हायर एजुकेशन में बंगाल की स्थिति खराब, अन्य चुनावी राज्यों में कैसी है हालत?
अप्रैल महीने में पश्चिम बंगाल, केरल, असम, तमिलनाडु और पुडुचेरी में विधानसभा चुनाव होंगे। इन चुनावों में लेकर शिक्षा को लेकर कई वादे किए जा रहे हैं लेकिन हायर एजुकेशन संस्थानों की स्थिति खराब है।

ममता बनर्जी। (Photo Credit: PTI)
पश्चिम बंगाल, केरल, तमिलनाडु, असम और पुडुचेरी में विधानसभा चुनाव हो रहे हैं। इन पांचों राज्यों में अप्रैल में ही वोटिंग होगी। इस बीच रोजगार से लेकर एजुकेशन तक कई दावे और वादे किए जा रहे हैं। पश्चिम बंगाल में पिछले 15 साल से ममता बनर्जी सीएम के पद पर हैं और उन्होंने अपने राज्य में कई यूनिवर्सिटी खोली लेकिन इन यूनिवर्सिटी की स्थिति ठीक नहीं है। इंडियन एक्सप्रेस ने अपनी रिपोर्ट में बताया है कि ममता बनर्जी के कार्यकाल में बनी यूनिवर्सिटी की हालत ठीक नहीं है। कई यूनिवर्सिटी में तो पर्मानेंट प्रोफेसर ही नहीं हैं।
2017 और 2018 के बीच में ममता बनर्जी की राज्य सरकार ने 11 नई यूनिवर्सिटी शुरू की थी। 2011 में राज्य में 13 यूनिवर्सिटी थी और इसके बाद राज्य सरकार ने 16 नई यूनिवर्सिटी बनाने का दावा किया। 2017 में एक यूनिवर्सिटी की स्थापना पर सीएम बनर्जी ने कहा था कि राज्य में ऐसी यूनिवर्सिटी बनाई जाएंगी जो हार्वर्ड और शिकागो जैसे संस्थानों की बराबरी करें ताकि बंगाल के बच्चों को विदेश में पढ़ाई के लिए ना जाना पड़े। हालांकि, ममता बनर्डी की यह ड्रीम यूनिवर्सिटीज काफी हार्वड की बराबरी तो दूर की बात रही यह तो किसी आम यूनिवर्सिटी से भी पीछे रह चुकी हैं।
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क्या है बंगाल की यूनिवर्सिटी का हाल?
इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट में उन यूनिवर्सिटी के बारे में बताया गया है जिन्हें सीएम बनर्जी के कार्यकाल में 2017-18 के बीच बनी थी। रिपोर्ट के अनुसार, इनमें से 7 यूनिवर्सिटी अपना पर्मानेंट कैंपस नहीं बना पाई और आज भी किराये की इमारतों से चल रही हैं। हैरानी की बात यह कै कि जिन यूनिवर्सिटी को हार्वर्ड की बराबरी के लिए बनाया गया था वे यूनिवर्सिटी गेस्ट फैक्लटी के भरोसे चल रही हैं। 11 में से 9 यूनिवर्सिटी में कोई पर्मानेंट फैक्लटी नहीं है और गेस्ट टीचर्स को हर के क्लास के लिए 500 रुपये दिए जाते हैं। इन 11 में से 8 यूनिवर्सिटी में करीब 17,000 स्टूडेंट पड़ते हैं।
रैंकिंग में बंगाल कहां?
