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'दर्द, त्रासदी, गर्व...,' इतिहास की टाइम मशीन बन गई है 'फ्रीडम एट मिडनाइट 2'

निखिल आडवाणी के निर्देशन बनी 'फ्रीडम एट मिडनाइट 2' सोनी लिव पर रिलीज हो चुकी है। सीरीज में क्या है, पढ़ें रिव्यू में।

Freedom  at Mid Night 2

फ्रीडम एट मिड नाइट सीजन 2 का पोस्टर। Photo Credit: Sony Live

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निर्देशक निखिल आडवाणी एक बार फिर भारतीय इतिहास के सबसे संवेदनशील अध्याय को OTT पर लेकर आए हैं। उनकी वेब सीरीज 'फ्रीडम एट मिडनाइट 2' का सीजन 2 नौ जनवरी से सोनी लिव पर स्ट्रीम हो रहा है। सीजन को लेकर दर्शकों में पहले से ही जबरदस्त उत्साह देखने को मिल रहा था। 

सीजन 1 में जहां भारत-पाकिस्तान विभाजन तक की कहानी दिखाई गई थी, वहीं सीजन 2 आजादी के बाद देश के दर्दनाक परिणामों पर फोकस किया गया। यह सीरीज उस इतिहास को जीवित करती है जिसे अब तक लोगों ने केवल किताबों के पन्नों में पढ़ा था।

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आजादी के बाद का संघर्ष और बंटवारे का दर्द

'फ्रीडम एट मिडनाइट 2' की शुरुआत साल 1947 से होती है, जब अंग्रेज भारत छोड़ने की तैयारी कर रहे थे। कहानी में मोहम्मद अली जिन्ना और जवाहरलाल नेहरू के बीच हुए गंभीर राजनीतिक टकराव को दिखाया गया है। सीजन 2 में दिखाया गया है कि कैसे सरदार वल्लभ भाई पटेल और वीपी मेनन की जोड़ी ने स्वतंत्र 562 से ज्यादा रियासतों का विलय कराया था। कश्मीर के विलय की भी कहानी दिलचस्प ढंग से दिखाई गई है।  

इस सीजन का सबसे भावुक पहलू विभाजन के दौरान नेहरू और महात्मा गांधी के बीच बढ़ती वैचारिक दरार को दिखाना है। कहानी आगे चलकर 1947 के कश्मीर युद्ध, शरणार्थी संकट और लाखों लोगों के विस्थापन की त्रासदी को दिखाती है। सीरीज में महात्मा गांधी की हत्या को भी बेहद संवेदनशील तरीके से दिखाया गया है।

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दमदार अभिनय और सशक्त निर्देशन

सीरीज़ में सिद्धार्थ गुप्ता ने जवाहरलाल नेहरू, चिराग वोहरा ने महात्मा गांधी, राजेंद्र चावला ने सरदार वल्लभभाई पटेल की भूमिकाएं निभाई हैं। कलाकारों ने अपने दमदार अभिनय के जरिए स्वतंत्रता सेनानियों को मानो फिर से जीवित  कर दिया है, जिसे देख लोग भावुक हो उठते हैं।

इस सीरीज़ की सबसे बड़ी खासियत यह है कि दर्शक हर सीन में पूरी तरह डूब जाते हैं। हकीकत और ड्रामा के बीच का फर्क लगभग मिट जाता है। जब कहानी में खुशी का माहौल होता है तो दर्शक खुश होते हैं और जब दुख का दृश्य आता है तो वही पीड़ा महसूस करते हैं। मिसाल के तौर पर महात्मा गांधी की हत्या वाले सीन पर आपकी आंखों से आंसू निकल सकते हैं। 

किताब से सीरीज तक  का सफर

'फ्रीडम एट मिडनाइट 2' मशहूर लेखकों डोमिनिक लैपियर और लैरी कॉलिन्स की इसी नाम की किताब पर आधारित है। इस सीरीज़ की तुलना ब्रिटिश रॉयल फैमिली पर बनी फेमस सीरीज द क्राउन से भी की जा रही है, जिसने इतिहास को ड्रामा के जरिए दिखाने का नजरिया बदल दिया था।

क्यों देखें यह सीरीज?

निखिल आडवाणी ने बेहद बारीकी और संवेदनशीलता के साथ भारतीय इतिहास के उस दौर को दिखाया है, जिसने देश की दिशा और दशा तय की। शानदार निर्देशन, सटीक अभिनय और भावनात्मक गहराई की वजह से 'फ्रीडम एट मिडनाइट 2' सीजन 2 इतिहास प्रेमियों के लिए एक ज़रूर देखने वाली वेब सीरीज बन जाती है।

 

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