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AIADMK को BJP का 'मोहरा' क्यों बता रही है DMK? इससे मिलेगा क्या?

डीएमके तमिलनाडु विधानसभा चुनाव में इस बार अन्नाद्रमुक को बीजेपी की कठपुतली बता रही है, ताकि उसे चुनाव में फायदा मिल सके।

AIADMK and BJP

प्रधानमंत्री मोदी के साथ एडप्पडी पलानीस्वामी। Photo Credit- PTI

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तमिलनाडु में विधानसभा चुनाव के लिए इसी महीने 23 अप्रैल को वोटिंग होनी है। मुख्य मुकाबला सत्तारूढ़ डीएमके और एआईएडीएमके के बीच है। हालांकि दोनों पार्टियां बड़े गठबंधन के बैनर लगे चुनाव लड़ रही हैं। इसके अलावा अभिनेता से नेता बने थलापति विजय की पार्टी तमिलगा वेट्टरी कझगम (TVK) के चुनाव रण में आने से मुकाबला त्रिकोणीय होता दिख रहा है। दरअसल, डीएमके ने कांग्रेस और अन्य क्षेत्रिय दलों के साथ मिलकर 'धर्मनिरपेक्ष प्रगतिशील गठबंधन' बनाया है। वहीं, AIADMK ने बीजेपी और अन्य दलों के साथ में एनडीए के बैनर तले लड़ रही है।

 

इन सबसे बीच मीडिया और सोशल मीडिया पर ऐसा देखने को मिल रहा है कि तमिलनाडु में AIADMK को बीजेपी निर्देश दे रही है। यही संदेश डीएमके भी जनता के बीच पहुंचा रही है।  वहीं, विजय और उनकी पार्टी टीवीके का भी पैटर्न देखने को मिल रहा है कि डीएमके के खिलाफ ही लड़ रहे हैं। ऐसे में डीएमके इस लाइल पर पूरी तरह से काम कर ही है कि तीनों विपक्षी दल मिलकर उसे हराने के लिए गुपचुप तरीके से काम कर रही हैं। ऐसे में आइए जानते हैं कि आखिर डीएमके, AIADMK को बीजेपी का 'मोहरा' क्यों बता रही है? इस कदम से डीएमके को क्या मिलेगा...

 

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रामदास अठावले के बयान से मिला इशारा

पिछले दिनों केंद्रीय मंत्री और आरपीआई के राष्ट्रीय अध्यक्ष रामदास अठावले ने एक ऐसा बयान दिया, जिससे डीएमके को इस बात को सच बताने में घी का काम कर गया कि AIADMK-टीवीके, बीजेपी के लिए काम कर रही है। अठावले ने घोषणा करते हुए कहा था कि एनडीए विजय के समर्थन से तमिलनाडु में सरकार बनाएगी। 

 

रामदास अठावले के इस बयान के बाद डीएमके समर्थित टीवी चैनल 'सन न्यूज' ने बयान को प्रमुखता से दिखाया। बयान को बार-बार दिखाया, ताकि यह तमिलनाडु की जनता में यह संदेश दिया जा सके कि अभिनेता की पार्टी टीवीके केवल परोक्ष रूप से एनडीए की मदद करने के लिए चुनावी मैदान में है।

जयललिता-पलानीस्वामी के नेतृत्व वाली AIADMK

दरअसल, डीएमके इस 2026 के चुनाव में इसी रणनीति पर काम कर रही है कि वह बीजेपी को एनडीए में सर्वे सर्वा बता दे। डीएमके पूर्व सीएम जे. जयललिता वाली AIADMK और वर्तमान मुखिया एडप्पडी पलानीस्वामी के नेतृत्व वाली AIADMK के बीच जनता के बीच अंतर स्पष्ट कर रही है। साथ ही पलानीस्वामी पर 'बीजेपी की कठपुतली' होने का आरोप लगा रही है।

 

स्टालिन किस काम में लगे हैं?

मुख्यमंत्री और डीएमके प्रमुख एमके स्टालिन और उनके मंत्री बेटे उदयनिधि स्टालिन लगभग अपनी हर रैली में जनता को बता रहे हैं कि कैसे एडप्पडी पलानीस्वामी और एनडीए के अन्य सभी नेताओं को केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के घर पर अपनी मौजूदगी दर्ज करानी पड़ी। इस कदम के पीछे डीएमके का मकसद बीजेपी को AIADMK का बड़ा भाई बताना है। हालांकि, अमित शाह राज्य में पलानीस्वामी को तमिलनाडु में एनडीए का मुखिया बता चुके हैं। साथ ही डीएमके यह भी बता रही है कि राज्य में एनडीए के अंदर सभी फैसले बीजेपी ही ले रही है। 

 

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दरअसल, एमके के स्टालिन और उनके सीनियर नेता अपनी रैलियों बार-बार इस बार को ऐसे ही नहीं बोल रहे हैं बल्कि इसके पीछे पार्टी की रणनीति काम कर रही है। तमिलनाडु की राजनीति उत्तर भारत से एकदम से अलग है। बीजेपी जो मुद्दे उत्तर भारत में उठाती है वह मुद्दे तमिलनाडु में काम नहीं करते। राज्य में द्रविड़ राजनीति, तमिल गौरव जैसे मुद्दे काम करते हैं।

इन सबसे DMK को हासिल क्या होगा?

यही वजह है कि डीएमके 2026 के चुनाव में बार-बार AIADMK के ऊपर बीजेपी के प्रभाव को दर्शा रही है। इस घेराबंदी के तहत डीएमके की पेश करने की कोशिश है, जिसमें मुकाबला डीएमके के नेतृत्व वाले 'तमिल गौरव' और एनडीए के नेतृत्व वाले 'दिल्ली के प्रभाव' के बीच दिखाया जा सके। साथ ही पलानीस्वामी को बीजेपी के कहने पर चलना वाले नेता के तौर पर पेश करके, डीएमके तमिलनाडु में हिंदी-विरोधी और हिंदुत्व-विरोधी भावनाओं का फायदा उठाने की कोशिश कर रही है। 


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