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तमिलनाडु में AIADMK-BJP में सबकुछ ठीक नहीं? अबतक नहीं हुई सीट शेयरिंग

तमिलनाडु में AIADMK-बीजेपी गठबंधन के बीच सबकुछ ठीक नहीं चल रहा है क्योंकि चुनावी तारीखों का ऐलान होने के बावजूद अभी तर सीट शेयरिंग नहीं हो सका है।

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और एडाप्पड़ी पलानीस्वामी।

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चुनाव आयोग ने तमिलनाडु विधानसभा के लिए चुनावी तारीखों का ऐलान कर दिया है। राज्य में 23 अप्रैल को वोटिंग होगी, जबकि 4 मई को नतीजे सामने आएंगे। तारीखों की घोषणा के बाद अब तमिलनाडु में सत्तारूढ और विपक्षी दल टिकट बंदवारे को अंतिम रूप दे रहे हैं। मुख्यमंत्री एमके स्टालिन की पार्टी डीएमके नेतृत्व वाले 'धर्मनिरपेक्ष प्रगतिशील गठबंधन' में लगभाग सीटें फाइनल हो गई हैं। 

 

सत्ताधारी दल वाले गठबंधन में उम्मीदवारों का ऐलान भी हो रहा है, लेकिन पिछले एक साल से गठबंधन करके बैठे AIADMK-बीजेपी अभी तक सीट शेयरिंग तक नहीं कर सके हैं। ऐसे में अटकलें लगाई जाने लगी है कि तमिलनाडु में AIADMK-BJP में सबकुछ ठीक नहीं चल रहा है। ऐसे में आइए जानते हैं कि आखिर इसकी वजह क्या है...

सीट-शेयरिंग को लेकर बना हुआ है गतिरोध

तमिलनाडु में AIADMK-बीजेपी के बीच गठबंधन पिछले साल 2025 में ही गृह मंत्री अमित शाह की मौजूदगी में हुआ था। इस समय AIADMK प्रमुख एडाप्पड़ी पलानीस्वामी और राज्य के लिए बीजेपी प्रभारी पीयूष गोयल भी मौजूद थे। दोनों दलों के बीच लगातार समन्वय के लिए बैठकें भी होती रही हैं, विधानसभा चुनावों के लिए सीट-शेयरिंग की औपचारिक बातचीत को लेकर दोनों पार्टियों के बीच अभी भी गतिरोध बना हुआ है।

 

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दरअसल, तमिलनाडु विधानसभा में 234 सीटें हैं। पिछले पांच साल पहले AIADMK राज्य की सत्ता पर काबिज थी, अब वह चुनाव में जीतकर फिर से सरकार बनाना चाहती है। ऐसे में एडाप्पड़ी पलानीस्वामी ज्यादा से ज्यादा सीटों पर चुनाव लड़कर अपनी स्थिती मजबूत रखना चाहते हैं। 

 

2024 लोकसभा चुनाव में मजबूत हुई बीजेपी

दूसरी तरफ बीजेपी की तमिलनाडु में स्थिती हमेशा से कमजोर रही है, मगर 2024 के लोकसभा चुनाव में 11 फीसदी वोट पाकर भगवा पार्टी चाहती है कि वह भी ज्यादा सीटों पर चुनाव लड़े। एनडीए में बात यहीं अटकी हुई है। AIADMK चाहती तो है कि बीजेपी के साथ चुनाव लड़कर सरकार में आए, लेकिन पार्टी यह नहीं चाहती कि बीजेपी राज्य में उससे अधिक मजबूत स्थिती में आए, ताकि उसे भविष्य में परेशानी हो।   

सीट-शेयरिंग की बातचीत का नेतृत्व कौन करेगा?

AIADMK और बीजेपी के बीच इस बात पर खींचतान हैं कि एनडीए में सीट-शेयरिंग की बातचीत का नेतृत्व कौन करेगा? इसी गठबंधन में एनडीए में शामिल पट्टाली मक्कल काची (PMK), अम्मा मक्कल मुनेत्र कड़गम (AMMK) और तमिल मनीला कांग्रेस (TMC) जैसे छोटे सहयोगियों के साथ बातचीत को लेकर भी सीट शेयरिंग पर बात नहीं बन पा रही है। 234 विधानसभा सीटों में से AIADMK अकेले 170 सीटों से अधिक पर अपने उम्मीदवार चाहती है।

 

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बीजेपी क्या चाहती है?

रिपोर्ट्स के मुताबिक, बीजेपी भी 40 प्लस सीटें चाहती है। AIADMK को लगता है कि बीजेपी ज्यादा सीटें माग रही है, इसलिए बीजेपी को 29 सीटें देने पर राजी है। इसी बात को लेकर दोनों के बीच बात नहीं बन पा रही है। इसके अलावा बीजेपी राज्य में एनडीए को बड़ा करने की कोशिश में है। इसमें बीजेपी छोटी पार्टियों जैसे TTV दिनकरन की AMMK, PMK, DMDK आदि को भी शामिल करना चाहती है ताकि वोट का बंटवारा ना हो सके और आगे भी एनडीए मजबूत रहे। साथ ही डीएमके के खिलाफ मजबूत मोर्चा बने सके, लेकिन AIADMK इसे पसंद नहीं कर रही क्योंकि इससे पार्टी में अस्थिरता आ सकती है और उनकी लीडरशिप कमजोर पड़ सकती है।

 

इसमें एक और अड़चन यह है कि बीजेपी थलापति विजय की पार्टी TVK को भी एनडीए में शामिल करना चाहती है। मीडिया रिपोर्ट्स में खबरें सामने आई हैं कि बीजेपी ने TVK को एनडीए में आने पर 80 प्लस सीटें और उप मुख्यमंत्री का पद ऑफर किया है। AIADMK इसका विरोध कर रही है। पार्टी का कहना है कि एक राज्य में दो किंग नहीं चल सकते। इन मुद्दों की वजह से सीट बंटवारा और जटिल हो गया है।


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