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भारत को वापस मिलेगा कोहिनूर हीरा? ब्रिटेन के मंत्री ने दिया साफ जवाब

ब्रिटेन की मंत्री लिसा नंदी ने कोहिनूर हीरे को वापस करने की भारत की मांग के बारे में एक सवाल पूछा गया था, जिसका उन्होंने जवाब दिया।

Kohinoor diamond

कोहिनूर हीरा। Photo Credit (@Indic_Vibhu)

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दुनियाभर में प्रसिद्ध कोहिनूर हीरा ब्रिटेन में है। इस हीरे को भारत वापस लाने के लिए सरकार कोशिश करती रही है। मगर रविवार को इसको लेकर ब्रिटेन ने बड़ा बयान दिया है। यूनाइटेड किंगडम की संस्कृति, मीडिया और खेल सचिव लिसा नंदी ने कहा कि ब्रिटेन सांस्कृतिक कलाकृतियों के संबंध में सहयोग करने के लिए भारत के साथ बातचीत कर रहा है। लिसा नंदी का इशारा कोहिनूर हीरे की तरफ था।

 

दरअसल, लिसा नंदी से कोहिनूर हीरे को वापस करने की भारत की मांग के बारे में एक सवाल पूछा गया था, जिसका उन्होंने जवाब दिया। बता दे कि कोहिनूर हीरा 108 कैरेट का है। इसे महाराजा दुलीप सिंह ने साल 1849 में महारानी विक्टोरिया को दिया था। इसे 1937 में महारानी विक्टोरिया ने अपने मुकुट पर पहना था।

 

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भारत से बातचीत कर रहे- लिसा नंदी

 

संस्कृति मंत्री लिसा नंदी ने कहा, 'हम काफी समय से ब्रिटेन और भारत के बीच इस बारे में बातचीत कर रहे हैं कि हम किस तरह से एक साथ मिलकर इसको लेकर काम कर सकते हैं। इससे यह सुनिश्चित किया जा सकता है कि ब्रिटेन-भारत एक अलग युग की कई सांस्कृतिक कलाकृतियों से लाभ उठा सकें और उन तक उनकी पहुंच हो। यह कुछ ऐसा है जिस पर मैंने भारत के साथ चर्चा की है।'

 

 

'ब्रिटेन और भारत वास्तव में श्रेष्ठ हैं'

 

इस दौरान उन्होंने अपनी दिल्ली यात्रा के दौरान रचनात्मक, सांस्कृतिक और खेल क्षेत्रों में भारत के साथ ब्रिटेन की गहरी होती साझेदारी की भी पुष्टि की। लिसा नंदी ने कहा, 'रचनात्मक उद्योगों में ब्रिटेन और भारत वास्तव में श्रेष्ठ हैं। चाहे वह फिल्म, फैशन, टीवी, संगीत या गेमिंग हो। हम इन क्षेत्रों में वास्तव में अच्छे हैं और हम उनमें से कई उत्पादों को दुनिया भर में निर्यात करते हैं। लेकिन हम जानते हैं कि सहयोग के माध्यम से हम और अधिक कर सकते हैं और हम एक साथ ज्यादा हासिल कर सकते हैं।'

 

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उन्होंने आगे कहा कि ब्रिटेन का विज्ञान संग्रहालय संयुक्त सहयोग, संयुक्त प्रदर्शनियों, अलग-अलग वस्तुओं के लिए राष्ट्रीय संग्रहालय विज्ञान संग्रहालय ग्रुप के साथ मिलकर काम कर रहा है। इससे यह सुनिश्चित किया जा सकता है कि इससे भारत और ब्रिटेन के लोग सही मायनों में लाभान्वित हो सकें।

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