पश्चिम बर्धमान: TMC के गढ़ में BJP कहां ठहरती है?
पश्चिम बर्धमान जिले में बीजेपी कमजोर स्थिति में है। क्या 2026 में बीजेपी के हालात बदलेंगे, आइए टटोलते हैं।

पश्चिम बदर्धमान जिला विधानसभा चुनाव। Photo Credit: Khabar
पश्चिम बंगाल का पश्चिम बर्धमान जिला, राज्य के सबसे नए जिलों में से एक है। यह राज्य के कमाऊ जिलों में शुमार है। यहां कई उद्योग और खनन केंद्र हैं, जो स्थानीय लोगों को रोगजार के बड़े मौके देते हैं। 7 अप्रैल, 2017 को इस जिले की नींव पड़ी है। यह राज्य का 23वां जिला है। शहर का इतिहास भी पुराना है। लोग, शहर के नाम को 24वें जैन तीर्थांकर वर्धमान से जोड़कर देखते हैं। गंगा के मैदानी हिस्से में बसे इस शहर की सियासत भी अलग है। जिले का मुख्यालय आसनसोल है।
राजनीतिक नजरिए से पश्चिम बर्धमान, कभी वामपंथी पार्टियों का गढ़ रहा। 2011 के बाद तृणमूल कांग्रेस ने दमदबा दिखाया और बीजेपी ने जोर आजमाइश की कोशिश की। बीजेपी एक बार यहां हाशिए पर है, टीएमसी मजबूत स्थिति में है। बीजेपी विधानसभा चुनावों में दम दिखाने की कोशिश कर रही है।
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जिले की सियासत पर एक नजर
जिले में 2 लोकसभा सीटें हैं। पहली सीट आसनसोल है दूसरी सीट बर्धमान दुर्गापुर है। आसनसोल से TMC के सांसद शत्रुघ्न सिन्हा, बर्धमान दुर्गापुर से तृमणूल कांग्रेस के सांसद कीर्ति आजाद झा। राज्य में 9 विधानसभा सीटें हैं। 3 विधानसभाओं पर भारतीय जनता पार्टी काबिज है, 6 विधानसभा में तृणमूल कांग्रेस का दबदबा है। कांग्रेस यहां हाशिए पर है। आसनसोल में 2 तहसील हैं। आसनसोल सदर और दुर्गापुर संभाग। जिले में 8 ब्लॉक हैं। 2 नगर निगम और 62 ग्राम पंचायतें भी हैं।
2021 में क्या हुआ था?
जिले की 9 विधानसभा सीटों में से 6 पर तृणमूल कांग्रेस को जीत मिली, 3 सीटों पर भारतीय जनता पार्टी। वाम दलों और कांग्रेस का यहां बुरा हाल है। जिले का सबसे बड़ा फैक्टर, ममता बनर्जी का चेहरा है। भारतीय जनता पार्टी, शहरी क्षेत्रों में दबबा बढ़ाने की कोशिश की लेकिन कामयाबी नहीं मिल पाई।
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विधानसभा सीटों का इतिहास
पांडाबेश्वर विधानसभा में साल 2011 में अस्तित्व में आई थी। CPI (M) के गौरंग चटर्जी ने तृणमूल कंग्रेस के जहीर आलम को हरा दिया था। 2016 में यहां TMC ने CPI (M) को हराकर यह सीट हासिल की। TMC के जितेंद्र तिवारी यहां से जीते। 2021 में उन्होंने पाला बदला और बीजेपी में चले ग 2021 में तृणमूल कांग्रेस ने एक बार फिर यहां से जीत दर्ज की। यहां से नरेंद्र नाथ चक्रवर्ती विधायक हैं।
दुर्गापुर पूर्व विधानसभा लेफ्ट का गढ़ रही है। 1962 का पहला चुनाव तो कांग्रेस जीती लेकिन बाद के चुनावों में 1971 तक, CPI (M) जीतते रहे। 2011 में पहली बार TMC ने CPI के गढ़ में सेंध लगाया, 2016 में यह सीट फिर CPI (M) ने हासिलकर ली। 201 के चुनाव में TMC ने वापसी की और प्रदीप मजूमदार विधायक बने।
दुर्गापुर पश्चिम विधानसभा भी CPI का गढ़ रही है। 977 से लेकर 2006 तक, यहां लेफ्ट की तूती बोलती रही। 2011 में तृणमूल कांग्रेस के टिकट पर पहली बार अपूर्ब मुखर्जी जीते, 2016 में कांग्रेस के बिश्वनाथ परीलाल ने बाजी मारी, 2021 में लक्ष्मण चंद्र घोरुई, बीजेपी के टिकट पर जीते।
रानीगंज विधानसभा भी लेफ्ट का गढ़ रही है। 1962 से 2006 तक, यहां सिर्फ लेफ्ट के विधायक जीतते रहे। 2011 में TMC के अली सोहराब चुनाव जीते। 2016 में यह सीट, CPI की रेणू दत्ता ने हासिल कर ली। 2021 में तापस बनर्जी ने इस सीट से जीत हासिल की। वह टीएमसी से हैं।
जमुरिया विधानसभा पर कांग्रेस और सोशलिस्ट दलों को शुरुआत में जीत मिली, बाद में सीटें लेफ्ट का सुरक्षित गढ़ बन गईं। 1977 से लेकर 2016 तक, लगातार लेफ्ट यहां जीतती रही, 2021 में जाकर TMC की सेंध लगी, हरेराम सिंह यहां से विधायक हैं।
आसनसोल दक्षिण विधानसभा, कभी कांग्रेस के खाते में गई, कभी लेफ्ट की। यह CPI की सुरक्षित सीट कही जाती रही। 1951 से लेकर 2006 तक ऐसा सिलसिला चलता रहा। 2011 और 2016 के चुनाव में तापस बनर्जी ने यहां से जीत हासिल की। अग्निमित्रा पॉल ने 2021 में बीजेपी के टिकट पर यहां से जीत दर्ज की।
आसनसोल उत्तर विधानसभा में भी कभी कांग्रेस का पलड़ा भारी रहा, कभी लेफ्ट का। 1951 से लेकर 2006 तक, कभी लेफ्ट, कभी कांग्रेस यहां से जीतती रही। 2011, 2016 और 2021 के चुनाव में मलय घटक को जीत मिली। वह टीएमसी नेता हैं।
कुल्टी विधानसभा पर लेफ्ट, फॉरवर्ड ब्लॉक और लेफ्ट का असर रहा है। सबसे मजबूत स्थिति में फॉरवर्ड ब्लॉक रहा। साल 1991 से 2001 तक, फॉरवर्ड ब्लॉक, फिर 2006 से 2016 तक TMC का राज रहा।
बराबनी विधानसभा में पहली बार 1962 में चुनाव हुए थे। CPI के विधायक हरीदास चक्रवर्ती यहां से जीते थे। तब से लेकर 2006 तक, कभी लेफ्ट, कभी कांग्रेस का दबदा रहा। 2011, 2016 और 2021 के चुनाव में यहां से TMC के दिग्गज नेता बिधान उपाध्याय लगातार जीत रहे हैं।
जिले की स्थिति
क्षेत्रफल- 1,603 वर्ग किलोमीटर
साक्षरता दर- 78.75%
विधानसभा सीटें- 9
नगर निगम- 2
ब्लॉक- 8
ग्राम पंचायत- 62
गांव- 316
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