अमेरिका की शीर्ष लॉबिंग फर्म स्क्वायर पैटन बॉग्स (Squire Patton Boggs) ने साफ किया है कि भारत का दक्षिणपंथी संगठन राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) अब उसका क्लाइंट नहीं रहा। यह बयान खुद कंपनी ने दिया है। दरअसल, पिछले साल इस कंपनी को आरएसएस ने अमेरिका में लॉबिंग के लिए हायर किया था।
इस काम के लिए कंपनी को 2025 में $330,000 (2.75 करोड़ रुपये) का पेमेंट किया गया था। यह पहली बार था जब आरएसएस ने अमेरिका में किसी लॉबिंग एजेंसी को काम पर रखा था। अपने कदम पीछे खींचते हुए कंपनी ने कहा है कि उसे संघ के लिए लॉबिंग का काम आरएसएस ने नहीं बल्कि विवेक शर्मा नाम के शख्स ने दिया था। हालांकि, पहले RSS भी इस बात से इनकार कर चुका है कि उसने अमेरिका में किसी लॉबिंग कंपनी को अपने लिए हायर किया है।
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पूर्व अमेरिकी सांसद मुख्य लॉबिस्ट
29 दिसंबर को किए गए एक खुलासा में स्क्वॉयर पैटन बोग्स ने बताया कि उसका अनुबंध लक्ष्य राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ को अमेरिकी अधिकारियों से मिलवाना था। यह अनुबंध 30 सितंबर, 2025 को खत्म हो गया। इस लॉबिंग फर्म को स्टेट स्ट्रीट स्ट्रैटेजीज ने हायर किया था, जो One+ Strategies नाम से भी बिजनेस करती है, यह कंपनी जनवरी 2025 में आरएसएस के लिए लॉबिंग करने के लिए रजिस्टर हुई थी। पूर्व रिपब्लिकन कांग्रेसी बिल शस्टर इस अनुबंध से जुड़े एक मुख्य लॉबिस्ट थे।
प्रिज्म वेबसाइड ने किया था खुलासा
पिछले साल नवंबर में, अमेरिका वेबसाइड प्रिज्म ने रिपोर्ट किया था कि स्क्वॉयर पैटन बोग्स ने लॉबिंग खुलासे में साफ तौर पर कहा था कि उसे स्टेट स्ट्रीट स्ट्रैटेजीज ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की ओर से काम करते हुए हायर किया था। इन खुलासों को बाद में दिसंबर 2025 में यह दिखाने के लिए अनुबंध बदला गया कि स्टेट स्ट्रीट स्ट्रैटेजीज विवेक शर्मा की ओर से काम कर रही थी।
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प्रिज्म की रिपोर्ट बताती है कि लॉबिंग फर्म ने आरएसएस की ओर से अमेरिकी सांसदों और नीति निर्माताओं से संपर्क साधा और इसके इतिहास व ‘मिशन’ के बारे में जानकारी देने की कोशिश की। यही नहीं प्रिज्म को मिली जानकारी के मुताबिक, लॉबिंग फर्म के प्रतिनिधि नागपुर स्थित आरएसएस मुख्यालय और प्रशिक्षण शिविर का दौरा भी कर चुके हैं। उस दौरे को आरएसएस की पत्रिका ने ‘भारत-अमेरिका सिविल सोसाइटी संवाद का अहम क्षण’ बताया।
आरएसएस द्वारा पहली बार अमेरिका में एक लॉबिस्ट को हायर करने की रिपोर्टों से भारत में बड़ा सियासी विवाद हुआ था। कांग्रेस सांसद जयराम रमेश ने इस मामले पर जवाब देते हुए कहा, 'यह शायद ही पहली बार है जब आरएसएस ने देश के हितों के साथ धोखा किया है।'