मुर्शिदाबाद जिला: सबसे ज्यादा मुस्लिम आबादी, क्या TMC को टक्कर दे पाएगी BJP?
पश्चिम बंगाल के सबसे ज्यादा मुस्लिम आबादी वाले मुर्शिदाबाद जिले में 2021 के विधानसभा चुनाव में ममता बनर्जी की पार्टी को बढ़त मिली थी। जिले की 22 में से 20 सीटों पर टीएमसी और 2 सीटों पर बीजेपी की जीत हुई थी। इस बार इन सीटों पर कांटे की टक्कर होने की संभावना है।

मुर्शिदाबाद जिला, Photo Credit: Khabargaon
पश्चिम बंगाल का मुर्शिदाबाद जिला राज्य के सबसे ऐतिहासिक और राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण जिलों में से एक माना जाता है। यह जिला बांग्लादेश के इंटरनेशल बोर्डर से सटा हुआ है और ऐतिहासिक रूप से बंगाल की सत्ता और व्यापार का प्रमुख केंद्र रहा है। यह जिला न सिर्फ अपने नवाबी इतिहास के लिए प्रसिद्ध है, बल्कि आज भी बंगाल की राजनीति में इसकी अहम भूमिका बनी हुई है। पूर्व में इसकी सीमा बांग्लादेश से लगती है, पश्चिम में वीरभूम और पूर्व बर्दवान जिलों से, उत्तर में मालदा और दक्षिण में नदिया जिले से इसकी सीमाएं मिलती हैं।
मुर्शिदाबाद का नाम नवाब 'मुर्शिद कुली खान' के नाम पर पड़ा, जिन्होंने 18वीं सदी की शुरुआत में इसे बंगाल की राजधानी बनाया था। 18वीं सदी में यह भारत के सबसे समृद्ध और विकसित क्षेत्रों में गिना जाता था। यह जिला प्राचीन समय से ही प्रशासनिक, आर्थिक और सांस्कृतिक गतिविधियों का एक प्रमुख केंद्र रहा है। मुर्शिदाबाद जिला भागीरथी नदी के किनारे स्थित है और यह नदी इसे दो हिस्सों में बांटती है। यह जिला सड़क और रेल के जरिए कोलकाता और उत्तर बंगाल के अन्य हिस्सों से जुड़ा हुआ है। इससे इस जिले का आर्थिक महत्व और भी ज्यादा बढ़ जाता है।
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मुर्शिदाबाद का इतिहास
मुर्शिदाबाद का इतिहास बेहद गौरवशाली रहा है। 18वीं सदी में यह बंगाल, बिहार और उड़ीसा की राजधानी हुआ करता था। नवाब मुर्शिद कुली खान ने 1704 के आसापसा ढाका से हटाकर मुर्शिदाबाद को राजधानी बनाकर इसका नाम मुर्शिदाबाद रखा। यह जिला नवाबों के शासन में काफी समृद्ध हुआ और व्यापार और उद्योग का प्रमुख केंद्र बना। इस जिले के इतिहास में एक बड़ा मोड़ उस समय आया जब बंगाल के नवाब सिराजुद्दौला थे। ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी और नवाब सिराजुद्दौला के बीच 1757 की प्लासी की ऐतिहासित लड़ाई हुई। इस युद्ध में सिराजुद्दौला को मीर जाफर के कारण हार का सामना करना पड़ा। इस युद्ध के बाद यहां ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी का राज स्थापित हो गया था।
प्लासी के युद्ध के बाद मुर्शिदाबाद का महत्व धीरे-धीरे कम होने लगा। अंग्रेजों ने अपनी प्रशासनिक और आर्थिक गतिविधियों का केंद्र कोलकाता को बना लिया। हालांकि, मुर्शिदाबाद नवाबों का औपचारिक निवास स्थान बना रहा और यहां नवाबी संस्कृति और परंपराएं जारी रहीं। इसी दौर में कई ऐतिहासिक इमारतें जैसे हजारद्वारी पैलेस और निजामत इमामबाड़ा को भी बनाया गया।
मौजूदा प्रशासनिक व्यवस्था
मौजूदा समय में मुर्शिदाबाद पश्चिम बंगाल का एक महत्वपूर्ण जिला है। यहां बहरामपुर, लालबाग, कांडी, जंगीपुर और डोमकल को मिलाकर कुल 5 सब डिवीजन हैं। इस जिले में कुल 26 ब्लॉक हैं, जिनमें बहारामपुर, बेलडांगा-1, बेलडांगा-2, कांडी, भरतपुर-1, भरतपुर-2, जंगीपुर, रघुनाथगंज-1, रघुनाथगंज-2, फरक्का, सामसेरगंज, सूती-1, सूती-2, ललगोला, भगवांगोला-1, भगवांगोला-2, डोमकल, रानीनगर-1, रानीनगर-2 जैसे कई प्रमुख ब्लॉक शामिल हैं।
