पश्चिम बंगाल के विधानसभा चुनाव की शुरुआत में भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के नेता हाथ में मछली लेकर घूमते दिखे थे। वोट मांगते नेताओं के हाथ में लटकती मछली चर्चा का विषय बनी थी। यही मछली अब खाने की प्लेट तक आ गई है और बीजेपी के नेता अब कैमरे के सामने मछली खाते दिख रहे हैं। बीजेपी के सांसद और पूर्व केंद्रीय मंत्री अनुराग ठाकुर का मछली खाने का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया है। अनुराग ठाकुर बार-बार बता भी रहे हैं कि जहां बीजेपी की सरकारें हैं, वहां मछली या मांस खाने पर रोक नहीं है और बंगाल में उनकी सरकार बनेगी तब भी ऐसा ही होगा। तृणमूल कांग्रेस के आरोपों और बीजेपी के सफाई देने के अंदाज से पता चल रहा है कि पश्चिम बंगाल में मछली बहुत अहम हो चुकी है।
अब पश्चिम बंगाल में पहले चरण की वोटिंग से पहले चुनाव का मुख्य मुद्दा मछली बनता दिख रहा है। इसकी शुरुआत बीजेपी के उम्मीदवार कौस्तभ बागची ने की थी और वह हाथ में मछली लेकर डोर टू डोर कैंपेन करते दिखे थे। वह बैरकपुर से विधानसभा का चुनाव लड़ रहे हैं और लोगों को यह दिखाने की कोशिश कर रहे थे कि वह यहीं के हैं और लोगों के बीच के ही हैं। कौस्तभ बागची के बाद कई अन्य बीजेपी नेताओं ने भी यही तरीका अपनाया और देखते ही देखते तालाब और नदी की मछली ने राजनीति की टेबल से खाने की टेबल तक अपनी जगह बना ली।
राजनीति का केंद्र क्यों बनी मछली?
चुनावी माहौल में अपनी विरोधी बीजेपी को घेरने के लिए तृणमूल कांग्रेस की मुखिया और पश्चिम बंगाल की सीएम ममता बनर्जी ने आरोप लगाए थे कि अगर बीजेपी पश्चिम बंगाल की सत्ता में आती है तो वह मांस, अंडा और मछली खाने पर रोक लगा देगी। ममता बनर्जी बीजेपी को लगातार बाहरी बताती रही हैं और आरोप लगाती हैं कि वह बंगाल के मतदाताओं को बांटने और स्थानीय परंपराओं को कमजोर करने की कोशिश कर रही है। ममता बनर्जी की यह बात असर करती दिखी तो बीजेपी ने इसका काउंटर शुरू कर दिया।
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पश्चिम बंगाल में बीजेपी के बड़े नेताओं सुवेंदु अधिकारी और सुकांता मजूमदार ने भी 'माछ भात' खाकर दिखाया। देखते ही देखते यह मामला और गर्म होता गया। बीजेपी नेता अनुराग ठाकुर भी बुधवार को माछ भात खाते दिखे। अनुराग ठाकुर ने ममता बनर्जी के आरोपों को झूठा बताते हुए कहा कि 15-16 राज्यों में बीजेपी की सरकार है लेकिन कहीं पर भी मीट, अंडा या मछली खाने पर बैन नहीं है और ना ही बंगाल में ऐसा होगा। यह मामला यहीं तक नहीं रुका। ममता बनर्जी ने तंज कसते हुए यह भी कहा कि अगर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी मछली खाना चाहते हैं तो वह खुद पका देंगी।
मछली पॉलिटिक्स में किसका फायदा?
पश्चिम बंगाल में अपनी जगह बनाने में जुटी बीजेपी इस बार खुद को बंगाल की पार्टी दिखाने पर जोर दे रही है। यही वजह है कि हर सीट और हर जिले में वह स्थानीय मुद्दों को हथियार बनाकर चुनाव लड़ चुकी है। बीजेपी को इतना तो समझ आ गया है कि अगर ममता बनर्जी बंगाली संस्कृति और बंगाली अस्मिता के नाम पर अपने पक्ष में माहौल बनाने में कामयाब हो गईं तो बीजेपी को भारी नुकसान हो सकता है। अब तक यह देखा गया है कि हर बार ममता बनर्जी बीजेपी पर भारी पड़ी हैं इसीलिए बीजेपी किसी भी मोर्चे पर चूकना नहीं चाहती है।
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लंबे समय से पश्चिम बंगाल में अपने पांव मजबूत किए बैठीं ममता बनर्जी की बंगाली वोटरों पर अच्छी पकड़ है और वह बंगाल की अस्मिता बनाम बाहरी लोग और बाहरी संस्कृति के एजेंडे को अपने पक्ष में बखूबी भुनाने में माहिर हैं। यही वजह थी कि मछली के काउंटर में पीएम मोदी झालमुड़ी खाते दिखे थे। बीजेपी के उम्मीदवारों का भी पूरा जोर इस बात पर रहा है कि वे खुद को लोगों के बीच का साबित कर पाएं।
ममता बनर्जी एक और आरोप लगाती हैं कि अगर बीजेपी जीतती है तो बाहरी लोगों के हाथ में कंट्रोल रहेगा। इसके जवाब में अमित शाह बार-बार कह रहे हैं कि बंगाल का अगला मुख्यमंत्री बंगाली बोलने वाला होगा और बंगाल में ही पैदा हुआ शख्स होगा।