केरल में इस बार किन मुद्दों पर चुनाव लड़ रहे हैं LDF, UDF और NDA?
केरल चुनाव में इस बार लेफ्ट डेमोक्रेटिक फ्रंट और यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट के साथ में एनडीए के मुद्दे अलग हैं, जिन्हें लेकर वह जनता के बीच जा रही हैं।

केरल विधानसभा चुनाव। Photo Credit- PTI
केरल में विधानसभा चुनाव 2026 के लिए सत्ताधारी और विपक्षी पार्टियों के गठबंधनों ने प्रचार में अपनी ताकत झोंक दी है। चुनाव के लिए 9 अप्रैल को मतदान डाले जाएंगे। इस बार राज्य में मुख्य मुकाबला LDF (CPI(M) के नेतृत्व वाले वाम मोर्चा), UDF ( कांग्रेस के नेतृत्व वाले संयुक्त लोकतांत्रिक मोर्चा) और बीजेपी ने नेतृत्व वाले एनडीए के बीच त्रिकोणीय हो गया है। हालांकि, केरल में एनडीए उस लिहाज से मजबूत नहीं है, जैसी मजबूत अन्य राज्यों में है। हालांकि, बीजेपी धीरे-धीरे केरल में अपने विस्तार को स्वरूप जरूर दे रही है। ऐसे में एडीएफ और यूडीएफ के बीच चुनाव मुकाबला माना जा रहा है।
लेफ्ट डेमोक्रेटिक फ्रंट और यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट के साथ में एनडीए अपनी-अपनी विचारधारा और काम करने के तरीकों से लोगों को अपने पक्ष में करने की कोशिश कर रहे हैं। ऐसे में हर पार्टी और तीनों गठबंधन के मुद्दे अलग हैं। इस खबर में आइए जानते हैं कि केरल में इस बार लेफ्ट डेमोक्रेटिक फ्रंट, यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट और एनडीए किन मुद्दों पर चुनाव लड़ रहे हैं। साथ ही यह भी जानेंगे कि पार्टियों का फोकस किन बातों पर है...
लेफ्ट डेमोक्रेटिक फ्रंट (LDF) के मुद्दे
सबसे पहले लेफ्ट डेमोक्रेटिक फ्रंट की बात करते हैं। एलडीएफ की अगुवाई सीपीआई (एम) कर रही है। इसमें सीपीआई, केरल कांग्रेस (एम), इंडियन सोशलिस्ट जनता दल, एनसीपी (शरद पवार), इंडियन नेशनल लीग, कांग्रेस (सेक्युलर), केरल कांग्रेस (बी), लोकतांत्रिक जनता दल, NSC और आरजेडी शामिल हैं। 140 सीटों वाली विधानसभा के लिए हो रहे चुनावों में सीपीएम सबसे ज्यादा 81 और सीपीआई 25 सीटों पर चुनाव लड़ रही है। केरल कांग्रेस (एम) 12 और एनपीसी-आरजेडी 3-3 सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारे हैं।
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ये सभी पार्टियां लगभग एक समान विचारधारा रखने वाली हैं। क्योंकि केरल में एलडीएफ की पिछले 10 सालों से सरकार है, इसलिए इसमें शामिल सभी दल सरकार द्वारा पिछले 10 सालों में किए गए कामों को गिरवा रहे हैं। साथ ही सभी दल कांग्रेस और केंद्र की मोदी सरकार को लेकर भी उन्हें घर रही हैं।
केंद्र vs राज्य
लेफ्ट डेमोक्रेटिक फ्रंट केंद्र की मोदी सरकार पर केरल को वित्तीय रूप से दबाने, कर्ज सीमा, फंड रोकने का आरोप लगा रही है। यूडीएफ भी केंद्र की नीतियों CAA/NRC आदि को मुद्दा बना रही है। कुल मिलाकर एलडीएफ प्रदर्शन कल्याण और विकास पर वोट मांग रही है।
सत्तारूढ़ लेफ्ट डेमोक्रेटिक फ्रंट के मुख्य मुद्दे
मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन अपने पिछले 10 साल में किए गए कामों को कामों गिनवा रहे हैं। यही गठबंधन का मुद्दा है। इसमें- लोगों की बढ़ाई हुई पेंशन, राज्य में पहले से बेहतर हुई स्वास्थ्य सेवाएं, शिक्षा, बुनियादी ढांचा और 'नवा केरलम' विजन सबसे खास हैं। इसके अलावा केरल में सामाजिक कल्याण के क्षेत्र में किए गए सरकार के काम, सार्वजनिक स्वास्थ्य को बेहतर करने की दिशा में बढ़ाए गए कदम और राज्य में आए निवेश को बढ़ावा देने पर जोर दिया जा रहा है। इन मुद्दों के साथ में सत्तारूढ़ गठबंधन तीसरी बार केरल की सत्ता में वापसी करने पर मेहनत कर रहा है।
यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट (UDF) के मुद्दे
यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट की अगुवाई कांग्रेस कर रही है, जो केरल की सत्ता से पिछले 10 साल से बाहर है। यह चुनाव बेहद अहम माना जा रहा है क्योंकि एलडीएफ एक दशक से सत्ता में है जबकि यूडीएफ वापसी की कोशिश में जुटा है। एनडीए भी राज्य में अपनी स्थिति मजबूत करने का दावा कर रहा है लेकिन विपक्ष इसे गंभीर चुनौती नहीं मान रहा।
कांग्रेस ने सीपीआई-एम के नेतृत्व वाली वामपंथी सरकार पर पक्षपात और भ्रष्टाचार का आरोप लगा रही है। ऐसे में यूडीएफ भ्रष्टाचार, वायनाड में भूस्खलन में अनियमितता, राज्य में बढ़ता अपराध, नौकरी की कमी, गुपचुप तरीके से नियुक्तियां जैसे मुद्दे हैं। विपक्ष राज्य में बढ़ती बेरोजगारी, युवा पलायन और आर्थिक संकट, को भी मुद्दा बना रहा है। कई युवा केरल छोड़ रहे हैं। यह सभी पार्टियों के लिए बड़ा मुद्दा है, लेकिन UDF इसे एलडीएफ सरकार की नाकामी बताकर उठा रही है।
सबरीमाला मंदिर में महिलाओं के प्रवेश का पुराना विवाद, मंदिर से गोल्ड चोरी का मुद्दा अभी बड़ा हो गया है। यूडीएफ और एनडीए दोनों इसे भ्रष्टाचार औक सांप्रदायिक कोण से उठा रहे हैं। राहुल गांधी ने जोरदार तरीके से उठाया है। इसके अलावा गठबंधन ने इसके अलावा बुजुर्गों की पेंशन बढ़ाकर 3000 तक बढ़ाने, लड़कियों को 1000 का मासिक भत्ता, युवाओं को ब्याज-मुक्त 5 लाख तक लोन, बुजुर्गों के लिए अलग विभाग, महिलाओं को KSRTC बस में मुफ्त यात्रा और हर परिवार को 25 लाख रुपये तक का स्वास्थ्य बीमा जैसे वादे किए हैं।
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इन्हीं मुद्दों और वादों के जरिए यूडीएफ केरल की सत्ता में आने का प्रयास कर रही है।
एनडीए में कौन से मुद्दे हैं?
केरल में एनडीए की सबसे बड़ी पार्टी बीजेपी है। बीजेपी अब तक कुल दो लिस्ट जारी करके 86 उम्मीदवार उतार चुकी है। भारत धर्म जन सेना (BJDS) अभी तक 23 उम्मीदवार उतार चुकी है। वहीं, ट्वेंटी-ट्वेंटी पार्टी अभी तक 12 उम्मीदवार उतार चुकी है। इस तरह इन तीन दलों ने 111 सीटों पर उम्मीदवार उतारे हैं। केरल कामराज कांग्रेस, AIADMK और JSS भी इस गठबंधन का हिस्सा हैं और उन्हें भी एनडीए में कुछ सीटें दी गई हैं।
बीजेपी हिंदुत्व के मुद्दे के साथ ही विकासपरक राजनीति पर फोकस कर रही है। वह LDF-UDF की पुरानी द्विध्रुवीय राजनीति को चुनौती दे रही है। त्रिशूर और तिरुवनंतपुरम जैसे जिलों में दोनों धड़ों को झटका देने के लिए काम कर रही है। बीजेपी काफी समय से केरल में तीसरा विकल्प बनने की कोशिश में है। पार्टी पूरे दमखम से LDF-UDF की मिलीभगत को मुद्दा बना रही है। इसके अलावा एनडीए केरल में सरकारी कर्मचारियों के DA और छुट्टियों के बकाया भुगतान, कांग्रेस और लेफ्ट के ऊपर भ्रष्टाचार, राजनीतिक हिंसा को लेकर भी बड़ा मुद्दा बना रही है।
हालांकि, तीनों गठबंधनों के मेनिफेस्टो अभी पूरी तरह से जारी नहीं हुए हैं लेकिन सभी वादे ज्यादातर कल्याण, रोजगार और विकास के इर्द-गिर्द घूम रहे हैं।
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