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एक-दूसरे के डिप्लोमैट्स को निकाला, कैसे बिगड़े इजरायल और द. अफ्रीका के रिश्ते?

दक्षिण अफ्रीका ने अपने देश से इजरायल के राजनयिक को निकाल दिया। जवाब में इजरायल ने भी यही किया। मगर दोनों देशों के बीच रिश्ते इतने क्यों बिगड़े? आइये समझते हैं।

Cyril Ramaphosa and Benjamin Netanyahu.

सिरिल रामाफोसा और बेंजामिन नेतन्याहू। (Photo Credit: Social Media)

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ईरान के बाद अब इजरायल के दक्षिण अफ्रीका से रिश्ते तेजी से बिगड़ते जा रहे हैं। शुक्रवार को दक्षिण अफ्रीका ने अपने यहां इजरायल के राजनयिक एरियल सीडमैन को 72 घंटे में देश छोड़ने का आदेश दिया। कुछ ही देर में इजरायल ने भी पलटवार किया और दक्षिण अफ्रीका के राजनयिक शॉन एडवर्ड बाइनेवेल्ड्ट को देश छोड़ने का आदेश दिया। अब दोनों देशों के बीच राजनयिक संबंध टूटने का खतरा सताने लगा है। आइये समझते हैं कि दक्षिण अफ्रीका और इजरायल के बीछ रिश्ते कैसे बिगड़े, इसके पीछे कौन-कौन सी वजह हैं?

 

दक्षिण अफ्रीका के अंतरराष्ट्रीय संबंध और सहयोग विभाग (DIRCO) ने शुक्रवार दोपहर को ही अपनी वेबसाइट पर इजरायल के दूतावास के प्रभारी एरियल सीडमैन को अवांछित व्यक्ति घोषित किया। विभाग ने सीडमैन पर दक्षिण अफ्रीका के राष्ट्रपति सिरिल रामाफोसा के अपमान का आरोप लगाया है। यह भी कहा गया कि सोशल मीडिया पोस्ट के माध्यम से बार-बार दक्षिण अफ्रीका की संप्रभुता को चुनौती दी गई।

 

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दक्षिण अफ्रीका के एक्शन के बाद इजरायल ने उनके राजनयिक शॉन एडवर्ड बाइनेवेल्ड्ट को निकाल दिया। शॉन एडवर्ड वेस्ट बैंक के रामल्लाह में तैनात थे। अपने निर्णय के बारे में इजरायल ने बताया, 'अंतरराष्ट्रीय मंच पर इजरायल के खिलाफ दक्षिण अफ्रीका के झूठे हमलों और इजराइल के चार्ज डी अफेयर्स के खिलाफ उठाए गए एकतरफा, निराधार कदम के मद्देनजर दक्षिण अफ्रीका के वरिष्ठ राजनयिक प्रतिनिधि शॉन एडवर्ड बाइनेवेल्ड्ट अवांछित व्यक्ति हैं और उन्हें 72 घंटों के भीतर इजराइल छोड़ना होगा।'

कैसे बिगड़े दोनों के रिश्ते?

इजरायल और दक्षिण अफ्रीका के बीच तनातनी का मामला काफी पुराना है। नेल्सन मंडेला को साल 1990 में जेल से रिहा गया था। इसके बाद मंडेला ने फिलिस्तीनी नेता यासर अराफात को गले लगाया था। बतौर राष्ट्रपति नेल्सन मंडेलना ने 1997 में कहा था कि फिलिस्तीनियों की आजादी के बिना हमारी स्वतंत्रता अधूरी है। 

ताजा तनातनी कैसे शुरू हुई?

दक्षिण अफ्रीका की सरकार खुलकर फिलिस्तीन का समर्थन करती है। यही बात इजरायल को पसंद नहीं आती है। आज से करीब तीन साल पहले दोनों देशों के बीच रिश्ते तब बिगड़े जब दक्षिण अफ्रीका ने इजरायल के खिलाफ अंतरराष्ट्रीय न्यायालय (ICJ) में मुकदमा दर्ज किया। इसमें दक्षिण अफ्रीका ने इजरायल पर फिलिस्तीनियों के नरसंहार का आरोप लगाया। हालांकि इजरायल इन आरोपों को खंडन करता है।

इजरायल से क्यों खफा हुआ दक्षिण अफ्रीका?

