थी।

  • 1977: उपेंद्र नाथ वर्मा (जनता पार्टी)
  • 1980: मोहम्मद शाहजहां (कांग्रेस)
  • 1985: मोहम्मद खान अली (कांग्रेस)
  • 1990: रामचंद्र सिंह (निर्दलीय)
  • 1995: रामचंद्र सिंह (निर्दलीय)
  • 2000: शकील अहमद खान (आरजेडी)
  • 2005: शकील अहमद खान (आरजेडी)
  • 2005: शकील अहमद खान (आरजेडी)
  • 2010: सुरेंद्र प्रसाद सिन्हा (बीजेपी)
  • 2015: राजीव नंदन दांगी (बीजेपी)
  • 2020: विनय यादव (आरजेडी)

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