अफ्रीका के दो देशों कांगो और युगांडा में फैले इबोला ने पूरी दुनिया को डरा दिया है। रिपोर्ट्स के अनुसार, अफ्रीकी देश कांगो में इबोला वायरस का प्रकोप तेजी से फैल रहा है। वायरस के दुर्लभ बुंडीबुग्यो स्ट्रेन से अब तक करीब 120 लोगों की मौत हो चुकी है। बढ़ते मामलों को देखते हुए विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO)ने इसे पब्लिक हेल्थ इमरजेंसी ऑफ इंटरनेशनल कंसर्न घोषित कर दिया है। बंडीबुग्यो वायरस बहुत ज्यादा खतरनाक माना जाता है और भारत में भी इसको लेकर हलचल तेज हो गई है।
कांगो सरकार ने पूर्वी इटुरी राज्य में तीन नए इबोला उपचार केंद्र खोलने का फैसला लिया है। इसके साथ ही WHO विशेषज्ञों की टीम भी प्रभावित इलाकों में भेज रहा है। कांगो के अधिकारियों के मुताबिक नए संक्रमितों में एक अमेरिकी डॉक्टर भी शामिल है। संक्रमित व्यक्ति समेत सात अमेरिकियों को निगरानी के लिए जर्मनी भेजा जा रहा है।
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वायरस की दवाई नहीं
स्वास्थ्य अधिकारियों का कहना है कि इस वायरस के इलाज के लिए अभी तक कोई वैक्सीन या दवा उपलब्ध नहीं है। WHO के अनुसार, सोमवार तक इटुरी और उत्तरी किवू प्रांतों में 118 से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी थी और 300 से अधिक संदिग्ध मामले सामने आए थे। वहीं पड़ोसी देश युगांडा में भी एक मौत और एक संदिग्ध मामला दर्ज किया गया है।
मेडिकल सेक्टर से जुड़े एक्सपर्टस के मुताबिक बुंडीबुग्यो वायरस धीरे-धीरे फैलता रहा और कई हफ्तों तक इसकी पहचान नहीं हो सकी। अब बुनिया, मोंगब्वालू, बुटेम्बो और न्याकुंडे जैसे इलाकों में इसके मामले सामने आ चुके हैं। जॉर्जटाउन यूनिवर्सिटी के वैश्विक स्वास्थ्य नीति और राजनीति केंद्र के निदेशक मैथ्यू एम. कावानाग ने कहा कि शुरुआती जांच में वायरस के गलत स्वरूप की टेस्टिंग की गई, जिसके कारण रिपोर्ट गलत आई और कार्रवाई में कई हफ्तों की देरी हुई।
ट्रंप को क्यों बताया जिम्मेदार?
मैथ्यू एम. कावानाग ने ट्रंप पर भी हमला बोला। उन्होंने कहा कि WHO से हटने का ट्रंप प्रशासन का फैसला गलत था। उनके अनुसार, यह वही निगरानी प्रणाली है जिसका उद्देश्य इन वायरस का जल्द पता लगाना था। वायरस के लक्षणों की गंभीरता और बढ़ते मामलों के कारण बुनिया के कई इलाकों में दहशत का माहौल बढ़ता जा रहा है।
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कांगो ने दी जानकारी
कांगो ने कहा है कि 24 अप्रैल को बुनिया में इस वायरस से पहले व्यक्ति की मृत्यु हुई और शव को मोंगब्वालू स्वास्थ्य क्षेत्र में वापस लाया गया, जो एक खनन क्षेत्र है और जहां बड़ी आबादी रहती है। कांगो के स्वास्थ्य मंत्री सैमुअल रोजर काम्बा ने कहा, 'इसी वजह से इबोला का प्रकोप बढ़ गया।' कांगो के राष्ट्रीय जैव-चिकित्सा अनुसंधान संस्थान के चिकित्सा निदेशक डॉ. जीन-जैक्स मुयम्बे ने बताया कि पूर्वी कांगो के इटुरी प्रांत की राजधानी बुनिया में संक्रमित लोगों में एक अमेरिकी डॉक्टर भी शामिल है। अमेरिकी रोग नियंत्रण एवं रोकथाम केंद्र के डॉ. सतीश पिल्लई ने पत्रकारों को बताया कि संक्रमित व्यक्ति समेत सात अमेरिकियों को निगरानी के लिए जर्मनी भेजा जा रहा है।