दक्षिण अफ्रीका का आरोप है कि इजरायली दूतावास उसकी सरकार के खिलाफ सोशल मीडिया पर लगातार अभियान चला रहा था। इसमें न केवल राष्ट्रपति सिरिल रामाफोसा का अपमान किया गया, बल्कि देश की संप्रभुता को भी चुनौती दी गई।   

 

पिछले साल नवंबर में दक्षिण अफ्रीका में इजरायली दूतावास ने अपने सोशल मीडिया पर लिखा, 'दक्षिण अफ्रीकी सरकार ने अंतरराष्ट्रीय न्यायालय में इजरायल पर हमला करने में 100 मिलियन रैंड को बर्बाद कर दिया और अगले साल 500 मिलियन रैंड और बर्बाद करेगी। इसका दक्षिण अफ्रीकी की जनता के लिए कोई मूल्य नहीं, 100 फीसद सियासी ड्रामा है।'

 

नवंबर में ही दक्षिण अफ्रीका ने पहली बार जी 20 शिखर सम्मेलन की मेजबानी की। मगर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बहिष्कार कर दिया। जब राष्ट्रपति सिरिल रामाफोसा ने कहा कि 'बहिष्कार की सियासत काम नहीं करती' तो इजरायली दूतावास ने इस पर भी चुटकी ली और लिखा, 'राष्ट्रपति रामाफोसा की बुद्धिमत्ता और कूटनीतिक स्पष्टता का एक दुर्लभ पल।'

 

यहां चढ़ा रामाफोसा का पारा: भले ही इजरायल और दक्षिण अफ्रीका के बीच कई वर्षों से तनातनी चल रही थी, लेकिन आग में घी का काम इजरायल की एक हरकत ने की। जिसे दक्षिण अफ्रीका ने खुद की संप्रभुता का अपमान बताया। दरअसल, इजरायली राजनयिकों ने इसी हफ्ते दक्षिण अफ्रीका के पूर्वी केप प्रांत में थेम्बू राजा बुयेलेखाया डालिंड्येबो से मुलाकात की थी। दक्षिण अफ्रीका का आरोप है कि इजरायल ने इसकी जानकारी नहीं दी थी। बुयेलेखाया डालिंड्येबो मौजूदा समय में अबाथेम्बू जनजाति के शासक हैं। उनको इजरायल समर्थक माना जाता है। पिछले साल दिसंबर में राजा ने इजरायल की यात्रा भी की थी।

 

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इसके अलावा इजरायली विदेश मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी डेविड सारंगा ने भी अबाथेम्बू राजा बुयेलेखाया डालिंड्येबो से मुलाकात की थी। यहां सारंगा ने बाढ़ पीड़ितों को खाद्य सामग्री बांटी। दक्षिण अफ्रीका का आरोप है कि न इजरायली दूतावास और न ही राजा ने इस यात्रा की जानकारी दी।

 

बताया जा रहा है कि इजरायल ने जनजाति समुदाय के बच्चों को मुफ्त में शिक्षा, पानी की व्यवस्था और स्वास्थ्य सेवा देने का वादा किया। इजरायली दूतावास ने अपनी मदद का जिक्र किया और एक्स पर लिखा, ये वे वीडियो हैं, जिन्हें दक्षिण अफ्रीकी मीडिया आपको दिखाना नहीं चाहता था।' इजरायल की इन हरकतों से दक्षिण अफ्रीका की सरकार नाराज हो गई। इसके अलावा पूर्वी केप के प्रधानमंत्री लुबाबलो ऑस्कर माबुयाने ने भी अपना गुस्सा प्रकट किया।

 

उन्होंने इजरायल और राजा के बीच हुए समझौते खारिज कर दिया और देश की संप्रभुता पर हमला करार दिया। दक्षिण अफ्रीका का कहना है कि इस तरह की कार्रवाई राजनयिक विशेषाधिकार का घोर दुरुपयोग और वियना कन्वेंशन का मौलिक उल्लंघन है। 

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