logo

मूड

ट्रेंडिंग:

100 घंटे में 34013 करोड़ खर्च, ईरान युद्ध में पानी की तरह पैसा बहा रहे ट्रंप

ईरान के खिलाफ युद्ध में अमेरिका पानी की तरह पैसा बहाने में जुटा है। पहले 100 घंटे की युद्ध में 34 हजार करोड़ रुपये की रकम खर्च हो चुकी है। आने वाले दिनों में यह आंकड़ा और भी बढ़ने का अनुमान है।

America Iran War

अमेरिका-इजरायल और ईरान युद्ध। (AI generated image)

शेयर करें

google_follow_us

संबंधित खबरें

Advertisement
Group2

28 फरवरी की सुबह अमेरिका ने इजरायल के साथ मिलकर ईरान के खिलाफ ऑपरेशन एपिक फ्यूरी शुरू किया। अमेरिका का यह ऑपरेशन बेहद मंहगा साबित हो रहा है। सात दिनों से पूरे मध्य पूर्व में जंग जारी है। अमेरिका के अलावा इजरायल, ईरान, संयुक्त अरब अमीरात, कतर, कुवैत, बहरीन, सऊदी अरब, इराक, ओमान और जॉर्डन को भारी कीमत चुकानी पड़ रही है। हालांकि इन देशों में हुए नुकसान का अभी अनुमान नही हैं। मगर ऑपरेशन एपिक फ्यूरी के पहले 100 घंटे में अमेरिका ने अनुमानित तौर पर 3.7 बिलियन डॉलर की रकम खर्च कर दी है। भारतीय रुपये में बात करें तो यह रकम 34,013 करोड़ रुपये बनती है।

 

अमेरिका और इजरायल का मानना है कि ईरान के खिलाफ जंग कई हफ्तों तक चल सकती है। मतलब साफ है कि आने वाले समय में इसकी लागत और बढ़ेगी। अगर हर दिन का अनुमान लगाया जाए तो अमेरिका ने 891.4 मिलियन डॉलर की रकम खर्च की है। भारतीय रुपये में बात करें तो रोजाना करीब 8,194 करोड़ रुपये को ईरान की तबाही में फूंका गया है।

 

यह भी पढ़ें: तेहरान और इस्फान पर इजरायल ने तेज की बमबारी, कोम को खाली करने का आदेश

 

किस पर कितना खर्च

  • ऑपरेशन लागत: करीब 196 मिलियन डॉलर की रकम फूंकी गई।
  • गोला-बारूद: करीब 3.1 बिलियन डॉलर की धनराशि खर्च की गई।
  • नुकसान और मरम्मत: इस मद पर लगभग 359 मिलियन डॉलर।

 

वायुसेना: ईरान के खिलाफ अमेरिका के करीब 200 विमान ऑपरेशन में जुटे हैं। सेंटर फॉर स्ट्रैटजिक एंड इंटरनेशल स्टडीज ने अपनी एक रिपोर्ट में अनुमान लगाया कि अभियान में करीब 50 एफ-35 और एफ-22 जैसे स्टील्थ विमान, 110 नॉन-स्टील्थ विमान और 80 कैरियर-आधारित लड़ाकू विमान शामिल हैं। पहले 100 घंटे में अमेरिका ने जमीन से उड़ान भरने वाले फाइटर प्लेन पर 125.2 मिलियन डॉलर की रकम खर्च की। 

 

नौसेना: मौजूदा समय में अमेरिका ने फारस की खाड़ी, अरब सागर और भूमध्य सागर में दो विमानवाहक पोत, 14 विध्वंसक पोत और तीन तटीय युद्धपोतों की तैनाती की है। नौसेना संचालन में अमेरिका ने 100 घंटे में 64 मिलियन डॉलर खर्च किया। ऑपरेशन में आगे हिस्सा लेने पर रोजाना लगभग 15 मिलियन डॉलर का अतिरिक्त खर्च आएगा। 

 

जमीनी ऑपरेशन: पहले 100 घंटे में 7 मिलियन डॉलर खर्च होने का अनुमान है। दरअसल, यह रकम मध्य पूर्व में तैनात तोपखाना यूनिट, एयर डिफेंस सिस्टम और फील्ड आर्टिलरी के रख रखाव और ऑपरेशन में किया गया। पहले 100 घंटे में अमेरिका ने 2000 से अधिक गोला बारूद से ईरान पर हमला किया। अनुमान के मुताबिक इसमें करीब 3.1 बिलियन डॉलर की रकम खर्च की गई।

 

यह भी पढ़ें: 'सरेंडर के बिना कोई समझौता नहीं होगा', ट्रंप ने ईरान के सामने रख दी शर्त

 

टोमहॉक मिसाइल: शुरुआत में अमेरिका ने ईरान पर 160 से अधिक टोमहॉक मिसाइलें दागीं। जॉइंट एयर-टू-सरफेस स्टैंडऑफ मिसाइल (जेडीएएम) का भी इस्तेमाल किया। एक टोमाहॉक मिसाइल की कीमत 3.6 मिलियन डॉलर है। वहीं जेडीएएम की कीमत 80,000 डॉलर है।
 
तीन विमान क्रैश: अमेरिकी नौसेना के मुताबिक 4 मार्च तक ईरान ने 500 बैलिस्टिक मिसाइलें और 2,000 ड्रोन से हमला किया। इन्हें रोकने में कई तरह के एयर डिफेंस सिस्टम का इस्तेमाल करना पड़ा। अनुमान के मुताबिक एयर डिफेंस पर करीब 1.7 बिलियन डॉलर खर्च हुए। कुवैत में अमेरिका के तीन एफ- 15 विमान क्रैश हुए हैं। एक विमान की कीमत करीब 103 मिलियन डॉलर होती है। यानी कुल 309 मिलियन डॉलर का नुकसान हुआ है। 

 

 

 


और पढ़ें