बांग्लादेश में हिंदू अल्पसंख्यकों पर हमलों का सिलसिला जारी है। एक ताजा घटनाक्रम में 28 साल के हिंदू ऑटो चालक समीर दास की रविवार रात को क्रूर तरीके से हत्या कर दी गई। यह घटना चटगांव के डगनभुइयां इलाके में हुई।
हमलावरों ने समीर दास को पहले बुरी तरह पीटा और फिर चाकू मारकर उनकी हत्या कर दी। हत्या के बाद अपराधी उनके बैटरी वाले ऑटो-रिक्शा को चुराकर मौके से भाग गए। बांग्लादेश में धार्मिक भेदभाव के खिलाफ काम करने वाली संस्था बांग्लादेश हिंदू बौद्ध क्रिश्चियन यूनिटी काउंसिल ने इस घटना पर बहुत चिंता जताई है।
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बढ़े हैं हमले
संगठन का कहना है कि देश भर में अल्पसंख्यक समुदायों पर हमले तेजी से बढ़ रहे हैं। खासकर फरवरी में होने वाले नेशनल इलेक्शन के नजदीक आने के साथ यह हिंसा और ज्यादा बढ़ती ही जा रही है। भारत भी इस स्थिति पर गहरी नजर जमाए हुए है।
भारत ने जताई थी चिंता
पिछले हफ्ते भारत के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने नई दिल्ली में मीडिया से बात करते हुए कहा था, ‘बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों, उनके घरों और दुकानों पर चरमपंथियों द्वारा बार-बार हमले हो रहे हैं। यह बहुत चिंताजनक है। ऐसे साम्प्रदायिक घटनाओं को जल्द से जल्द और सख्ती के साथ रोकना चाहिए।’
उन्होंने आगे कहा कि कई बार इन हमलों को व्यक्तिगत दुश्मनी, राजनीतिक मतभेद या अन्य कारणों से जोड़कर कम करके दिखाने की कोशिश की जाती है। इससे चरमपंथी और अपराधी और हौसला पाते हैं, जबकि अल्पसंख्यकों में डर और असुरक्षा बढ़ती जाती है।
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पहले भी हुई है घटना
इससे पहले भी बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों की हत्या के मामले सामने आ चुके हैं। दीपू दास की हत्या ने काफी सुर्खियां बटोरी थीं और इसकी काफी आलोचना की गई थी। हालांकि, इसके बावजूद भी बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों के साथ अत्याचार की घटनाएं कम नहीं हो रही हैं।