देशभर की यूनिवर्सिटी को NIRF अलग-अलग पैरामीटर के आधार पर रैंकिंग प्रदान करता है। NIRF की स्टेट पब्लिक यूनिवर्सिटी की रैंकिंग के अनुसार, पश्चिम बंगाल की जाधवपुर यूनिवर्सिटी और कलकत्ता यूनिवर्सिटी को ही देश की टॉप 100 स्टेट पब्लिक यूनिवर्सिटी में जगह मिली है। राज्य के लिए यह चिंताजनक स्थिति है। हालांकि, जाधवपुर यूनिवर्सिटी इस कैटेगरी में नंबर 1 पर है लेकिन इतनी बड़ी आबादी वाले राज्य की सिर्फ 2 यूनिवर्सिटी का टॉप 100 में आना ममता बनर्जी के हार्वर्ड ड्रीम से कहीं भी मेल नहीं खाता है।
असम?
पश्चिम बंगाल के साथ-साथ पड़ोसी राज्य असम में भी चुनाव हो रहे हैं। इस राज्य में भी हायर एजुकेशन के संस्थानों की स्थिति बंगाल से कुछ अच्छी नहीं है। हालांकि, असम सरकार ने 2021 से 2026 के बीच हायर एजुकेशन के क्षेत्र में तेजी से विस्तार करते हुए 10 नई यूनिवर्सिटी स्थापित की हैं, जिनमें से 7 प्रमुख कॉलेजों को यूनिवर्सिटी का दर्जा दिया गया है। NIRF रैंकिंग में स्टेट यूनिवर्सिटी की बात करें तो असम की भी सिर्फ 2 ही यूनिवर्सिटी को टॉप 100 में जगह दी गई है। इसमें गुवाहटी यूनिवर्सिटी (रैंक 9) और डिब्रूगढ़ यूनिवर्सिटी (रैंक 30) शामिल हैं।
एजुकेशन में तमिलनाडु की स्थिति?
तमिलनाडु में दिल्ली के बाद देश की सबसे ज्यादा टॉप रैंकिंग यूनिवर्सिटी शामिल हैं। NIRF की स्टेट पब्लिक यूनिवर्सिटी की रैंकिंग के अनुसार, तमिलनाडु की 10 यूनिवर्सिटी इसी कैटेगरी में इंडिया की टॉप 100 यूनिवर्सिटी में शामिल हैं। इसके साथ ही तमिलनाडु में हायर एजुकेशन में नामांकन करवाने वाले छात्रों का अनुपात देश में सबसे ज्यादा है। हालांकि, सरकारी कॉलेजों और यूनिवर्सिटी में शिक्षकों के हजारों पद खाली हैं। मौजूदा सरकार पर स्थायी भर्ती ना करने के आरो लगते रहे हैं। इसके साथ ही सरकार और गर्वनर के विवाद के कारण राज्य की कई यूनिवर्सिटी बिना कुलपति के चल रही हैं।
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केरल
दक्षिण भारत के एक दूसरे राज्य केरल में भी इन राज्यों के साथ चुनाव होने हैं। केरल को भारत की हायर एजुकेशन का मॉडल माना जाता है। राज्य में 16 से ज्यादा यूनिवर्सिटी और 1000 से ज्यादा कॉलेज हैं। NIRF की स्टेट पब्लिक यूनिवर्सिटी की रैंकिंग के अनुसार, केरल की 4 यूनिवर्सिटी इस कैटेगरी में टॉप 100 में शामिल हैं। हालांकि, इन संस्थानों में भी शिक्षा की गुणवत्ता पर सवाल उठते रहे हैं। केरल के छात्र बेहतर अवसरों और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा की तलाश में बेंगलुरु, दिल्ली जैसे शहरों या विदेशों में जा रहे हैं, जो राज्य के लिए एक चिंताजनक विषय बन गया है।
पुडुचेरी में भी इन चार राज्यों के साथ चुनाव हैं लेकिन एक केंद्र शासित प्रदेश होने के कारण यहां केंद्रीय संस्थान ज्यादा है। हालांकि, राज्य में कई टॉप एजुकेश इंस्टीट्यूट्स मौजूद हैं। JIPMER जैसे राष्ट्रीय स्तर के प्रमुख संस्थान राज्य में मौजूद हैं।
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