धार्मिक स्थल - मुर्शिदाबाद जिले में कई प्रसिद्ध धार्मिक और ऐतिहासिक स्थल हैं, जिनमें हजारद्वारी पैलेस, कात्रा मस्जिद, निजामत इमामबाड़ा, कटरा मस्जिद, जैन मंदिर शामिल हैं। यह जिला हिंदू, मुस्लिम और जैन धर्मों के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है।
सामाजिक ताना-बाना
साल 2011 की जनगणना के अनुसार, मुर्शिदाबाद पश्चिम बंगाल का सबसे ज्यादा आबादी वाला जिला है। इस जिले की कुल जनसंख्या लगभग 71 लाख है।
- पुरुष – लगभग 36 लाख
- महिलाएं – लगभग 35 लाख
- लिंगानुपात – 1000 पुरुषों पर 958 महिलाएं
- साक्षरता दर – लगभग 66.59 प्रतिशत
- मुस्लिम – लगभग 66 प्रतिशत
- हिंदू – लगभग 33 प्रतिशत
- प्रमुख भाषा – बंगाली
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मुर्शिदाबाद जिले की राजनीति
मुर्शिदाबाद जिला राजनीतिक रूप से बेहद अहम माना जाता है। इस जिले में 3 लोकसभा सीटें (बहरामपुर, मुर्शिदाबाद और जंगीपुर) और 22 विधानसभा सीटें हैं। विधासनभा सीटों में भगवांगोला, रानीनगर, मुर्शिदाबाद, नवग्राम (एससी), खारग्राम (एससी), बहरामपुर, फरक्का, समसेरगंज, सूती, जंगीपुर, रघुनाथगंज, सागरदिघी, लालबाग, डोमकल, जलंगी, हरिहरपाड़ा, बुरवान और कांडी विधानसभा क्षेत्र शामिल हैं।
यह जिला लंबे समय तक कांग्रेस का गढ़ माना जाता रहा है। इस जिले के बहरामपुर क्षेत्र पर तो 2024 तक कांग्रेस का अच्छा खासा दबदबा रहा है। इसी लोकसभा सीट से कांग्रेस के दिग्गज नेता अधीर रंजन चौधरी लोकसभा पहुंचते थे। हालांकि, 2024 के लोकसभा चुनावों में उन्हें हार का सामना करना पड़ा था। पिछले कुछ सालों से तृणमूल कांग्रेस ने यहां अपनी पकड़ मजबूत की है और कई सीटों पर जीत दर्ज की है।
2011 के चुनाव में इस जिले की 22 सीटों में से 12 सीटों पर कांग्रेस को जीत मिली थी और लेफ्ट फ्रंट को 10 सीटों पर जीत मिली थी। 2011 में कांग्रेस ने टीएमसी के साथ मिलकर चुनाव लड़ा था लेकिन मात्र 5 साल में राज्य की राजनीति इतनी बदल गई कि लंबे समय से विरोधी रहे कांग्रेस और लेफ्ट फ्रंट के बीच गठबंधन हो गया। 2016 के विधानसभा चुनाव में टीएमसी ने इस जिले में भी एंट्री कर ली। कांग्रेस (14) और लेफ्ट (4) को कुल 22 में से 18 सीटों पर जीत मिली। वहीं ममता बनर्जी की पार्टी को 4 सीटों पर जीत मिली।
2021 चुनाव में क्या हुआ था?
2021 के विधानसभा चुनाव में इस जिले की राजनीति में एक टर्निंग प्वाइंट आया। ममता बनर्जी की पार्टी ने कांग्रेस के इस गढ़ में भी सेंधमारी कर दी। टीएमसी को अल्पसंख्यक समुदाय का समर्थन मिला था। बंगाल के अन्य जिलों में मजबूत उपस्थिति दर्ज करवाने के बावजूद बीजेपी इस जिले में उपस्थिति दर्ज नहीं करवा पाई। टीएमसी को 22 में से 20 सीटों पर जीत मिली और बीजेपी को 2 सीटों पर जीत मिली। इसके साथ ही इस जिले में बीजेपी ने अपना खाता खोला। मुर्शिदाबाद विधानसभा से बीजेपी के गौरी संकर घोष और बहरामपुर विधानसभा सीट से बीजेपी के सुब्रत मैत्रा कंचन ने जीत दर्ज की थी।
2024 लोकसभा चुनाव
2024 के लोकसभा चुनाव में इस जिले में जबरदस्त मुकाबला देखने को मिला। इस जिले में मुकाबला बीजेपी, कांग्रेस और टीएमसी के बीच था। इस मुकाबले में कांग्रेस को बहुत बड़ा झटका लगा और पार्टी के दिग्गज नेता अधिक रंजन चौधरी की बहरामपुर सीट से हार हो गई। इसके साथ ही इस जिले से कांग्रेस पूरी तरह हाशिए पर चली गई। जिले की तीनों सीटों पर टीएमसी ने जीत दर्ज की।
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मुर्शिदाबाद एक नजर में
- क्षेत्रफल – 5,324 वर्ग किलोमीटर
- जनसंख्या – 71 लाख
- साक्षरता दर – 66.59 प्रतिशत
- लोकसभा सीटें – 3
- विधानसभा सीटें – 22
- ब्लॉक – 26
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